आबकारी व्यवस्था में अब यह बड़ा परिवर्तन: दुकान परिसर या आसपास शराब पीना पूरी तरह प्रतिबंधित; नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश की आबकारी व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानों को पूरी तरह ‘ऑफ श्रेणी’ (ऑफ कैटेगरी) घोषित कर दिया है।
दुकानों पर केवल शराब की बिक्री
नई व्यवस्था के तहत अब शराब दुकानों पर केवल शराब की बिक्री की जा सकेगी, जबकि दुकान परिसर या उसके आसपास बैठकर शराब पीना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अवैध अहाते, ओवर रेटिंग, समय सीमा से अधिक शराब बिक्री और नियमों के उल्लंघन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नई आबकारी नीति को सख्ती से लागू करने के निर्देश
उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों, आबकारी अधिकारियों और संबंधित विभागों को वर्ष 2026-27 की नई आबकारी नीति को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शराब दुकानों को केवल बिक्री केंद्र के रूप में संचालित किया जाए और किसी भी प्रकार की अवैध बैठकी या शराब परोसने की गतिविधि तत्काल बंद कराई जाए।
क्या बदलेगा नई व्यवस्था में
नई नीति लागू होने के बाद प्रदेश की शराब दुकानों पर ग्राहकों को केवल शराब खरीदने की अनुमति होगी। दुकानों पर बैठकर शराब पीने, टेबल-कुर्सी लगाने, बार जैसी व्यवस्था बनाने या दुकान के आसपास अस्थायी अहाते संचालित करने पर रोक रहेगी।
समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण की कवायद
शराब खरीदने वाले उपभोक्ताओं को उसे अपने घर या अन्य वैध निजी स्थान पर ले जाकर ही सेवन करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन से जुड़ी अव्यवस्थाओं, विवादों और कानून-व्यवस्था की समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
अवैध अहातों के खिलाफ चलेगा अभियान
प्रदेश के कई जिलों में लंबे समय से शराब दुकानों के आसपास अवैध रूप से बैठकर शराब पिलाने की शिकायतें मिल रही थीं। कई स्थानों पर दुकानों के निकट अस्थायी शेड, कुर्सियां और खानपान की व्यवस्था कर शराब परोसी जा रही थी।
अवैध अहातों को तत्काल हटाने के निर्देश
नई नीति के तहत अब ऐसे सभी अवैध अहातों को तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए हैं। आबकारी विभाग और पुलिस संयुक्त रूप से औचक निरीक्षण करेंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले लाइसेंसधारियों पर जुर्माने से लेकर लाइसेंस निलंबन तक की कार्रवाई की जा सकती है।
देर रात शराब बिक्री पर भी शिकंजा
सरकार ने निर्धारित समय से पहले दुकान खोलने और देर रात तक शराब बेचने की शिकायतों को भी गंभीरता से लिया है। इसके लिए विशेष निगरानी तंत्र तैयार किया जा रहा है। पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमें नियमित गश्त कर समय सीमा के पालन की जांच करेंगी।
यदि कोई दुकान निर्धारित समय के बाद शराब बेचती हुई पाई जाती है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई होगी। बार-बार नियम तोड़ने पर लाइसेंस निरस्त करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
ओवर रेटिंग रोकने के लिए नई व्यवस्था
शराब की निर्धारित कीमत से अधिक राशि वसूलने की शिकायतों को रोकने के लिए भी सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। अब प्रत्येक शराब दुकान पर विक्रय दरों की सूची प्रमुखता से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। साथ ही दुकानों पर क्यूआर कोड भी लगाए जाएंगे, जिससे ग्राहक वास्तविक कीमत की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। आबकारी विभाग के अनुसार ओवर रेटिंग करते पाए जाने वाले ठेकेदारों के खिलाफ भारी आर्थिक दंड और लाइसेंस संबंधी कार्रवाई की जाएगी।
महिलाओं और नागरिकों की शिकायतों को मिली प्राथमिकता
सरकार का कहना है कि यह निर्णय केवल राजस्व व्यवस्था से जुड़ा नहीं है, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। विभिन्न शहरों और कस्बों में महिलाओं एवं स्थानीय नागरिकों द्वारा शराब दुकानों के आसपास होने वाली भीड़, विवाद और सार्वजनिक शराब सेवन को लेकर लगातार शिकायतें दर्ज कराई जा रही थीं। नई व्यवस्था से बाजारों, कॉलोनियों, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास की स्थिति में सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है।
पवित्र नगरों में रहेगी विशेष निगरानी
उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के पवित्र और धार्मिक नगरों में शराब की अवैध बिक्री या परिवहन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इन क्षेत्रों में पहले से लागू प्रतिबंधों के पालन के लिए निगरानी और अधिक कड़ी की जाएगी।
अधिकारियों की भी तय होगी जवाबदेही
सरकार ने संकेत दिए हैं कि यदि किसी क्षेत्र में लगातार नियमों का उल्लंघन होता पाया गया तो केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। इससे आबकारी व्यवस्था की निगरानी और प्रभावी होने की उम्मीद है।
कानून व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानों को ‘ऑफ श्रेणी’ में परिवर्तित करना प्रदेश की आबकारी व्यवस्था में महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव है। इससे सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन कम होगा, अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा और कानून व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि जिला प्रशासन और आबकारी विभाग नई नीति को जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाते हैं।
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