19 दिन में 7.72 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन: चारधाम यात्रा पर जाने से पहले जरूरी बातें; वरना पड़ सकता है पछताना
KHULASA FIRST
संवाददाता

चारधाम यात्रा
खुलासा फर्स्ट, देहरादून।
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ जारी है। 19 अप्रैल को शुरू हुई इस पवित्र यात्रा के 19 दिनों में ही 7 लाख 72 हजार से अधिक श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं।
हर दिन बड़ी संख्या में तीर्थयात्री पहुंच रहे हैं और आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। हालांकि ऊंचाई और कठिन मौसम के कारण अब तक 29 श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य कारणों से मौत भी हो चुकी है।
किस धाम में कितने श्रद्धालु- चारों धामों में केदारनाथ सबसे आगे है। यहां अब तक करीब 3 लाख 45 हजार श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। बद्रीनाथ धाम में 1 लाख 85 हजार के करीब तीर्थयात्री पहुंचे हैं। यमुनोत्री में लगभग 1 लाख 16 हजार और गंगोत्री में 1 लाख 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं।
कब खुले कपाट- इस वर्ष चारधाम यात्रा 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलने के साथ शुरू हुई। केदारनाथ धाम 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ धाम 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया।
क्यों खास है चारधाम यात्रा- हिंदू धर्म में चारधाम यात्रा को अत्यंत पवित्र और मोक्षदायी माना जाता है। हिमालय की ऊंचाइयों में बसे यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ ।
इन चारों धामों की यात्रा आत्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग मानी जाती है। परंपरा के अनुसार यात्रा पश्चिम से पूर्व की ओर यमुनोत्री से शुरू होकर गंगोत्री, केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ तक की जाती है।
मान्यता है कि 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य ने हिंदू आध्यात्मिक परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए इस तीर्थयात्रा को लोकप्रिय बनाया था।
यात्रा चुनौतीपूर्ण भी- श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ-साथ यात्रा की कठिनाइयां भी कम नहीं हैं। ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, कड़ाके की ठंड और लंबे पैदल मार्ग स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहे हैं।
यात्रा शुरू होने से अब तक 29 श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य कारणों से मौत हो चुकी है। विशेषज्ञ बुजुर्गों और हृदय रोगियों को यात्रा से पहले पूरी चिकित्सीय जांच कराने की सलाह देते हैं।
हर साल लाखों श्रद्धालु अटूट आस्था के साथ चारधाम यात्रा पर निकलते हैं। पहाड़ों का यह सफर जितना पुण्यदायी है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। जो यात्री बिना तैयारी के निकल पड़ते हैं, उन्हें बीच रास्ते में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं के अनुभव और जानकारों की सलाह के आधार पर जानिए वे जरूरी बातें जो इस यात्रा को सुरक्षित और यादगार बना सकती हैं।
रजिस्ट्रेशन सबसे पहले, सबसे जरूरी- यात्रा की पहली और अनिवार्य शर्त है रजिस्ट्रेशन। कई लोग इसे हल्के में लेकर बिना रजिस्ट्रेशन के ही निकल पड़ते हैं।
यह न सिर्फ सरकारी नियमों के खिलाफ है, बल्कि चेकपोस्ट पर रोके जाने पर कीमती समय और श्रद्धा दोनों पर पानी फिर सकता है। यात्रा शुरू करने से पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अवश्य करा लें।
मौसम का कोई भरोसा नहीं- पहाड़ों में मौसम पल-पल बदलता है। कभी तेज धूप, कभी अचानक बारिश और कभी कड़ाके की ठंड। यमुनोत्री में बारिश से रास्ते फिसलन भरे हो जाते हैं, गंगोत्री में सुबह कड़ाके की ठंड रहती है तो दिन चढ़ने पर मौसम सुहावना हो जाता है।
इसलिए बैग में अच्छी क्वालिटी का रेनकोट और पर्याप्त गर्म कपड़े रखना बेहद जरूरी है। जूतों का सही चुनाव बचाएगा मुसीबत से- पहाड़ की चढ़ाई में जूते सबसे अहम साथी होते हैं। फैशनेबल या हल्के जूते पहाड़ पर धोखा दे सकते हैं। मजबूत ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज पहनें जो फिसलन भरे और पथरीले रास्तों पर टिके रह सकें।
थकान से बचने के लिए स्नैक्स साथ रखें- लंबी चढ़ाई में ऊर्जा बनाए रखना बेहद जरूरी है। बैग में ड्राय फ्रूट्स, एनर्जी बार, बिस्कुट और पानी की बोतल जरूर रखें।
रास्ते में हर जगह खाने-पीने की सुविधा नहीं मिलती और खाली पेट ऊंचाई पर चढ़ना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
बुजुर्ग और हृदय रोगी बरतें विशेष सावधानी-ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी और कड़ी चढ़ाई बुजुर्गों और हृदय रोगियों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। यात्रा से पहले पूरी चिकित्सीय जांच कराएं। डॉक्टर की सलाह के बाद ही यात्रा पर निकलें और जरूरी दवाइयां साथ रखना न भूलें।
