फीनिक्स मॉल का पक्का अतिक्रमण: गरीबों के आशियाने उजाड़ने वाले प्रशासन की इतनी घिसी-पिटी कार्रवाई क्यों?
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट…इंदौर।
बायपास स्थित फीनिक्स सीटाडेल मॉल के पास पिछले दिनों प्रशासन द्वारा की गई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण और दिखावटी साबित हुई है।
एसडीएम घनश्याम धनगर, इंदौर विकास प्राधिकरण और नगर पालिका निगम की रिमूवल टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई तो की, लेकिन इसमें सीधे-सीधे प्रशासनिक नाकामी और भेदभाव का बड़ा खुलासा हुआ है। अमले ने नगर विकास योजना क्रमांक 04 के अंतर्गत आने वाले 22 गरीब परिवारों के कच्चे और अस्थायी मकानों को हटाने में तो पूरी तत्परता दिखाई, लेकिन जब बारी फीनिक्स सिटाडेल मॉल के भारी-भरकम पक्के अतिक्रमण को ढहाने की आई, तो जिम्मेदार अफसरों के हाथ कांपने लगे।
इस कार्रवाई से पहले आईडीए और नगर निगम की तकनीकी टीम ने बाकायदा सर्वे करके मास्टर प्लान की सड़क पर आ रहे मॉल के अवैध निर्माण को चिह्नित किया था और उस पर लाल स्याही से बड़े-बड़े निशान भी लगाए थे। इसके बावजूद, जब बुलडोजर चलाने की बारी आई तो केवल मॉल की बाउंड्री वॉल का एक नाममात्र का हिस्सा तोड़कर रस्म अदायगी कर दी गई और मुख्य अवैध निर्माण को हाथ तक नहीं लगाया गया।
केवल गरीबों को निशाना बनाया
इस लचर रवैये को लेकर स्थानीय निवासियों बंटी चौहान, राजेश चौहान और दिनेश कुशवाहा ने विरोध जताते हुए प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका स्पष्ट आरोप है कि मास्टर प्लान की आड़ में केवल गरीबों को निशाना बनाया गया, जबकि मॉल प्रबंधन द्वारा मुख्य मार्ग और वाहन पार्किंग क्षेत्र में किए गए पक्के अवैध निर्माण के आगे पूरा प्रशासनिक तंत्र बेअसर हो गया।
अवैध निर्माण चिह्नित कर लगाए थे निशान
आरोप... खानापूर्ति कर लौट गया नगर निगम और आईडीए का बुलडोजर
मास्टर प्लान की सड़क निगलने वाले पर मेहरबान हुआ अमला आधी-अधूरी कार्रवाई को बताया सफलता
प्रशासनिक अधिकारियों ने राजस्व विभाग, पुलिस और नगर निगम के संयुक्त अमले की इस आधी-अधूरी कार्रवाई को ‘सफलतापूर्वक' पूरा बताकर सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराने का ढिंढोरा पीटा है। धरातल की कड़वी सच्चाई यह है कि मॉल के पक्के अतिक्रमण को पूरी तरह हटाए बिना इस 1100 मीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य व्यवस्थित रूप से शुरू होना नामुमकिन है।
इंदौर को नंबर वन बनाने का दावा करने वाला नगर निगम प्रशासन और आईडीए बड़े पैसे वालों के सामने पूरी तरह लाचार साबित हुआ है। गरीबों के आशियाने उजाड़ने में तेजी दिखाने वाले अधिकारियों का बुलडोजर करोड़ों रुपये के मॉल के अवैध हिस्से को ढहाने में आखिर क्यों पीछे हट गया, यह सवाल अब पूरे इंदौर में प्रशासन की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
पार्किंग शुल्क के नाम पर अवैध वसूली का खेल... हकीकत यह है कि फीनिक्स सीटाडेल मॉल के उत्तरी भाग में, प्राधिकरण की नगर विकास योजना क्रमांक 04 के तहत बायपास से झलारिया को जोड़ने वाली 30 मीटर चौड़ी और 1100 मीटर लंबी मास्टर प्लान की सड़क प्रस्तावित है। इस सड़क के करीब 200 मीटर हिस्से को मॉल प्रबंधन ने अवैध रूप से बाउंड्री वॉल, लोहे की बैरिकेडिंग और पार्किंग बनाकर पूरी तरह रोक लिया है।
इतना ही नहीं, इस शासकीय और सार्वजनिक भूमि पर दोनों ओर गाड़ियां खड़ी करवाकर पार्किंग शुल्क के नाम पर अवैध वसूली का खेल धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। इस भारी अतिक्रमण के कारण इस मुख्य मार्ग पर दिनभर राशियों और वाहनों का रेंगना लगा रहता है और आम जनता को घंटों लंबे ट्रैफिक जाम की परेशानी झेलनी पड़ती है।
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