शहीद जवान, अक्षुण्ण आस्था अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में सेंध: आतंकी साया ड्यूटी पर तैनात J&K पुलिसकर्मी की गोली मारकर हत्या, विदेशी TRF आतंकी पर शक...
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली/अनंतनाग।
जम्मू-कश्मीर में जारी अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। अनंतनाग के व्यस्त लाल चौक इलाके में बुधवार दोपहर आतंकियों ने अमरनाथ यात्रा ड्यूटी पर तैनात जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक जवान की बेहद नजदीक से गोली मारकर हत्या कर दी। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा एजेंसियां इस हमले के पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) की भूमिका की आशंका जता रही हैं।
वहीं, जांच एजेंसियों को हमलावर के विदेशी आतंकी होने के संकेत भी मिले हैं। जानकारी के अनुसार, घटना बुधवार दोपहर करीब 12:30 बजे अनंतनाग के लाल चौक स्थित क्लॉक टावर के पास हुई। उस समय इंडियन रिजर्व पुलिस (IRP) की तीसरी बटालियन में तैनात हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी अपनी ड्यूटी पर मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक संदिग्ध व्यक्ति अचानक उनके करीब पहुंचा और बेहद नजदीक से उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। गोली लगने के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल इलाके को घेर लिया।
घायल अवस्था में आशिक हुसैन कुरैशी को तत्काल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC), अनंतनाग ले जाया गया, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव के कारण डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, उनके शरीर में पांच से अधिक गोलियां लगी थीं, जिससे उनकी हालत अत्यंत गंभीर हो गई थी।
मृतक हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी बडगाम जिले के निवासी थे और लंबे समय से जम्मू-कश्मीर पुलिस में अपनी सेवाएं दे रहे थे। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल जांच शुरू कर दी। पुलिस को घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में एक संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिया है। फुटेज में वह काली टोपी पहने नजर आ रहा है और उसके हाथ में केसरिया, सफेद और हरे रंग के कपड़े में लिपटा एक बंडल दिखाई देता है। अधिकारियों का मानना है कि इसी बंडल में एके-47 राइफल छिपाकर लाई गई थी, जिसका इस्तेमाल वारदात को अंजाम देने में किया गया।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हेड कॉन्स्टेबल लाल चौक में कोतवाल गली के प्रवेश द्वार के पास तैनात थे। इसी दौरान हमलावर ने उनकी गतिविधियों पर नजर रखते हुए नजदीक पहुंचकर अचानक फायरिंग शुरू कर दी। हमला इतनी तेजी से किया गया कि जवान को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच में इस घटना को स्थानीय आतंकी की करतूत माना जा रहा था, लेकिन अब मिले तकनीकी और खुफिया इनपुट के आधार पर विदेशी आतंकी के शामिल होने की आशंका प्रबल हो गई है। एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि हमलावर हाल ही में सीमा पार से घुसपैठ कर घाटी में सक्रिय हुए किसी आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा तो नहीं था।
घटना के तुरंत बाद अनंतनाग और आसपास के क्षेत्रों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई और पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया गया। पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त रूप से संदिग्ध की तलाश में जुटी हैं। शहर के सभी प्रमुख निकास मार्गों पर वाहनों की जांच की जा रही है और सीसीटीवी फुटेज की गहन पड़ताल की जा रही है।
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमरनाथ यात्रा जारी है। हालांकि, क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण यात्रा को अस्थायी रूप से रोका गया है, लेकिन यात्रा मार्ग और उससे जुड़े संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बलों की व्यापक तैनाती बनी हुई है। ऐसे में इस घटना को सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने और भय का माहौल बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।हमले के कुछ ही समय बाद लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से जुड़े रेजिस्टेंस फाइटर्स नामक समूह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जारी कर हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया।
