इस समूह की जमीन पर नया विवाद: 10 साल तक नहीं हुआ निवेश; अब दूसरी कंपनी को ट्रांसफर का प्रस्ताव,पत्र से खुलासा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
योगगुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के पतंजलि समूह की पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में आवंटित 40 एकड़ जमीन एक बार फिर चर्चा में है। करीब 10 साल पहले रियायती दर पर मिली इस जमीन पर घोषित निवेश परियोजना शुरू नहीं हो सकी।
इसके बाद जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। अब समूह ने इस जमीन को अपनी दूसरी कंपनी पतंजलि फूड लिमिटेड के नाम स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया है।
इस संबंध में मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) ने भी एक पत्र जारी किया है। हालांकि, जमीन हस्तांतरण से पहले नियमों के तहत निवेश संबंधी शर्तें पूरी करना अनिवार्य है, जिन्हें लेकर सवाल उठ रहे हैं।
2016 में मिला था 40 एकड़ का भूखंड
वर्ष 2016 में इंदौर में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने 500 रुपए करोड़ निवेश का प्रस्ताव दिया था। इसके बाद पीथमपुर के सेक्टर-3 (बगदून) में कंपनी को करीब 40 एकड़ भूमि 99 वर्ष की लीज पर रियायती दर पर आवंटित की गई।
यह भूमि लगभग 1.68 लाख वर्गमीटर क्षेत्रफल की थी और इसके लिए करीब ₹10 करोड़ का प्रीमियम तय किया गया। साथ ही प्रतिवर्ष लीज रेंट भी निर्धारित किया गया था। प्रस्तावित परियोजना में फल-सब्जी प्रसंस्करण और अन्य खाद्य उत्पादों का प्लांट स्थापित किया जाना था।
10 साल बाद भी परियोजना शुरू नहीं
आरोप है कि भूमि आवंटन के बाद कंपनी ने केवल बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया, लेकिन प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना शुरू नहीं की। लीज की शर्तों के अनुसार निर्धारित अवधि में परियोजना शुरू होना आवश्यक था।
इसके बाद MPIDC ने दो बार जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की। कंपनी ने कोविड-19 महामारी का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय मांगा, लेकिन इसके बाद भी परियोजना शुरू नहीं हो सकी।
अब पतंजलि फूड लिमिटेड को ट्रांसफर का प्रस्ताव
जमीन निरस्तीकरण की प्रक्रिया के बीच पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने प्रस्ताव दिया कि उक्त भूमि समूह की दूसरी कंपनी पतंजलि फूड लिमिटेड के नाम स्थानांतरित कर दी जाए।
इस प्रस्ताव पर विचार करते हुए MPIDC के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला ने 14 जुलाई को पत्र जारी किया। प्रस्ताव के अनुसार, पतंजलि फूड लिमिटेड पीथमपुर में करीब 450 करोड़ रुपए का निवेश कर बिस्किट और सोयाबीन प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने तथा लगभग 1,600 लोगों को रोजगार देने का दावा कर रही है।
नियम 19-बी बना सबसे बड़ा पेंच
भूमि हस्तांतरण को लेकर सबसे बड़ा सवाल मध्य प्रदेश औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2019 के नियम 19(बी) को लेकर है। इस नियम के अनुसार, जिस कंपनी को मूल रूप से भूमि आवंटित हुई थी।
उसे अपनी स्वीकृत परियोजना के तहत कम से कम 25 प्रतिशत स्थायी पूंजी निवेश या न्यूनतम 50 करोड़ रुपए का निवेश करना होगा। इसके बाद ही भूमि दूसरी कंपनी को हस्तांतरित की जा सकती है। यदि यह शर्त पूरी होती है, तो नई कंपनी को लीज प्रीमियम और विकास शुल्क सहित अन्य निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा।
निवेश की शर्त पूरी हुई या नहीं?
विवाद का मुख्य बिंदु यही है कि क्या मूल आवंटी कंपनी ने नियम 19(बी) के तहत आवश्यक निवेश किया है या नहीं। यदि निर्धारित निवेश नहीं हुआ है, तो भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप होगी या नहीं, इसका परीक्षण अब MPIDC इंदौर स्तर पर किया जाएगा।
पुराने प्लांट को शिफ्ट करने की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, मांगलिया स्थित पतंजलि फूड (पूर्व रुचि सोया) की एक यूनिट को पीथमपुर स्थानांतरित करने की योजना भी चर्चा में है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इसे नए निवेश के रूप में माना जाएगा या नहीं। इस पहलू की जांच भी संबंधित एजेंसियों द्वारा की जाएगी।
खुली नीलामी की मांग भी उठी
कुछ कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि निर्धारित अवधि में परियोजना शुरू नहीं हुई, तो लीज की शर्तों के अनुसार सरकार को भूमि वापस लेकर उसकी खुली नीलामी करनी चाहिए थी। उनका तर्क है कि पिछले दस वर्षों में भूमि का बाजार मूल्य काफी बढ़ चुका है और खुली नीलामी से सरकार को अधिक राजस्व मिल सकता था।
MPIDC का पक्ष
MPIDC के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला ने कहा कि कंपनी की ओर से प्रस्ताव प्राप्त हुआ था, जिस पर नियमों के अनुसार परीक्षण कर पत्र जारी किया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम 19(बी) की सभी शर्तों का परीक्षण स्थानीय स्तर पर किया जाएगा और अंतिम निर्णय नियमानुसार ही होगा। सरकार का उद्देश्य निवेश को बढ़ावा देना और रोजगार के अवसर सृजित करना है।
पतंजलि समूह की प्रतिक्रिया नहीं
मामले में पतंजलि समूह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
फिलहाल स्थिति क्या है?
अभी जमीन का हस्तांतरण अंतिम रूप से स्वीकृत नहीं हुआ है। प्रस्ताव पर प्रक्रिया जारी है और यह नियम 19(बी) की शर्तों तथा MPIDC की जांच पर निर्भर करेगा। ऐसे में आगे का निर्णय संबंधित विभागों की जांच और शासन की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
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