नोटिस ठेंगे पर: बहुमंजिला का निर्माण कार्य जारी; सराफा बाजार में नियमों की धज्जियां
KHULASA FIRST
संवाददाता

मामला दान की जमीन पर अवैध बहुमंजिला इमारत का,
राजनीतिक संरक्षण में फंसे निगम अधिकारी, लोकायुक्त जांच की उठी मांग
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अति भीड़भाड़ वाले सराफा बाजार में मप्र भूमि विकास नियम-2012 के खुले उल्लंघन का गंभीर मामले का खुलासा हुआ है। जगदीश मंदिर के नाम दान भूमि पर नियमों को ताक पर रख बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत का निर्माण किया जा रहा है।
हैरानी यह है नगर निगम द्वारा बार-बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद न अवैध निर्माण रोका गया न नियम विरुद्ध संचालित व्यावसायिक गतिविधियों पर ठोस कार्रवाई की गई। निगम अधिकारियों की चुप्पी को राजनीतिक दबाव और मिलीभगत से जोड़कर देखा जा रहा है।
नियम 27 की शर्तें हवा में, जिम्मेदार मौन
मप्र भूमि विकास नियम 2012 के क्लाज 27 के अंतर्गत भवन निर्माण अनुमति कई स्पष्ट शर्तों के साथ दी जाती है। इसमें लाइसेंसी सुपरवाइज़र, इंजीनियर और आर्किटेक्ट की अनिवार्य निगरानी शामिल है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में अनुमति निरस्त किए जाने का प्रावधान है, लेकिन सराफा बाजार के इस मामले में न तो अनुमति निरस्त की गई न निर्माण पर रोक लगी।
बीओ–बीआई की निष्क्रियता, नोटिस की अवधि भी समाप्त
भवन निरीक्षक ( बीआई) और भवन अधिकारी ( बीओ) की जिम्मेदारी है अवैध निर्माण को तत्काल रोका जाए। सूत्रों के मुताबिक नोटिस की अवधि समाप्त होने के बावजूद न निर्माण बंद कराया न अवैध बेसमेंट, बैक-लाइन कब्जे और नक्शे के विपरीत बन रही चौथी मंजिल पर कार्रवाई हुई।
प्लिंथ लेवल जांच नहीं, सर्टिफिकेट भी नहीं
कार्रवाई का सबसे अहम चरण प्लिंथ लेवल (कुर्सी हाइट) निरीक्षण है, लेकिन इस प्रकरण में न विधिवत निरीक्षण किया गया न प्लिंथ लेवल सर्टिफिकेट जारी हुआ। यह सीधे तौर पर नियम 31 (2) (ड) का उल्लंघन है।
कंसल्टेंट इंजीनियर की सीधी जिम्मेदारी
नगर निगम के प्रावधान के अनुसार कंसल्टेंट इंजीनियर लाइसेंस लगाकर प्रमाणित करता है निर्माण स्वीकृत नक्शे और नियमों के अनुरूप हो। इस भवन के कंसल्टेंट इंजीनियर आदर्श वर्मा बताए जा रहे हैं, लेकिन उनके लाइसेंस के बावजूद अवैध निर्माण हो रहा है।
दो प्लॉट, एक ही निकासी—बड़ा हादसा तय?
दो अलग भूखंडों का संयुक्तिकरण कर व्यावसायिक भवन बनाया गया है, लेकिन निकासी ( एक्जिट) केवल एक रखी गई है। विशेषज्ञों का कहना है आगजनी या आपातस्थिति में यह जान-माल के गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है।
डेढ़ लाख रुपए प्रति वर्गफीट में दुकानों की बिक्री
अधूरे प्रमाण-पत्रों और नियमों के उल्लंघन के बावजूद इस अवैध भवन में करीब डेढ़ लाख रुपए प्रति स्क्वायर फीट की दर से दुकानों की खुलेआम बिक्री हो रही है, जो अवैध निर्माण को मिले संरक्षण की ओर इशारा करती है।
दान की जमीन, 40 करोड़ का सौदा
दस्तावेजों के अनुसार जगदीश मंदिर के नाम दान की गई उक्त भूमि पर वर्षों तक व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की गईं और बाद में लगभग 40 करोड़ रुपए में सौदा कर दिया गया। यह भूखंड क्रमांक 44 व 45, बड़ा सराफा, राजमोहल्ला जोन-2, वार्ड-69 के रूप में स्थित है।
नगर निगम की निष्क्रियता पर सवाल
आरोप है कि भवन अधिकारी ( बीओ) और भवन निरीक्षक (बीआई) ने जानबूझकर अवैध निर्माण पर आंखें मूंदे रखीं। नोटिस की समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद न निर्माण रोका न नियम विरुद्ध व्यावसायिक उपयोग पर प्रतिबंध लगाया। सवाल है क्या नगर निगम के नियम केवल आम नागरिकों के लिए हैं?
राजस्व अमले की भूमिका भी संदिग्ध
कलेक्टर से मांग की जा रही है जांच कराई जाए कि एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी ने मंदिर के नाम दान जमीन का नामांतरण किस आधार पर किया। नियमों के विरुद्ध हुआ है, तो यह गंभीर प्रशासनिक और आपराधिक लापरवाही मानी जाएगी।
सूत्रों का दावा है नगर निगम में करोड़ों के कथित भ्रष्टाचार में लिप्त मास्टरकर्मी असलम खान से जुड़े कार्यालयीन कार्य कंसल्टेंट इंजीनियर आदर्श वर्मा द्वारा संभाले जाते हैं। आरोप है उनके लाइसेंस का दुरुपयोग कर नक्शा स्वीकृत कराया गया, जबकि निर्माण नियमों के विपरीत किया गया।
ऐसे में संबंधित कंसल्टेंट इंजीनियर का लाइसेंस निरस्त करने और पूरे मामले की लोकायुक्त जांच की मांग तेज हो गई है। नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल और राजमोहल्ला जोन क्रमांक 2 के भवन अधिकारी प्रशांत तिवारी से सवाल करने के लिए फोन लगाया गया था लेकिन दोनों ही जिम्मेदारों ने कॉल रिसीव नहीं किया, फिर भी दोनों को व्हाट्सअप और एसएमएस के माध्यम से सवाल पहुंचा दिए गए थे लेकिन उसका भी जवाब नहीं दिया गया। यह सिद्ध करता है भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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