अब ऑनलाइन जांच सकेंगे सड़क, पानी और बिजली की सुविधाएं: प्रॉपर्टी खरीदारों को पारदर्शी जानकारी मिलेगी; कॉलोनाइजरों की जवाबदेही बढ़ेगी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश में कॉलोनी विकास और प्रॉपर्टी खरीदने की प्रक्रिया अब पहले से अधिक पारदर्शी और आसान होने जा रही है। राज्य सरकार ने कॉलोनी विकास नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिसके तहत अब कॉलोनाइजरों को अधिकतम 75 दिनों में मंजूरी मिल जाएगी। यदि अधिकारी निर्धारित समय सीमा में निर्णय नहीं लेते हैं, तो अनुमति स्वतः जारी मानी जाएगी। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा प्रॉपर्टी खरीदारों को मिलेगा। अब वे घर बैठे ऑनलाइन यह जांच सकेंगे कि जिस कॉलोनी में प्लॉट या मकान खरीद रहे हैं, वहां सड़क, बिजली, पानी, नाली और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं।
75 दिन में स्वतः मंजूरी का प्रावधान
नई व्यवस्था के तहत यदि कोई डेवलपर या कॉलोनाइजर कॉलोनी विकसित करने के लिए आवेदन करता है, तो संबंधित अधिकारियों को 60 दिनों के भीतर फैसला लेना होगा। यदि तय समय में निर्णय नहीं लिया जाता है, तो अधिकारियों को नोटिस जारी किया जाएगा। नोटिस मिलने के बाद भी 15 दिनों तक कार्रवाई नहीं होने पर कॉलोनी विकास की अनुमति स्वतः मिल जाएगी। यानी आवेदन के अधिकतम 75 दिनों के भीतर मंजूरी का रास्ता साफ हो जाएगा।
अब सिर्फ कलेक्टर और एसडीएम देंगे मंजूरी
सरकार ने शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कॉलोनी विकास के नियमों को एक समान कर दिया है। इसके बाद ग्राम पंचायतों की भूमिका लगभग समाप्त हो जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों की कॉलोनियों को मंजूरी देने का अधिकार जिला कलेक्टर के पास होगा। शहरी क्षेत्रों में यह जिम्मेदारी संबंधित एसडीएम निभाएंगे। इस बदलाव से मंजूरी प्रक्रिया में देरी और प्रशासनिक उलझनें कम होने की उम्मीद है।
कॉलोनाइजर की डिजिटल प्रोफाइल होगी तैयार
कॉलोनी में सुविधाओं को लेकर होने वाली धोखाधड़ी रोकने के लिए प्रत्येक कॉलोनाइजर की डिजिटल प्रोफाइल तैयार की जाएगी। प्रॉपर्टी खरीदने से पहले लोग ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर यह जानकारी प्राप्त कर सकेंगे कि कॉलोनी में सड़कें बनी हैं या नहीं, नालियों और जल निकासी की क्या व्यवस्था है, स्ट्रीट लाइट उपलब्ध हैं या नहीं, पीने के पानी की सुविधा मौजूद है या नहीं। इससे खरीदारों को सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
सुविधाएं नहीं दीं तो प्रशासन बेचेगा बंधक संपत्ति
यदि कोई कॉलोनाइजर वादे के अनुसार सड़क, पानी, बिजली और अन्य सुविधाएं विकसित नहीं करता है, तो प्रशासन उसकी बंधक रखी गई संपत्तियों को बेच सकेगा। इन संपत्तियों से प्राप्त राशि का उपयोग अधूरे विकास कार्यों को पूरा करने में किया जाएगा, ताकि कॉलोनी के रहवासियों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।
गरीब और कमजोर वर्ग के लिए 15% जमीन आरक्षित
नई कॉलोनियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के लिए कम से कम 15 प्रतिशत क्षेत्र आरक्षित रखना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इससे कमजोर वर्गों को भी बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
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