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वाट्सएप मैसेज से नहीं: अब आमंत्रितों को कॉल कर व्यक्तिगत रूप से दें सूचना; पार्टी में कसावट के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दिए निर्देश

KHULASA FIRST

संवाददाता

11 मई 2026, 5:58 pm
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वाट्सएप मैसेज से नहीं

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल पार्टी में कसावट बनाए रखने के लिए नित-नए जतन कर रहे हैं। कुछ दिन पूर्व उन्होंने पूरे महीने का शेड्यूल जारी कर दिया था कि किन तारीखों में बैठकें होंगी और किन तारीखों में मंत्रियों के दौरे।

अब पदाधिकारियों को निर्देश दिए कि बैठकों आदि की सूचना वाट्सएप ग्रुप पर न डालकर आमंत्रितों को व्यक्तिगत रूप से फोन पर दी जाए। ये भी तय कर दिया कि कौन-से स्तर का पदाधिकारी किस आमंत्रित को फोन लगाएगा।

खंडेलवाल का कहना है इससे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अपनेपन का अहसास होगा और उनके प्रति कार्यकर्ताओं में सम्मान का भाव जागेगा। इससे पूर्व उन्होंने संगठनात्मक कसावट और कार्यकर्ताओं में परिवारभाव बनाए रखने के लिए हर माह विभिन्न स्तर की बैठकों का आदेश दिया था।

इसमें 1 से 6 तारीख के बीच जिला, 7 से 11 मंडल और 11 से 15 मोर्चा-प्रकोष्ठ व 21 से 25 के बीच बूथों की बैठकें करना तय किया गया था।

इंदौर नगर में मंडल स्तर की बैठकों का दौर खत्म हो चुका है। बड़ी बात ये कि सभी मंडलों में नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा व उनके कुछ प्रमुख पदाधिकारी स्वयं जा रहे हैं।

बैठकों में नगर से राष्ट्रीय पदाधिकारी, मोर्चा प्रकोष्ठ के नेता, मंडल अध्यक्ष से पदाधिकारी, मंडल व शक्ति केंद्र प्रभारी और वार्ड संयोजक व पालकों को बुलाया गया।

बैठक में मंडल अध्यक्ष व उनकी टीम को निर्देश दिए गए कि अब बैठक या अन्य किसी आयोजन की सूचना सोशल मीडिया, यानी वाट्सएप पर नहीं दी जाएगी।

मंडल अध्यक्ष नगर से ऊपर के पदाधिकारियों को फोन लगाएंगे तो अन्य पदाधिकारियों को भी ये काम दिया जाए।

पूर्व विधायक गोपीकृष्ण नेमा का कहना है कि हमारी कार्यपद्धति के तीन मूलमंत्र रहे हैं- प्रवास, संपर्क और संवाद। मंडल, शक्ति केंद्रों और बूथों पर कार्यकर्ता इन मूल मंत्रों को लेकर जाएं, जिससे संगठन और अधिक मजबूत हो।

कार्यकर्ता के घर जाने का अभियान
भाजपा संगठन ने कार्यकर्ताओं के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने और सक्रिय रहने का एक फॉर्मूला और दिया है।

अब वार्ड स्तर पर टोली बनाई जाए, जो मंडल अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारी को लेकर कार्यकर्ताओं के घर मिलने भी जाए।

हम सिर्फ काम के समय ही जाते हैं, जो ठीक नहीं है। हमें मालूम नहीं होता कि कार्यकर्ता किस परिस्थिति में रहकर काम कर रहा है।

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