अफसरों के टोटे में घिरे मलाईदार पद: व्यवस्था चरमराई; वन विभाग में एक चेहरा, चार प्रभार
KHULASA FIRST
संवाददाता

358 स्वीकृत पदों पर महज 50 अफसर, कानूनी कार्रवाई ठप
देवास से इंदौर तक की कमान अमित सोलंकी के पास
चंचल भारतीय 98936-44317 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रदेश का वन विभाग इन दिनों अधिकारियों की भारी कमी से जूझ रहा है।
आलम यह है कि स्वीकृत 358 उप वन मंडल अधिकारी एसडीओ के पदों के मुकाबले महज 50 से 60 अफसर ही मैदानी मोर्चा संभाले हुए हैं। इस प्रशासनिक संकट के बीच चहेते अधिकारियों को एक साथ कई मलाईदार पदों की जिम्मेदारियां सौंपकर काम चलाया जा रहा है।
इसका सबसे बड़ा उदाहरण इंदौर वन विभाग में देखने को मिला, जहां मूल रूप से देवास में पदस्थ सहायक वन संरक्षक अमित सोलंकी के कंधों पर अकेले ही चार महत्वपूर्ण पदों का जिम्मा डाल दिया गया है।
अमित सोलंकी के पास वर्तमान में सहायक वन संरक्षक सामाजिक वानिकी देवास इकाई के मूल पद के साथ-साथ इंदौर का अतिरिक्त प्रभार है। वे प्रभारी अधिकारी एवं सहायक वन संरक्षक इंदौर इकाई, सामाजिक वानिकी वृत्त कार्यालय इंदौर और अतिरिक्त उप वन मंडल अधिकारी इंदौर के रूप में भी कार्य कर रहे हैं।
इसके अलावा उन्हें वन वृत्त इंदौर के संलग्न अधिकारी की जवाबदारी भी थमाई गई है। इंदौर जैसे बड़े और संवेदनशील वन क्षेत्र में तीन आईएफएस अधिकारियों के स्तर का काम अकेले सोलंकी के जिम्मे है।
इंदौर मुख्यालय पर बीते वर्षों में जहां दो नर्सरी और दो उप वन मंडल अधिकारी तैनात रहते थे, वहीं अब पूरी व्यवस्था केवल दो अधिकारियों के भरोसे सिमट गई है। इंदौर में अमित सोलंकी और महू में प्रियंका बामनिया ही उप वन मंडल अधिकारी का प्रभार संभाल रही हैं।
इस कदर हावी अतिरिक्त प्रभार के खेल के कारण इंदौर और आसपास के जिलों में कई महत्वपूर्ण पद रिक्त हैं। इंदौर में उप वन मंडल अधिकारी और संलग्न अधिकारी वन वृत्त का पद खाली है। रालामंडल अभयारण्य के अधीक्षक का पद खाली होने से इसका प्रभार प्रियंका बामनिया को दिया गया है।
वहीं सामाजिक वानिकी वृत्त इंदौर का प्रभार अमित सोलंकी के पास है। इसके अलावा रालामंडल स्थित उत्पादन डिपो के उप वन मंडल अधिकारी का पद रिक्त है और इंदौर एसटीएफ स्टेट टाइगर फोर्स का प्रभार भोपाल से संचालित हो रहा है।
इंदौर विकास प्राधिकरण में भी वन विभाग का पद लंबे समय से खाली है, जबकि नगर निगम में अब अधिकारियों की जगह रेंजर स्तर के कर्मचारियों को जवाबदारी सौंपकर खानापूर्ति की जा रही है।
इस प्रशासनिक अव्यवस्था का सीधा असर वन अपराधों के खिलाफ होने वाली कानूनी कार्रवाई पर पड़ रहा है। नियमानुसार जब्त वाहनों को राजसात करने का कानूनी अधिकार केवल सहायक वन संरक्षक स्तर के अधिकारी के पास होता है। रेंजर से प्रमोट होकर प्रभारी बने एसडीओ को ये वित्तीय और कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं हैं।
अधिकारियों की इसी कमी के चलते पड़ोसी धार जिले में सहायक वन संरक्षक की पदस्थापना नहीं हो सकी, जिसके कारण वहां वन विभाग द्वारा पकड़े गए वाहनों पर वैधानिक निराकरण और राजसात की कार्रवाई पूरी तरह ठप है।
धार जिले की इस विभागीय और कानूनी कार्रवाई को संपन्न करने के लिए वर्तमान में वन मंडल महू की उप वन मंडल अधिकारी प्रियंका बामनिया को अधिकृत किया गया है। अधिकारियों की भारी कमी और एक ही चेहरे पर चौतरफा मेहरबानी ने विभाग की पूरी कार्यप्रणाली को लचर बना दिया है।
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