जिलाबदर किया नहीं, केवल थाने में हाजिरी: हो गई चंदर की हत्या
KHULASA FIRST
संवाददाता

हिस्ट्रीशीटर सूरज जाट और भूरू यादव अब तक फरार
बड़ा सवाल...क्या होगी जाट बंधुओं के अवैध शराब और ड्रग्स के साम्राज्य पर बड़ी कार्रवाई
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
31 अपराधों से लदे जिस हिस्ट्रीशीटर बदमाश सूरज जाट के खिलाफ पुलिस खुद जिलाबदर का प्रस्ताव तैयार कर चुकी थी, उसे जिले से बाहर करने के बजाय थाने में हाजिरी का रास्ता क्यों दिया गया?
यह सवाल अब इसलिए बड़ा हो गया है, क्योंकि हाजिरी की अवधि खत्म होने के बाद हिस्ट्रीशीटर सूरज जाट ने चंदर लोहार की बेरहमी से पिटाई कर हत्या कर दी। पुलिस अब बदमाश सूरज जाट और पशुपालक भूरू यादव के संभावित ठिकानों पर इंदौर से लेकर भोपाल और उज्जैन तक दबिश दे रही है। दूसरी ओर, सूरज जाट के अवैध शराब का नेटवर्क सामने आने के बाद पुलिस-आबकारी की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
परसों रात निरंजनपुर बस्ती के चंदर लोहार पर गाय चोरी का आरोप लगाकर न केवल उसे अगवा कर बेरहमी से पीटा गया, बल्कि उसके खिलाफ थाने ले जाकर चोरी का केस भी दर्ज करवा दिया गया।
उसे चाकू की मूठ, डंडे, लात-मुक्कों और कोहनी से तब तक पीटा गया, जब तक वह अधमरा नहीं हो गया। ऐसा करने वाला कोई और नहीं हिस्ट्रीशीटर सूरज जाट था। चंदर की मौत के बाद शहर में अपराधी और पुलिस कार्रवाई के बीच संबंधों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। पुलिस के रिकॉर्ड में 31 से ज्यादा केस वाला हिस्ट्रीशीटर सूरज जाट अभी भी फरार है।
पुलिस उसकी तलाश में लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। सूरज से जुड़े कुणाल यादव और अभिषेक राज ताहिर को पुलिस पकड़ चुकी है। पुलिस यह भी जांच रही है कि मारपीट के दौरान दोनों मौके पर मौजूद थे या नहीं। सूत्रों के मुताबिक घटना के वक्त बिट्टू यादव नामक युवक की मौजूदगी की भी जानकारी मिली है।
दो थाना क्षेत्र में 60 से ज्यादा अवैध शराब और ड्रग्स के ठीये... हिस्ट्रीशीटर सूरज जाट और दो दर्जन अपराधों से लदे उसके भाई लखन जाट द्वारा हीरा नगर और लसूड़िया थाना क्षेत्र में 60 से ज्यादा अवैध शराब के ठीये संचालित किए जा रहे हैं। दोनों अपने गुर्गों के जरिए शराब खपाते हैं।
सूत्रों के मुताबिक इन ठीयों से ही अवैध देशी शराब के साथ गांजा और ड्रग्स की बिक्री तक की जा रही है। इस कारोबार में दोनों प्रांजल राणा, अभिषेक राज ताहिर और नाबालिगों सहित अन्य लोगों का इस्तेमाल करते हैं। दो नंबर के भाजपा नेताओं से जुड़े शराब दुकान चलाने वाले नामी शराब ठेकेदार इसे रोजाना 200 पेटी तक अवैध शराब देते हैं।
पूरे खेल में बड़ा आरोप स्थानीय थाना पुलिस और उसके खुफिया तंत्र की भूमिका को लेकर है। सूत्रों का कहना कि पूर्व में लसूड़िया और हीरा नगर थाने में पदस्थ रहे और वर्तमान में पदस्थ खुफिया के जवानों की सूरज जाट और उसके हिस्ट्रीशीटर भाई लखन जाट से गहरी यारी है। उनसे वॉट्सऐप कॉल के जरिए जुड़े रहते हैं। बदले में दोनों भाई इन पुलिस वालों का भी विशेष ध्यान रखते हैं। महीने में एक बार इन की जेब भारी कर दी जाती है।
सीना ताने खड़े सवाल... चंदर लोहार की मौत के बाद बड़ा सवाल यही है कि जिस बदमाश को पुलिस ने जिलाबदर करने की तैयारी की थी, उसे सिर्फ थाने की हाजिरी तक सीमित करने का फैसला किस आधार पर हुआ? यदि उस समय जिलाबदर की कार्रवाई प्रभावी तरीके से होती, तो क्या चंदर की जान बच सकती थी?
