अफसर विहीन एआईसीटीएसएल 90 करोड़ से अधिक के घाटे में: शासकीय आदेश के बावजूद अफसरों की मिलीभगत से वर्षों से सहायक ही बना बैठा है लेखा अधिकारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

आदित्य शुक्ला 98260-63956 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
लोक परिवहन को सुगम व बेहतर बनाने के लिए एआईसीटीएसएल का गठन किया गया था। शासन ने तय किया था संचालन अपर आयुक्त करेगा जबकि विकास कार्यों के लिए कार्यपालन व सहायक यंत्री तथा वित्तीय कामकाज के लिए लेखा अधिकारी होगा लेकिन अफसरों की मिलीभगत से एआईसीटीएसएल में वर्षो से जिम्मेदार अधिकारी की कुर्सी खाली है। इससे एआईसीटीएसएल 90 करोड़ से अधिक घाटे में डूब गया है।
अफसरों की मेहरबानी से छोटे कर्मचारी मौज कर रहे हैं। शासन ने 14 दिसंबर 2018 को आदेश जारी किया था वित्तीय कामकाज के लिए लेखा अधिकारी की तैनाती की जाए लेकिन स्थानीय स्तर पर नियमो की अनदेखी की गई। वर्षो से लेखाधिकारी की कुर्सी खाली है। अफसरों की मेहरबानी से सहायक ही कामकाज संभाल रहा है।
इसी तरह ईई और एई की पदस्थापना भी नहीं की गई जबकि एआईसीटीएसएल सिटी बसों के लिए करीब 400 स्टॉप बनवा रहा है। अफसर विहीन एआईसीटीएसएल लगातार घाटे में डूब रहा है। निगमायुक्त मौन साधे बैठे हैं।
वित्तीय अनियमितता
बताया जाता है एआईसीटीएसएल की करीब 400 से अधिक बसें दौड़ रही है। इनमें प्रतिदिन करीब 70 से 80 हजार यात्री आवाजाही करते है। एआईसीटीएसएल को बड़े पैमाने पर नियमित हिसाब तैयार करना पड़ता है लेकिन लेखाधिकारी की गैरमौजूदगी से पूरा कामकाज संदेह के दायरे में है। बस कितनी चली, आय कितनी हुई, खजाने में कितनी राशि जमा हुई इसकी निगरानी बखूबी नहीं हो पा रही है। इसके चलते वित्तीय गड़बड़ी और घाटा बढ़ता गया।
व्यवस्था पर सवाल
सिटी बसों का जिम्मा महापौर पुष्यमित्र भार्गव, कलेक्टर शिवम वर्मा और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के हवाले है। इसके बाद भी एआईसीटीएसएल में ईई, एई और लेखाधिकारी की कुर्सी खाली रहना कई सवाल खड़े करता है। चर्चा है कि अफसर जानबूझकर अफसरों की तैनाती नहीं चाहते। सहायकों को मनमानी की छूट दे रखी है।
पूर्णकालिक अफसरों की तैनाती
सिटी बसों के रख-रखाव के लिए डिपो भी बनाए गए है। लेकिन इस काम को भी निगम का इंजीनियर नहीं संभाल रहा। सड़कों पर दौड़ती बसों का संचालन हो या रखरखाव का जिम्मा, सब कुछ मातहत के भरोसे है। एआईसीटीएसएल के नियंत्रणकर्ता भी मूकदर्शक बने हुए है जबकि निगम के पास इंजीनियरों की फौज है।
सूत्रों के अनुसार निगमायुक्त खुद अफसरो की तैनाती से बच रहे है। और दिखावे के तौर पर ऐसे अफसरो को कार्यभार दिया जाता है जो निगम मुख्यालय में बैठकर महज फाइलो पर साइन करते हैं। एआईसीटीएसएल में पूर्णकालिक अफसरों की तैनाती होना चाहिए।
बदलेंगे पूरी व्यवस्था
एआईसीटीएसएल सीईओ अर्थ जैन ने बताया एआईसीटीएसएल की समूची व्यवस्था बदली जाएगी। इसके चलते पुराने आदेश अब मायने नहीं रखते है। नए आदेश के तहत बनाई जाने वाली व्यवस्था की तैयारी शुरू हो गई है। इनमें वित्तीय कामकाज के लिए पूरा विभाग ही अलग से बनाया जाएगा।
इसके अलावा कार्य से संबंधित विभागीय अधिकारियों की तैनाती भी की जाएगी ताकि प्रदेश स्तरीय बसों के संचालन में असुविधा नहीं हो। एआईसीटीएसएल नए स्वरूप में कामकाज करेगा। उसी के अनुरुप गठन किया जाएगा। आने वाले दिनो में बोर्ड बैठक की रुपरेखा तैयार की जा रही है, जिसमें सभी विषयों पर चर्चा होगी।
संबंधित समाचार

अवैध शराब तस्करी पर बड़ी कार्रवाई:पिकअप से 263 पेटी बीयर जब्त; चालक फरार

युवक की बेरहमी से हत्या:चाकुओं से गोदकर उतारा मौत के घाट; शरीर पर मिले 100 से ज्यादा घाव

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का ऐलान:9 से 29 अप्रैल तक मतदान; इस दिन आएंगे नतीजे

छात्रा से छेड़छाड़:रास्ते में रोका, हाथ पकड़कर दी धमकी; सगाई तुड़वाने की भी कोशिश
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!