आदिवासी नेता को औकात बताने का विरोध: इस्तीफे की मांग; कांग्रेस ने बड़बोले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पुतले जलाए
KHULASA FIRST
संवाददाता

राजवाड़ा पर बीजेपी महिला मोर्चा ने जीतू पटवारी और उमंग सिंघार का पुतला जलाया
इंदौर शहर महिला कांग्रेस ने जंजीरवाला चौराहे पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का पुतला जलाया
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में कांग्रेस ने पूरे इंदौर शहर में प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पुतले जलाए। भागीरथपुरा के दूषित जल हादसे को लेकर मंत्री के इस्तीफा और आदिवासी नेता उमंग सिंगार को औकात बताने का विरोध करते हुए यह आंदोलन किया गया।
चौकसे ने बताया कि इंदौर शहर कांग्रेस के द्वारा अपने सभी 24 ब्लॉक में विजयवर्गीय के पुतले जलाने का आदेश दिया गया था। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर सभी ब्लॉक अध्यक्ष के द्वारा अपने-अपने ब्लॉक में प्रमुख चौराहे पर विजयवर्गीय का पुतला खड़ा करके उसे जलाया गया।
हर क्षेत्र में बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद थे। इन नागरिकों ने विजयवर्गीय के द्वारा विधानसभा में बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार को औकात बताने वाली बात कहने का विरोध किया। इन नागरिकों का कहना था कि भागीरथपुरा की घटना के लिए महापौर पुष्यमित्र भार्गव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सीधे तौर पर दोषी हैं।
इन दोनों को अपने मन से ही नैतिकता के नाते इस्तीफा देना चाहिए था। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार जी के प्रति की गई अपमानजनक एवं असंसदीय टिप्पणी के विरोध में आज इंदौर शहर के विभिन्न ब्लॉकों में प्रतीकात्मक पुतला दहन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
अहंकार और तानाशाही के विरुद्ध शंखनाद...इंदौर की विधानसभा-1 आज गवाह बनी जनाक्रोश की। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अमर्यादित भाषा, अहंकार और विवादित कार्यशैली के खिलाफ रीटा डागरे के नेतृत्व में महिला कांग्रेस परिवार ने ‘मरीमाता’ पर हुंकार भरी। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के विरुद्ध की गई अभद्र टिप्पणी के विरोध में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी, शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे एवं जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े के नेतृत्व में आज कैलाश विजयवर्गीय का पुतला दहन कर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।
कैलाश विजयवर्गीय: बयानों का विवादित और काला इतिहास
यह प्रदर्शन सिर्फ एक बयान के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके वर्षों से चले आ रहे शर्मनाक बयानों के खिलाफ है...
मीडिया (लोकतंत्र का चौथा स्तंभ) का अपमान: सत्ता के मद में चूर विजयवर्गीय ने पत्रकारों के सवालों से चिढ़कर उन्हें ‹गधा› कहकर संबोधित किया, जो स्वतंत्र पत्रकारिता पर सीधा प्रहार है।
अधिकारियों को धमकी: इंदौर की सड़कों पर खड़े होकर खुलेआम कहा था कि “अगर संघ के पदाधिकारी यहाँ न होते, तो आज पूरे शहर में आग लगा देता।”
महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी: महिलाओं के पहनावे पर टिप्पणी करते हुए उनकी तुलना ‹शूर्पणखा› से की, जो उनकी संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है।
बैट कांड का समर्थन: पुत्र द्वारा सरकारी अधिकारी को क्रिकेट बैट से पीटने की घटना का सार्वजनिक रूप से बचाव किया।
अग्निवीरों का मजाक : सेना भर्ती की अग्निपथ योजना पर बोलते हुए कहा कि वे भाजपा कार्यालय में ‹अग्निवीरों› को सुरक्षा गार्ड रखेंगे, जो देश के जवानों का अपमान है।
माननीय उमंग सिंघार पर ताज़ा हमला: विधानसभा की गरिमा को ताक पर रखकर नेता प्रतिपक्ष के विरुद्ध जिस अमर्यादित भाषा का उपयोग किया गया, वह उनके आदिवासी विरोधी चेहरे को उजागर करता है।
कैलाश विजयवर्गी के संरक्षण में उनकी विधानसभा में महिला मोर्चा मंडल उपाध्यक्ष ने एक महिला को पानी के लिए महीनों तरसा दिया और पीड़ित को फांसी लगाकर आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया आज पीड़ित अस्पताल में अपना उपचार करवा रही हैं।
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