दस्तावेजों में ‘मृत’ व्यक्ति पहुंच गया जनसुनवाई में
KHULASA FIRST
संवाददाता

आईडीए, पटवारी और भूमाफियाओं पर हत्या की साजिश, फर्जी दस्तावेज गढ़ने और कब्जे के गंभीर आरोप
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देवास नाका और निरंजनपुर क्षेत्र की बेशकीमती जमीनों को लेकर विवाद एक बार फिर जनसुनवाई में पहुंचा। मनजीत सिंह ने आईडीए, आरआई संगीता, तहसीलदार जूनी इंदौर, पटवारी रवि चौधरी सहित कई अधिकारियों और कथित भूमाफियाओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई।
इसमें सीमांकन नहीं करने, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, जमीन पर अवैध कब्जा कराने और जान से मारने की साजिश रचने तक के आरोप लगाए हैं। मनजीत सिंह ने बताया 2006 में विदेश जाने के बाद 2007 में लौटे तो अखबारों से जानकारी मिली उन्हें मृत घोषित कर उनकी कई संपत्तियां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेच दी गई हैं। 12 वर्षों से लगातार शिकायत कर रहे हैं, लेकिन न्याय नहीं मिला।
जानबूझकर टाली जा रही कार्रवाई- मनजीत सिंह पिता मुख्तियार सिंह ने आरोप लगाया उनके पूर्व के आवेदनों पर जानबूझकर कार्रवाई नहीं की गई और लगातार समय लिया जाता रहा, ताकि संबंधित लोग उन्हें नुकसान पहुंचा सकें। उन पर दो बार हमला कराया जा चुका है।
सीमांकन प्रक्रिया केवल दिखावे के लिए की। न लसूड़िया पुलिस को बुलाया, न ही नपती के लिए मशीन या तकनीकी टीम मौजूद थी। आरोप है मौके पर मौजूद अधिकारी चुपचाप खड़े रहे और किसी सवाल का जवाब नहीं दिया। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया पूरा घटनाक्रम आईडीए के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर हुआ।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया मामले का खुलासा होने के बाद कब्जाधारियों और उनके गिरोह द्वारा कई बार जान से मारने की कोशिश की गई। इसकी शिकायत संबंधित थानों में भी दर्ज कराई गई है।
मृत घोषित कर बेची करोड़ों की जमीन
मनजीत सिंह ने आरोप लगाया जब भी अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की जाती है तो जमीन की वर्तमान कीमत की 10 प्रतिशत तक रिश्वत मांगी जाती है। कुछ वकीलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
1800 करोड़ की जमीन पर कब्जे का आरोप
शिकायत में निरंजनपुर, लसूड़िया मोरी और विजय नगर क्षेत्र की कई संपत्तियों का उल्लेख है। इनमें निरंजनपुर स्थित लगभग 8 हेक्टेयर, लसूड़िया मोरी क्षेत्र की 6500 वर्गफीट से अधिक और विजय नगर की निर्माणाधीन संपत्ति शामिल है। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इन सभी संपत्तियों की कुल बाजार कीमत 1700 से 1800 करोड़ रुपए के बीच है।
कुछ अधिकारियों, कारोबारियों और कथित भूमाफियाओं के नाम लेते हुए आरोप लगाया गया कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर कब्जा किया गया और बाद में संपत्तियां बेच दी गईं। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि IDA अधिकारियों ने इन लोगों को संरक्षण दिया।
फर्जी एनओसी से जमीन हड़पने की कोशिश
शिकायतकर्ता के अनुसार सीकेडी ढाबा की जमीन के नामांतरण को लेकर उन्हें बुलाया गया, लेकिन बाद में पता चला संबंधित एनओसी ही फर्जी है। मनजीत सिंह का दावा है जिस जमीन को आइडीए की स्कीम नंबर 78 में शामिल बताया जा रहा है, वह वास्तव में योजना क्षेत्र में आती ही नहीं है और अलग है, जहां वर्तमान में चौधरी का ढाबा है।
आरटीआई दस्तावेजों से खुलासा होने का दावा
मनजीत सिंह का कहना है सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त दस्तावेजों से स्पष्ट हुआ उनकी जमीन आईडीए की स्कीम नंबर 78 में नहीं है। इसके बावजूद जांच रिपोर्ट में कथित रूप से फर्जी दस्तावेज लगाए गए। उन्होंने मांग की मूल दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश- कलेक्टर शिवम वर्मा ने शिकायत स्वीकार कर संबंधित अधिकारियों को दस्तावेजों का पुनः परीक्षण करने और उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही आईडीए से स्पष्ट जानकारी मांगी गई है विवादित जमीन स्कीम नंबर 78 में शामिल है या नहीं?
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