खबर
Top News

अब इतनी उम्र की लड़कियां भी इस बीमारी की शिकार: राष्ट्रीय सम्मेलन में चौंकाने वाला खुलासा; बचाव के लिए किन बातों का रखें ध्यान

KHULASA FIRST

संवाददाता

28 फ़रवरी 2026, 1:31 pm
216 views
शेयर करें:
अब इतनी उम्र की लड़कियां भी इस बीमारी की शिकार

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
इंडियन मेनोपॉज सोसायटी के राष्ट्रीय सम्मेलन IMSCON-26 में सामने आए आंकड़ों ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। डॉक्टरों ने खुलासा किया है कि ब्रेस्ट कैंसर अब केवल 40-50 वर्ष की महिलाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि 24 वर्ष की युवतियों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं।

3 प्रतिशत से भी कम महिलाएं जांच करवा रही
चिंता की बात यह भी है कि जहां 90 प्रतिशत महिलाओं की नियमित स्क्रीनिंग जरूरी मानी जाती है, वहीं देश में 3 प्रतिशत से भी कम महिलाएं जांच करवा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और वैक्सीनेशन नहीं बढ़ाया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

कम उम्र में बढ़ रहे केस, बीमारी ज्यादा आक्रामक
अहमदाबाद से आईं सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अंजना चौहान ने बताया कि बिगड़ती लाइफस्टाइल जंक फूड, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, देर रात तक जागना, तनाव और हार्मोनल असंतुलन कम उम्र में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों की बड़ी वजह बन रहे हैं।

पहले यह बीमारी 45 वर्ष के बाद अधिक देखी जाती थी, लेकिन अब 20 से 30 वर्ष की आयु वर्ग में भी केस सामने आ रहे हैं। कम उम्र में कैंसर अधिक आक्रामक होता है, इसलिए शुरुआती पहचान बेहद जरूरी है।

90% स्क्रीनिंग जरूरी, हकीकत सिर्फ 3%
विशेषज्ञों ने कहा कि ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर से मृत्यु दर कम करने के लिए कम से कम 90 प्रतिशत महिलाओं की नियमित स्क्रीनिंग अनिवार्य है। हालांकि, जागरूकता की कमी, शर्म, डर और लापरवाही के कारण महिलाएं जांच टाल देती हैं। डॉक्टरों ने जोर देकर कहा कि शुरुआती स्टेज में पकड़ा गया कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है, लेकिन देर होने पर इलाज जटिल और महंगा हो जाता है।

HPV वैक्सीनेशन से बदलेगी तस्वीर
सर्वाइकल कैंसर पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि यह एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) संक्रमण से होता है, जो वर्षों तक बिना लक्षण के शरीर में रह सकता है।28 फरवरी से शुरू हो रहे एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान को बड़ी पहल बताया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि 14 वर्ष की उम्र में लड़कियों को वैक्सीन लग जाए तो भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में भारी कमी लाई जा सकती है।

पहली बार ओपीडी से लाइव टेली-रोबोटिक सर्जरी

सम्मेलन के दौरान HER अस्पताल में आयोजित सर्जिकल वर्कशॉप में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया भावे चित्तावर ने ओपीडी से बैठकर टेली-रोबोटिक सर्जरी की। डॉ. प्रिया वीआर गॉगल्स पहनकर रोबोटिक सिस्टम से जुड़ीं, जबकि मरीज ऑपरेशन थिएटर में था। करीब एक घंटे चली प्रक्रिया में यूटरस (बच्चेदानी) सफलतापूर्वक निकाली गई। विशेषज्ञों ने इस लाइव टेलीकास्ट के माध्यम से आधुनिक तकनीक की बारीकियां समझीं। सम्मेलन में इस तरह की लाइव टेली सर्जरी का यह पहला उदाहरण बताया गया।

मेनोपॉज के बाद दोगुना खतरा
सम्मेलन में मेनोपॉज के बाद महिलाओं की सेहत पर भी चर्चा हुई। आगरा की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आरती गुप्ता ने बताया कि मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजेन हार्मोन कम होने से हड्डियां तेजी से कमजोर होती हैं। महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा पुरुषों की तुलना में लगभग दोगुना होता है, जिससे 60-70 वर्ष की उम्र में फ्रैक्चर की आशंका बढ़ जाती है। उन्होंने सलाह दी कि मेनोपॉज के बाद हर छह महीने में स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए।

बचपन से रखें हड्डियों का ध्यान
विशेषज्ञों ने बताया कि मजबूत हड्डियों की नींव बचपन में पड़ती है, जिसे ‘पीक बोन मास’ कहा जाता है। बच्चों को रोज कम से कम एक घंटा खेलना और आधा घंटा धूप में रहना जरूरी है। विटामिन डी और बी12 की कमी भी महिलाओं में तेजी से बढ़ रही है, जिससे कमजोरी और हड्डियों में दर्द जैसी समस्याएं आम हो रही हैं।

आम जनता के लिए पब्लिक फोरम
1 मार्च को आयोजित पब्लिक फोरम में आम लोग विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछ सकेंगे। साथ ही मैमोग्राफी और सर्वाइकल कैंसर जांच के लिए रियायती कूपन भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं जांच करा सकें।

टैग:

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!