कथित पोस्ट में कहा गया कि अमरनाथ यात्रा की कड़ी सुरक्षा के बावजूद संगठन के लड़ाकों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान को निशाना बनाया और उन्हें कई गोलियां मारीं। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक इस ऑनलाइन दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। स्वतंत्र रूप से भी इस दावे की सत्यता की पुष्टि नहीं हो सकी है। जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।
अमरनाथ यात्रा चौथे दिन भी ठप: खराब मौसम ने रोकी आस्था की राह, हजारों श्रद्धालु विभिन्न शिविरों में सुरक्षित
जम्मू-कश्मीर में हो रही भारी बारिश व प्रतिकूल मौसम के चलते अमरनाथ यात्रा बुधवार को चौथे दिन भी स्थगित रही। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बालटाल और नुनवान (पहलगाम) के ट्रांजिट एवं बेस कैंपों में ठहरे सभी श्रद्धालु पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनके भोजन, आवास तथा स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) द्वारा 19 से 24 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर में खराब मौसम की चेतावनी जारी किए जाने के बाद केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने एहतियातन 18 जुलाई की शाम से सभी प्रमुख धार्मिक यात्राओं पर रोक लगा दी थी। इनमें अमरनाथ यात्रा के अलावा माता वैष्णो देवी, शिव खोड़ी और मचैल माता यात्राएं भी शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार, अमरनाथ यात्रा के दोनों प्रमुख मार्ग—मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले का बालटाल मार्ग और दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले का नुनवान-पहलगाम मार्ग—भारी बारिश, भूस्खलन, अचानक आई बाढ़ और बादल फटने जैसी घटनाओं के कारण प्रभावित हैं। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने किसी भी श्रद्धालु को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी है।
यात्रा से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को पंचतरणी से लेकर पवित्र गुफा तक के मार्ग पर बारिश दर्ज की गई, जिसके कारण दर्शन के लिए किसी भी जत्थे को रवाना नहीं किया गया। 19 और 20 जुलाई को पंचतरणी में रुके कुछ श्रद्धालुओं को सीमित संख्या में बाबा बर्फानी के दर्शन की अनुमति दी गई थी।
जम्मू स्थित भगवती नगर यात्री निवास और निकटवर्ती आसाराम बापू आश्रम में इस समय लगभग 6,000 श्रद्धालु ठहरे हुए हैं। वहीं, लगातार यात्रा बाधित रहने से 2,000 से अधिक तीर्थयात्री अपने-अपने गृह राज्यों के लिए वापस लौट चुके हैं।
इसके अतिरिक्त, जम्मू के गीता भवन में करीब 250 और पुरानी मंडी स्थित राम मंदिर में लगभग 200 साधु-संत ठहरे हुए हैं। अनंतनाग जिले के नुनवान-पहलगाम बेस कैंप में लगभग 2,800 श्रद्धालु यात्रा शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। दूसरी ओर, बालटाल में रुके अधिकांश श्रद्धालुओं को मंगलवार को दर्शन के लिए भेज दिया गया था, लेकिन मौसम में सुधार न होने के कारण बुधवार को किसी नए जत्थे को अनुमति नहीं दी गई।
इसके अलावा, श्रीनगर के पंथा चौक स्थित यात्री निवास में 438, गांदरबल के बालटाल में 134 तथा रामबन जिले के चंदरकोट यात्री निवास में 458 श्रद्धालु मौजूद हैं। प्रशासन ने सभी शिविरों में चिकित्सा सुविधाओं, भोजन और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए हैं। कई समाजसेवी संगठनों ने भी श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क लंगर की व्यवस्था शुरू कर दी है।
खराब मौसम का असर केवल अमरनाथ यात्रा तक सीमित नहीं है। माता वैष्णो देवी, शिव खोड़ी और मचैल माता यात्राएं भी लगातार चौथे दिन बंद हैं। हालांकि, मंगलवार को किश्तवाड़ में माता मचैल के जन्मोत्सव के अवसर पर सरथल माता मंदिर तक सांकेतिक छड़ी यात्रा निकाली गई, जिसमें सीमित संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। प्रशासन ने तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं।
गौरतलब है कि 3 जुलाई से शुरू हुई इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा में अब तक 3.91 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। समुद्र तल से 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा तक चलने वाली 57 दिवसीय यह यात्रा 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के अवसर पर संपन्न होगी।
फिलहाल, सभी की निगाहें मौसम में सुधार और प्रशासन की अगली घोषणा पर टिकी हैं, ताकि एक बार फिर “हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ श्रद्धालु बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए आगे बढ़ सकें।
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