हनी ट्रैप मामले में नया मोड़: बीजेपी से जुड़ी महिला हिरासत में, वीडियो-ऑडियो सबूत जुटाने में जुटी पुलिस, ऐसे लोगों को बनाते थे निशाना
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर में शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर से जुड़े चर्चित हनी ट्रैप मामले में पुलिस जांच लगातार गहराती जा रही है। मामले में अब एक और महिला आरोपी को हिरासत में लिया गया है, जिसे कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, बुधवार को सागर से हिरासत में ली गई महिला का नाम रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी है। बताया जा रहा है कि वह भाजपा के एक प्रकोष्ठ में पदाधिकारी रह चुकी है। पुलिस अब उससे जुड़े डिजिटल सबूतों और नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही है।
अब तक 5 गिरफ्तार, एक महिला हिरासत में
इस मामले में अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें कथित मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन, महिला शराब तस्कर अलका दीक्षित, उसका बेटा जयदीप, प्रॉपर्टी कारोबारी लाखन चौधरी और हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा शामिल हैं।
अब रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी को हिरासत में लेने के बाद पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी है। इंदौर क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजेश त्रिपाठी के अनुसार शुरुआती जांच में सामने आया है कि रेशू, अलका और श्वेता एक संगठित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क के तहत काम कर रही थीं।
प्रभावशाली लोगों को बनाते थे निशाना
पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने कथित तौर पर कई प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। बताया जा रहा है कि रेशू की पहुंच राजनीति, प्रॉपर्टी कारोबार, शराब व्यापार और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े लोगों तक थी। इसी नेटवर्क का उपयोग कर प्रभावशाली व्यक्तियों को जाल में फंसाने और बाद में ब्लैकमेल करने की रणनीति बनाई गई।
डीसीपी त्रिपाठी के मुताबिक, रेशू का संपर्क श्वेता विजय जैन के जरिए अलका दीक्षित से हुआ था। इसके बाद तीनों ने मिलकर कथित हनी ट्रैप नेटवर्क को आगे बढ़ाया।
वीडियो और ऑडियो रिकवर कर रही पुलिस
फिलहाल पुलिस की सबसे बड़ी प्राथमिकता आरोपियों के पास मौजूद कथित वीडियो, ऑडियो और डिजिटल रिकॉर्ड जुटाना है। सूत्रों के अनुसार, कुछ मोबाइल फोन से ऑडियो और वीडियो फाइलें रिकवर की गई हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किन-किन लोगों के वीडियो बनाए गए और उनका उपयोग किस तरह ब्लैकमेलिंग के लिए किया गया। जांच एजेंसियां डिजिटल फॉरेंसिक टीम की मदद से मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और क्लाउड डेटा भी खंगाल रही हैं।
निमाड़ के नेता को भी बनाया निशाना
जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क ने निमाड़ क्षेत्र के एक प्रभावशाली नेता को भी अपने जाल में फंसाने की कोशिश की थी। बताया जा रहा है कि उस नेता का इंदौर में मकान उसी इलाके में है जहां अलका दीक्षित रहती थी।
सूत्रों के मुताबिक, जब अलका दीक्षित ने चिंटू ठाकुर को ब्लैकमेल करने का प्रयास किया तो उसने अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक पहुंच का हवाला दिया। इसके जवाब में अलका ने कथित वीडियो दिखाकर दावा किया कि उसके पास कई बड़े लोगों के भी आपत्तिजनक वीडियो मौजूद हैं।
शिकायत के 19 दिन बाद दर्ज हुई FIR
जानकारी के अनुसार, ब्लैकमेलिंग की शिकायत मिलने के करीब 19 दिन बाद पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की। हालांकि चिंटू ठाकुर खुद भी पहले से आपराधिक मामलों में घिरा हुआ है। वह इंदौर के आजाद नगर थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या के प्रयास के एक मामले में आरोपी बताया जा रहा है।
जेल और कोर्ट पेशी के दौरान बनी साजिश!
सूत्रों के अनुसार, कथित हनी ट्रैप नेटवर्क की नींव जेल और कोर्ट पेशियों के दौरान पड़ी। बताया जा रहा है कि श्वेता विजय जैन की दोस्ती अलका दीक्षित से जेल में हुई थी। कोर्ट में पेशी के दौरान श्वेता, रेशू को लेकर अलका से मिलने पहुंचती थी।
इन्हीं मुलाकातों के दौरान कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाकर रुपए ऐंठने की योजना तैयार की गई। रेशू ने अलका को बताया था कि उसके कई नेताओं, अफसरों, प्रॉपर्टी कारोबारियों और शराब व्यापारियों से संपर्क हैं और उन्हें फंसाकर मोटी रकम हासिल की जा सकती है।
सरकारी गवाह बनना चाहती है श्वेता जैन
पुलिस रिमांड के दौरान श्वेता विजय जैन ने जांच अधिकारियों के सामने सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई है। उसने पुलिस को बताया कि अलका और रेशू दोनों उसके संपर्क में थीं। श्वेता के मुताबिक उसने अलका को चेतावनी भी दी थी कि जिन लोगों को निशाना बनाया जा रहा है वे बेहद प्रभावशाली हैं, लेकिन इसके बावजूद कथित नेटवर्क अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए था। अब पुलिस यह तय करेगी कि श्वेता को सरकारी गवाह बनाया जाए या नहीं। फिलहाल पूरे मामले में कई और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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