आदतन अपराधी की रासुका खारिज: इतने गंभीर मामलों में है आरोपी; हाईकोर्ट ने किसके आदेश को बताया त्रुटिपूर्ण, रिहाई के निर्देश
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आदतन अपराधी और 19 गंभीर मामलों में आरोपी इमरान गौरी उर्फ चिकना उर्फ पंचर को बड़ी राहत मिली है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने उसके खिलाफ लगाई गई रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम) को खारिज करते हुए इंदौर कलेक्टर के आदेश को गलत ठहराया है और आरोपी की रिहाई के आदेश दिए हैं।
कलेक्टर के आदेश में पाई गई खामी
मामले में हाईकोर्ट ने पाया कि कलेक्टर द्वारा जारी रासुका आदेश में गंभीर प्रक्रिया संबंधी कमी थी। आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि आरोपी को कितनी अवधि तक हिरासत में रखा जाएगा। अदालत ने इसे कानूनन त्रुटिपूर्ण मानते हुए कहा कि ऐसे मामलों में हिरासत की समयसीमा का उल्लेख अनिवार्य है।
2025 में लगी थी रासुका, बाद में बढ़ाई गई अवधि
इमरान गौरी के खिलाफ इंदौर के विभिन्न थानों में 19 आपराधिक मामले दर्ज हैं। अगस्त 2025 में कलेक्टर के आदेश पर उस पर रासुका लगाई गई थी और उसे जेल भेज दिया गया था। इसके बाद जनवरी 2026 में उसी आदेश के आधार पर उसकी हिरासत अवधि आगे बढ़ा दी गई थी।
हाईकोर्ट में दी चुनौती
आरोपी की ओर से अधिवक्ता आशुतोष शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आदेश को चुनौती दी। उन्होंने दलील दी कि मूल आदेश में ही हिरासत की अवधि तय नहीं की गई, जो कि कानून के विपरीत है। वहीं शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता सोनल गुप्ता ने पक्ष रखा।
कोर्ट ने दोनों आदेश रद्द किए
मामले की सुनवाई विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने की। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 4 अगस्त 2025 और 22 जनवरी 2026 के दोनों रासुका आदेशों को निरस्त कर दिया।
स्पष्ट निर्देश-हिरासत अवधि बताना अनिवार्य
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रासुका जैसे कठोर कानून के तहत कार्रवाई करते समय आदेश में हिरासत की अवधि का स्पष्ट उल्लेख होना जरूरी है। इसके अभाव में आदेश टिक नहीं सकता।
रिहाई के आदेश
अदालत ने आदेश दिया कि आरोपी को तत्काल रिहा किया जाए, बशर्ते कि वह किसी अन्य मामले में वांछित न हो। यह फैसला रासुका जैसे सख्त कानूनों के उपयोग में प्रक्रियात्मक पारदर्शिता और वैधानिक पालन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
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