मुक्ति की राह खुली: 6000 से ज्यादा प्लॉटधारकों का फूटा गुस्सा; सैकड़ों लोग आईडीए कार्यालय पहुंचे; CEO ने लिखित आश्वासन दिया-अक्टूबर के दूसरे सप्ताह या उससे पहले बैठक
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) की स्कीम 171 और स्कीम 77 से मुक्ति की मांग को लेकर गुरुवार को सैकड़ों प्लॉटधारक प्राधिकरण कार्यालय पहुंच गए।
करीब तीन दशक से लंबित मामले को लेकर लोगों का गुस्सा अधिकारियों के सामने फूट पड़ा। प्रदर्शन में बुजुर्गों के साथ नई पीढ़ी के लोग भी शामिल हुए।
लंबी चर्चा और गरमागरमी के बाद आईडीए CEO डॉ. परीक्षित झाड़े ने लिखित आश्वासन दिया कि स्कीम लैप्स करने के संबंध में अक्टूबर 2026 के दूसरे सप्ताह या उससे पहले विशेष बोर्ड बैठक आयोजित की जाएगी। इसके बाद प्रदर्शनकारी वापस लौटे।
लिखित आश्वासन के बाद खत्म हुआ प्रदर्शन
प्लॉटधारकों ने आईडीए बोर्ड के समक्ष स्कीम 171 और 77 को समाप्त करने का ज्ञापन सौंपा था। इसके जवाब में CEO डॉ. परीक्षित झाड़े ने लिखित रूप से पुष्टि की कि इस संबंध में अक्टूबर के द्वितीय सप्ताह या उससे पहले बोर्ड बैठक आयोजित की जाएगी।
प्लॉटधारकों ने इसे फिलहाल बड़ी राहत माना है, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि यदि तय समय में ठोस निर्णय नहीं हुआ तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने आमरण अनशन की चेतावनी भी दी है।
महेंद्र हार्डिया बोले- कब तक आश्वासन देते रहेंगे?
प्लॉटधारकों के समर्थन में विधायक महेंद्र हार्डिया भी आईडीए कार्यालय पहुंचे। अधिकारियों के साथ बंद कमरे में हुई चर्चा में उन्होंने लंबे समय से मामले के लंबित रहने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वे कब तक लोगों को आश्वासन देते रहेंगे और अधिकारी कब तक सिर्फ वादे करते रहेंगे।
बैठक में संभागायुक्त भास्कर लक्षकार, कलेक्टर शिवम वर्मा, आईडीए CEO डॉ. परीक्षित झाड़े, कांग्रेस शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे और प्लॉटधारक प्रतिनिधि मौजूद रहे। चर्चा के दौरान काफी देर तक गरमा-गरमी का माहौल रहा। आखिरकार लिखित आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ।
स्कीम 171 में 13 सोसायटी के 6 हजार प्लॉट
स्कीम 171 में 13 सहकारी संस्थाओं के करीब 6 हजार प्लॉटधारक प्रभावित हैं। प्लॉटधारकों के अनुसार यह विवाद करीब 33 साल पुराना है। पहले इस क्षेत्र में स्कीम 132 लागू थी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद जब वह स्कीम समाप्त हुई तो बाद में आईडीए ने इसी क्षेत्र को स्कीम 171 में शामिल कर लिया। इसके बाद से प्लॉटधारक लगातार योजना से मुक्ति की मांग कर रहे हैं।
5.89 करोड़ जमा, फिर भी नहीं मिली मुक्ति
प्लॉटधारकों के अनुसार स्कीम से मुक्ति के लिए दिसंबर 2024 में 5.89 करोड़ रुपए आईडीए के पास जमा कराए जा चुके हैं। इसके बावजूद अब तक पूरी योजना को समाप्त करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।
अगस्त 2025 में स्कीम मुक्ति को लेकर प्रस्ताव सामने आया था। इसमें सहकारी संस्थाओं की जमीन को मुक्त कर सरकारी और निजी जमीन पर नई स्कीम लाने का प्रस्ताव रखा गया। प्लॉटधारकों का कहना है कि इससे मामला और उलझ गया।
उनका तर्क है कि जब निर्धारित राशि जमा हो चुकी है तो पूरी स्कीम को एक साथ मुक्त किया जाना चाहिए, न कि जमीन को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
स्कीम 77 के अयोध्यापुरी रहवासी भी वर्षों से परेशान
स्कीम 77 के अंतर्गत आने वाली अयोध्यापुरी के रहवासी भी लंबे समय से योजना से मुक्ति की लड़ाई लड़ रहे हैं। रहवासियों के अनुसार उनकी जमीन वर्ष 1996 में स्कीम 77 में शामिल की गई थी।
वर्ष 2008 से अयोध्यापुरी रहवासी संघ के माध्यम से वे इस मामले को उठा रहे हैं। यहां भी बड़ी संख्या में प्लॉटधारक अपनी जमीन पर मकान बनाने और योजना से बाहर निकलने की मांग कर रहे हैं।
बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक पहुंचे आईडीए
गुरुवार के प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें सिर्फ पुराने प्लॉटधारक ही नहीं, बल्कि उनके बुजुर्ग माता-पिता और नई पीढ़ी के बच्चे भी शामिल हुए। कई लोग स्कूल-कॉलेज से छुट्टी लेकर आईडीए कार्यालय पहुंचे।
प्लॉटधारकों का कहना है कि पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन उनकी जमीन का विवाद खत्म नहीं हुआ। अब वे आश्वासन नहीं, बल्कि बोर्ड के फैसले के जरिए स्थायी समाधान चाहते हैं।
अब अक्टूबर की बोर्ड बैठक पर टिकी नजर
लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन फिलहाल टल गया है। अब हजारों प्लॉटधारकों की नजर अक्टूबर 2026 के दूसरे सप्ताह या उससे पहले होने वाली आईडीए बोर्ड बैठक पर है।
अगर बैठक में स्कीम 171 और 77 को लेकर ठोस फैसला होता है तो वर्षों से चले आ रहे विवाद का रास्ता खुल सकता है। वहीं, एक बार फिर मामला टलने पर प्लॉटधारकों ने आंदोलन तेज करने और आमरण अनशन की चेतावनी दी है।
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