चारधाम यात्रा 2026 में नया ट्रेंड: बच्चे भी पहुंच रहे केदारनाथ, मांग रहे हैं भोली-भाली दुआएं
चा रधाम यात्रा हमेशा से बड़े-बुजुर्गों की आस्था का केंद्र रही है, लेकिन इस बार पहाड़ों की कठिन राहों पर एक नया नजारा दिख रहा है। छोटे-छोटे बच्चे, जिनके कंधों पर अभी किताबों का बोझ होना चाहिए, वे भगवान के दरबार में अपनी मासूम दुआएं लेकर पहुंच रहे हैं।
कोई डॉक्टर बनने का आशीर्वाद मांग रहा है, तो कोई परिवार की खुशहाली की दुआ कर रहा है। इन बच्चों की भोली बातें और चेहरे की चमक इस पवित्र यात्रा को और भी खास बना रही है।
‘डॉक्टर बनना है, बाबा से मांगने आया हूं’-यात्रा में कुछ बच्चों ने ऐसी बातें कहीं जो सुनने वालों के दिल को छू गईं। एक बच्चे ने बताया कि वह भगवान से डॉक्टर बनने का आशीर्वाद मांगने आया है। इन मासूम इच्छाओं में न कोई दिखावा है, न कोई लालच बस सच्ची श्रद्धा और एक बच्चे का भरोसा कि भगवान उसकी सुनेंगे।
मोबाइल वीडियो से असलियत तक- बिहार के मधेपुरा जिले की 12 वर्षीय श्रेया कुमारी पहली बार चारधाम यात्रा पर निकली हैं। केदारनाथ और बद्रीनाथ के बारे में उन्होंने अब तक सिर्फ मोबाइल वीडियो और मां की कहानियों में सुना था।
अब जब खुद वहां जाने का मौका मिला तो उनकी खुशी देखते ही बनती है। भगवान शिव के दर्शन को लेकर उनका उत्साह अलग ही नजर आता है। जब उनसे पूछा गया कि भगवान से क्या मांगेंगी, तो मुस्कुराते हुए बोलीं विश किसी को नहीं बताते। लेकिन इतना जरूर कहा कि उनकी मन्नत परिवार की खुशहाली से जुड़ी है।
क्यों खास है बच्चों का यह उत्साह- चारधाम यात्रा सिर्फ मोक्ष और आशीर्वाद का सफर नहीं है। यह भावनाओं, उम्मीदों और पीढ़ियों के संस्कारों का संगम भी है। इस बार बच्चों की बढ़ती भागीदारी यह बताती है कि माता-पिता उन्हें बचपन से ही आस्था और संस्कृति से जोड़ रहे हैं।
पहाड़ की कठिन चढ़ाई पर भी इन बच्चों का हौसला और उत्साह जरा भी कम नहीं दिखता बल्कि यही जज्बा बड़ों को भी प्रेरित करता है।
केदारनाथ के लिए खास सलाह- यात्री धीरज सिंह तोमर, जो हाल ही में यात्रा कर लौटे हैं, ने बताया कि केदारनाथ की चढ़ाई के लिए सीतापुर में रात रुककर सुबह जल्दी यात्रा शुरू करना सबसे बेहतर रहता है। इससे दिन की गर्मी और भीड़ दोनों से बचा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि उनके साथ महिलाएं और बुजुर्ग भी थे, लेकिन सही तालमेल और धैर्य की बदौलत सभी ने सुरक्षित दर्शन किए।
चारधाम यात्रा पर साइबर ठगों की नजर: सस्ते पैकेज और वीआईपी दर्शन का झांसा, ऐसे बचें
चारधाम यात्रा शुरू होते ही साइबर ठगों ने भी अपना धंधा चमका लिया है। हेलीकॉप्टर बुकिंग, सस्ते ट्रैवल पैकेज और वीआईपी दर्शन का लालच देकर श्रद्धालुओं को निशाना बनाया जा रहा है।
फर्जी वेबसाइट, सोशल मीडिया विज्ञापन और व्हाट्सएप मैसेज के जरिए ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। नोएडा कमिश्नरेट पुलिस ने विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है।
कैसे फंसाते हैं ठग- साइबर अपराधियों का तरीका बेहद चालाक है। वे गूगल सर्च और सोशल मीडिया पर ऐसे विज्ञापन चलाते हैं जो बिल्कुल सरकारी पोर्टल जैसे दिखते हैं।
खुद को अधिकृत ट्रैवल एजेंट बताकर संपर्क करते हैं और फिर शुरू होता है असली खेल। श्रद्धालुओं को 20 से 30 प्रतिशत तक डिस्काउंट, कंफर्म टिकट और ‘आखिरी सीट बची है’ जैसे झूठे दबाव में जल्दी भुगतान करने को मजबूर किया जाता है।
फर्जी UPI आईडी और QR कोड भेजे जाते हैं। जैसे ही पैसा ट्रांसफर होता है। मोबाइल बंद, ठग फरार। डीसीपी साइबर सेल शैव्या गोयल के अनुसार हेलीकॉप्टर सेवा की भारी मांग को देखते हुए फर्जी बुकिंग वेबसाइटें खासतौर पर बनाई गई हैं। एडवांस बुकिंग के नाम पर हजारों रुपए ऐंठे जा रहे हैं।
सरकारी वेबसाइट से ही करें बुकिंग- उत्तराखंड सरकार ने हेलीकॉप्टर बुकिंग के लिए अधिकृत वेबसाइट heliyatra.irctc.co.in जारी की है। पर्यटन विभाग का आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर 8394338833 है। इसके अलावा किसी भी लिंक, अनजान वेबसाइट या सोशल मीडिया विज्ञापन पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।
इन बातों का रखें ध्यान- बुकिंग हमेशा सरकारी या अधिकृत पोर्टल से ही करें। ‘आखिरी सीट’, ‘तुरंत बुक करें’ जैसे दबाव में कभी भुगतान न करें। अनजान QR कोड या UPI आईडी पर पैसे न भेजें।
किसी भी वेबसाइट का URL ध्यान से जांचें। एक छोटी सी गलत स्पेलिंग फर्जी साइट की निशानी है। ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। समय पर शिकायत करने से रकम वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
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