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पेट्रोल-डीजल के दामों में फिर आग: 11 दिन में चौथी बढ़ोतरी; जनता पर महंगाई की मार

KHULASA FIRST

संवाददाता

25 मई 2026, 11:24 am
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पेट्रोल-डीजल के दामों में फिर आग

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ऑयल कंपनियों ने एक बार फिर ईंधन के दामों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। रविवार 25 मई को पेट्रोल 2.61 रुपए प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपए प्रति लीटर महंगा हो गया। लगातार बढ़ रही कीमतों के चलते प्रदेश के कई शहरों में डीजल 100 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच गया है, जबकि पेट्रोल 116 रुपए के करीब बिक रहा है।

उज्जैन प्रदेश का सबसे महंगा शहर
नई दरों के बाद राजधानी भोपाल में पेट्रोल 114.65 रुपए और डीजल 99.74 रुपए प्रति लीटर हो गया है। वहीं उज्जैन प्रदेश का सबसे महंगा शहर बन गया है, जहां पेट्रोल 115.03 रुपए और डीजल 100.11 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। इंदौर में पेट्रोल 114.54 रुपए और डीजल 99.57 रुपए तक पहुंच गया है। ग्वालियर और जबलपुर में भी कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है।

11 दिन में चौथी बार बढ़े दाम, 8 रुपए तक महंगा हुआ तेल
मई महीने में यह चौथी बार है जब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 15 मई, 19 मई और 23 मई को भी तेल कंपनियां कीमतों में इजाफा कर चुकी हैं। लगातार चार बार हुई बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल और डीजल करीब 8 रुपए प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं।

इस महीने कब-कब बढ़े दाम
15 मई 2026 — पहली बार करीब 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी
19 मई 2026 — दूसरी बार लगभग 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी
23 मई 2026 — तीसरी बार 87 से 91 पैसे तक बढ़ोतरी
25 मई 2026 — चौथी बार करीब 3 रुपए प्रति लीटर का इजाफा

लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी के घरेलू बजट पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है।

डीजल महंगा होने से बढ़ेगी महंगाई
विशेषज्ञों का कहना है कि डीजल महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव बाजार की लगभग हर वस्तु पर पड़ेगा। ट्रकों और मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ने से सब्जियां, फल, राशन और दूसरे राज्यों से आने वाला सामान महंगा हो सकता है।

उज्जैन प्रदेश का सबसे महंगा शहर
प्रदेश में अगले कुछ दिनों में मालभाड़ा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा हुआ तो रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। किसानों पर भी इसका असर पड़ेगा, क्योंकि ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने की लागत बढ़ जाएगी। इससे खेती महंगी होगी और अनाज उत्पादन की लागत में भी इजाफा हो सकता है। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन, स्कूल बस और ऑटो किराए में भी बढ़ोतरी की आशंका है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की तेजी बनी वजह
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल को मुख्य वजह बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ने से पहले क्रूड ऑयल लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल था, जो अब 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के कारण सरकारी तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ गया था। कंपनियों का कहना है कि लंबे समय से कीमतें स्थिर होने के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था, जिसकी भरपाई के लिए रेट बढ़ाना जरूरी हो गया।

आखिर कैसे तय होते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम के तहत हर सुबह 6 बजे नए रेट जारी करती हैं।

चुनाव से पहले मिली थी राहत
मार्च 2024 से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें लंबे समय तक स्थिर बनी हुई थीं। लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने आम जनता को राहत देते हुए 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी। हालांकि अब अंतरराष्ट्रीय हालात और बढ़ती लागत के कारण कंपनियों ने फिर से दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं।

तेल कंपनियों को हर महीने हजारों करोड़ का नुकसान
सरकार के अनुसार इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री में भारी घाटा हो रहा था। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के मुताबिक कंपनियों को हर महीने लगभग 30 हजार करोड़ रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कमलनाथ ने सरकार पर साधा निशाना
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने पहली बढ़ोतरी के समय ही चेतावनी दी थी कि ईंधन के दाम लगातार बढ़ेंगे, लेकिन सरकार ने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया। कमलनाथ ने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई का बोझ सीधे जनता पर डाल रही है।

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