मुख्यमंत्री की तीखी टिप्पणी के बाद खुलकर सामने आया राजनीतिक टकराव: अचानक नहीं हुआ सब कुछ; प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के बयान बने प्रमुख कारण
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल/इंदौर।
मध्य प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री द्वारा जीतू पटवारी को लेकर की गई तीखी टिप्पणियों के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। दोनों दलों के वरिष्ठ नेता एक-दूसरे पर लगातार हमलावर हैं और मामला प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है।
सीएम ने दो कार्यक्रमों में साधा निशाना
विवाद की शुरुआत तब और तेज हो गई जब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 31 मई को शाजापुर जिले के शुजालपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पटवारी को "दो कौड़ी का" और "रद्दी प्रदेश अध्यक्ष" तक कह दिया।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और जीतू पटवारी पर निशाना साधा
इसके कुछ घंटे बाद इंदौर में भाजपा के प्रशिक्षण वर्ग कार्यक्रम में भी मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और जीतू पटवारी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो नेता अपनी ही विधानसभा और अपने बूथ से चुनाव हार गया हो, वह भाजपा को चुनौती देने की बात कर रहा है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि कांग्रेस उन्हें "अभिनंदन लाल" कहती है, लेकिन यदि भाजपा के कार्यों के कारण विपक्ष घर बैठा है तो वे इस संबोधन को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।
क्यों बढ़ा विवाद?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया अचानक नहीं थी, बल्कि इसके पीछे पिछले कुछ दिनों में जीतू पटवारी द्वारा दिए गए बयान प्रमुख कारण बने।
सतना में कहा था "मोहन अभिनंदन यादव"
26 मई को सतना में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री का नाम लेते हुए व्यंग्यात्मक अंदाज में उन्हें "मोहन अभिनंदन यादव" कहा था। उन्होंने मंच से मौजूद लोगों से मुख्यमंत्री को पहचानने और उनका "अभिनंदन" करने की बात भी कही थी। पटवारी ने यह भी कहा था कि मुख्यमंत्री के कार्यकाल को ढाई साल हो चुके हैं, लेकिन जनता में उनकी पहचान उतनी मजबूत नहीं है जितनी होनी चाहिए।
इंदौर में लगाया था बड़ा आरोप
इसी दिन इंदौर के राजवाड़ा क्षेत्र में जल संकट को लेकर आयोजित कांग्रेस प्रदर्शन में पटवारी ने भाजपा नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। अपने भाषण में उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को "सबसे बड़ा माफिया" तक कह दिया था। इस बयान के बाद भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।
पुराने विवाद भी आए चर्चा में
मुख्यमंत्री और भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया के दौरान जीतू पटवारी के पुराने विवादित बयानों की भी चर्चा फिर से शुरू हो गई। वर्ष 2025 में उज्जैन के एक कार्यक्रम में पटवारी ने सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर कथित "नारायण टैक्स" का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ व्यवसायियों से अवैध वसूली की जा रही है। इस बयान के बाद मुख्यमंत्री के भाई नारायण यादव की ओर से पटवारी को मानहानि का नोटिस भी भेजा गया था।
कांग्रेस ने दिखाई एकजुटता
मुख्यमंत्री के बयानों के बाद कांग्रेस पूरी तरह जीतू पटवारी के समर्थन में खड़ी दिखाई दी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं दिग्विजय सिंह, कमल नाथ, अरुण यादव और सज्जन सिंह वर्मा सहित कई नेताओं ने मुख्यमंत्री के बयान की आलोचना करते हुए माफी की मांग की। वहीं जीतू पटवारी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और जनता के मुद्दे उठाते रहेंगे। उन्होंने अपने समर्थकों से संयम बनाए रखने की अपील भी की।
भाजपा ने संभाला मोर्चा
दूसरी ओर भाजपा संगठन भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत पार्टी के कई नेताओं और प्रवक्ताओं ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देना शुरू कर दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को पहले अपने नेतृत्व और संगठन की स्थिति पर विचार करना चाहिए। पार्टी की ओर से पटवारी के पुराने बयानों और वीडियो को भी सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है।
चुनावी राजनीति की नई शुरुआत?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में नगरीय निकाय, पंचायत और अन्य राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतर चुकी हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री मोहन यादव और जीतू पटवारी के बीच शुरू हुई यह सियासी जंग आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है।
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