30 साल पुराने आशियानों पर हथौड़ा चलाने की तैयारी: जनसुनवाई में निपानिया के रहवासियों ने लगाई न्याय की गुहार
KHULASA FIRST
संवाददाता

मास्टर प्लान की मार, नक्शे पास, टैक्स जमा, फिर भी बेघर होने के कगार पर मध्यमवर्गीय परिवार
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के विकास की बलि एक बार फिर उन मध्यमवर्गीय परिवारों को चढ़ाने की तैयारी है, जिन्होंने अपनी जीवनभर की पूंजी लगाकर दशकों पहले वैध कॉलोनियों में मकान बनाए थे। निपानिया क्षेत्र की दीप पैलेस और शिमला पार्क कॉलोनी के सैकड़ों रहवासी इन दिनों सरकारी नोटिस और बुलडोजर के खौफ के साए में जी रहे हैं।
मामला प्रस्तावित 30 मीटर (100 फीट) चौड़ी निपानिया मेन रोड का है, जिसके लिए नगर निगम ने सात दिन के भीतर घर और दुकानें खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया है। विडंबना यह है कि जिस मास्टर प्लान को आधार बनाकर यह कार्रवाई की जा रही है उसी के तहत वर्षों तक इन मकानों के नक्शे 18 मीटर (60 फीट) सड़क के आधार पर पास किए जाते रहे, लेकिन अब अचानक सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के निर्णय ने रहवासियों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है।
सड़क को 70 फीट तक सीमित रखने का प्रस्ताव
आशीष शर्मा ने बताया कि प्रशासन ने हाल के वर्षों तक 60 फीट सड़क के मापदंड पर ही नए निर्माणों की अनुमति दी और रजिस्ट्रियां भी इसी आधार पर हुईं तो अब अचानक इसे 100 फीट करना नागरिकों के साथ धोखा है। रहवासियों ने मानवीय आधार पर बीच का रास्ता निकालते हुए सड़क को 70 फीट तक सीमित रखने का प्रस्ताव दिया है, ताकि सड़क भी चौड़ी हो मास्टर प्लान की मार,नक्शे पास, टैक्स जमा फिर भी बेघर होने की कगार पर मध्यमवर्गीय परिवार जाए और किसी का घर न उजड़े। उन्होंने छावनी, जिंसी और बाणगंगा जैसे क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए समान न्याय की मांग की है, जहां स्थानीय परिस्थितियों के कारण सड़क की चौड़ाई कम की गई थी।
साक्ष्यों के साथ अपना पक्ष रखा
मंगलवार को नगर निगम की जनसुनवाई में गुहार लेकर पहुंचे रहवासी आशीष शर्मा, कृतिका शर्मा और शिल्पी अग्रवाल ने अधिकारियों के समक्ष साक्ष्यों के साथ अपना पक्ष रखा। रहवासियों का तर्क है कि दीप पैलेस कॉलोनी वर्ष 1996 से टीएंडसीपी से स्वीकृत है और वे नियमित रूप से टैक्स का भुगतान कर रहे हैं।
बैंक का कर्ज चुकाना असंभव हो जाएगा
इस पूरे विवाद में सबसे गंभीर पहलू आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना का है। शिल्पी अग्रवाल और अन्य रहवासियों ने बताया कि कई लोगों ने होम लोन लेकर ये संपत्तियां बनाई हैं, जिनकी किस्तें अब भी जारी हैं। यदि दुकानें और घर टूटते हैं तो आजीविका छिनने के साथ बैंक का कर्ज चुकाना असंभव हो जाएगा। जनसुनवाई में पहुंची महिलाओं ने भ्रष्टाचार और डराने-धमकाने के भी गंभीर आरोप लगाए हैं। फिलहाल, इन मध्यमवर्गीय परिवारों ने मुख्यमंत्री और कलेक्टर से भी गुहार लगाई है कि सिंहस्थ 2028 और विकास की आड़ में वैध मकानों को उजाड़ना शासन की मंशा नहीं होनी चाहिए।
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