दो टीआई की तनख्वाह से कई गुना ज्यादा है कमाई
हिस्ट्रीशीटर सूरज जाट और लखन जाट के जो ठीये चल रहे हैं वह पुलिस और आबकारी विभाग की साठगांठ के बिना संभव नहीं है। सूत्र बताते हैं कि इन ठीयों से रोजाना यह अपनी गैंग के गुर्गों के माध्यम से देशी शराब की 100 से 150 पेटी रोज खपाता है।
एक साधारण से हिसाब लगाकर देखा जाए तो यदि सूरज जाट को यदि एक क्वार्टर पर 10 रुपए भी बचते हैं और एक पेटी में यदि 50 क्वार्टर आते हैं तो 150 पेटी के मान से वह रोजाना के 75 हजार रुपए कमा रहा है यानी महीने की कमाई का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है, जो कि लसूड़िया और हीरा नगर थाने के टीआई की तनख्वाह से भी कई गुना ज्यादा है।
अगस्त में ही पूरा हुआ था थाना हाजिरी का आदेश
चंदन की मौत नहीं होती यदि आदतन अपराधी सूरज जाट जिलाबदर होता यानी अब असली सवाल सूरज पर पुलिस कार्रवाई को लेकर है। पुलिस ने पूर्व में अब हत्या के आरोपी सूरज जाट के खिलाफ जिलाबदर का प्रतिवेदन भेजा था, लेकिन बाद में उसे जिले से बाहर करने के बजाय छह माह तक थाने में हाजिरी देने का आदेश दिया गया।
यह अवधि 18 अगस्त को खत्म हो चुकी है। ऐसे में सवाल है कि कई मामलों में कार्रवाई झेल चुके बदमाश पर जिलाबदर की सख्त कार्रवाई के बजाय हाजिरी जैसी राहत क्यों दी गई? सूरज के खिलाफ वर्ष 2024 में कांग्रेस नेता गब्बू यादव के घर और कार्यालय पर हमले का केस भी दर्ज हुआ था। इससे पहले 2009 और 2011 में उसके खिलाफ जिलाबदर की कार्रवाई हो चुकी है। उसके भाई लखन जाट पर भी दो दर्जन से ज्यादा केस बताए जा रहे हैं।
यही तो नहीं थी हत्या की वजह?
खुलासा फर्स्ट को यह जानकारी भी लगी है कि निरंजनपुर बस्ती में रहने वाला चंदर लोहार बंजारा समाज का है और क्षेत्र में इसी समाज के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। इसके चलते वह क्षेत्र में आसानी से अवैध शराब बेचने का काम करता था। इसी बात को लेकर सूरज जाट और लखन जाट से प्रतिद्वंदिता चल रही थी। गाय चोरी का तो बहाना मिल गया और उसे आरोप लगाकर पीटा गया।
जन्मदिन में गैंगस्टर सतीश भाऊ और गैंग के साथ पहुंचा था बदमाश जाट
पिछले महीने शहर के एक बड़े भाजपा नेता के बेटे के जन्मदिन समारोह में हिस्ट्रीशीटर सूरज जाट की मौजूदगी भी चर्चा में रही थी। बताया जा रहा है कि वह गैंगस्टर सतीश भाऊ और अपने गुर्गों के साथ कार्यक्रम में पहुंचा था। ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि सूरज पर कितने केस हैं, बल्कि यह भी है कि इतने गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड के बावजूद उसका दबदबा लगातार कैसे बना हुआ है।
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