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अब घर बैठे महाकाल को भोग अर्पित करें: अन्न क्षेत्र में ऑनलाइन दान शुरू; मनचाही तारीख पर बुकिंग की सुविधा

KHULASA FIRST

संवाददाता

29 अप्रैल 2026, 4:00 pm
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अब घर बैठे महाकाल को भोग अर्पित करें

खुलासा फर्स्ट, उज्जैन।
महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए एक नई और खास सुविधा शुरू होने जा रही है। अब भक्त अन्न क्षेत्र में ऑनलाइन दान कर सकेंगे और भोग आरती के दौरान अपने हाथों से भगवान महाकाल को प्रसाद अर्पित करने का अवसर भी पाएंगे।

इस व्यवस्था से भक्तों को आस्था के साथ जुड़ने का नया डिजिटल माध्यम मिलेगा। महाकाल मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अन्न क्षेत्र में दान की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। यह नई व्यवस्था अगले सोमवार से लागू होने की संभावना है।

मंदिर समिति की सहायक प्रशासक सिम्मी यादव के अनुसार, अन्न क्षेत्र पूरी तरह दान पर आधारित है, जहां प्रतिदिन दो शिफ्ट में लगभग 9 हजार श्रद्धालु भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं। अधिक से अधिक भक्तों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अब यह प्रक्रिया डिजिटल की जा रही है।

अब श्रद्धालु मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से घर बैठे दान कर सकेंगे। इसके लिए राशि इस प्रकार निर्धारित की गई है- दोनों समय की भोजन प्रसादी: 1,10,000 रुपए, एक समय की प्रसादी: 51,000 रुपए, मीठे प्रसाद के लिए: 21,000 रुपए।

नई व्यवस्था के तहत भक्त साल के 365 दिन में किसी भी तारीख के लिए अग्रिम बुकिंग कर सकेंगे। ये है जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और अन्य शुभ अवसर। इन खास मौकों पर श्रद्धालु अन्न क्षेत्र में प्रसादी का आयोजन करा सकेंगे, जो अब तक केवल ऑफलाइन संभव था।

दानदाताओं के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। दान करने वाले भक्तों को भोग आरती के समय मंदिर ले जाया जाएगा, जहां वे स्वयं भगवान महाकाल को भोग अर्पित कर सकेंगे। यह अनुभव श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक रूप से बेहद खास माना जा रहा है।

भगवान महाकालेश्वर को प्रतिदिन सुबह 10 बजे भोग अर्पित किया जाता है। भोग थाली में सामान्यतः गेहूं की रोटी, दाल-चावल और दो प्रकार की सब्जियां शामिल होती हैं। कई बार श्रद्धालु अपनी ओर से मिठाई भी अर्पित करते हैं, जिसे भोग में शामिल किया जाता है।

भोग और आरती के बाद यही प्रसाद अन्न क्षेत्र में श्रद्धालुओं को वितरित किया जाता है। मंदिर समिति का मानना है कि ऑनलाइन दान की इस पहल से अधिक लोग अन्न सेवा से जुड़ेंगे और उन्हें आस्था के साथ एक नया अनुभव भी मिलेगा। यह पहल परंपरा और तकनीक के संगम का उदाहरण बनकर उभर रही है, जिससे श्रद्धालु अब कहीं से भी महाकाल सेवा में सहभागी बन सकेंगे।

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