नशीले कफ सिरप नेटवर्क का खुलासा: फैक्ट्री पर एसटीएफ की छापेमारी; 73 हजार से ज्यादा शीशियां की जब्त
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
नशे के लिए इस्तेमाल होने वाले कफ सिरप के अवैध कारोबार की जांच में बड़े खुलासे हो रहे हैं। गांधी नगर में अवैध री-पैकिंग फैक्ट्री पकड़े जाने के दो दिन बाद स्पेशल टास्क फोर्स ने मुबारकपुर क्षेत्र में कार्रवाई कर 23,125 कफ सिरप की शीशियां बरामद की हैं।
यह कार्रवाई गांधी नगर से गिरफ्तार मुख्य आरोपी अकील खान और आकाश भाटी से पुलिस रिमांड के दौरान हुई पूछताछ के आधार पर की गई।
50 लाख का सिरप बरामद
एसटीएफ ने मुबारकपुर के मकान से 22,155 ऑफ-कफ और 970 ऑनरेक्स कफ सिरप की शीशियां जब्त की हैं। इनकी अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपए बताई जा रही है। इससे पहले गांधी नगर से 49,920 शीशियां बरामद हुई थीं।
दोनों कार्रवाई को मिलाकर अब तक कुल 73,045 शीशियां जब्त की जा चुकी हैं। सभी बोतलें 100-100 मिलीलीटर की हैं, यानी करीब 7,305 लीटर कफ सिरप बरामद हुआ है, जिसकी बाजार कीमत डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक आंकी जा रही है।
गांधी नगर में पैकिंग, मुबारकपुर में स्टोरेज
जांच में सामने आया है कि गांधी नगर स्थित फैक्ट्री में कफ सिरप की बोतलों से बैच नंबर और एक्सपायरी डेट हटाकर री-पैकिंग की जा रही थी। वहीं मुबारकपुर से बरामद सिरप मूल पैकेजिंग और रैपर के साथ मिला है।
इससे जांच एजेंसियों को संदेह है कि गांधी नगर को री-पैकिंग सेंटर और मुबारकपुर को स्टोरेज व सप्लाई हब के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।
एक साल से चल रहा था कारोबार
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि यह नेटवर्क करीब एक साल से सक्रिय था। गांधी नगर से जब्त 49,920 शीशियों को उन्होंने केवल एक सप्ताह का स्टॉक बताया था। राहुल लोढ़ा के अनुसार जांच अब केवल अवैध भंडारण या री-पैकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सप्लाई नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की भूमिका खंगाली जा रही है।
हरिद्वार की कंपनी भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान पता चला है कि जब्त सिरप पर हरिद्वार स्थित एक दवा निर्माता कंपनी का नाम दर्ज है। एसटीएफ यह सत्यापित कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में सिरप की सप्लाई वास्तव में कंपनी द्वारा की गई थी या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि सप्लाई चेन वैध थी या बीच में कहीं माल का दुरुपयोग किया गया।
4 हजार खाली बोतलों ने बढ़ाया संदेह
मुबारकपुर से कार्रवाई के दौरान करीब 4 हजार खाली बोतलें भी बरामद हुई हैं। इससे जांच एजेंसियों को आशंका है कि नेटवर्क के अन्य ठिकानों पर भी सिरप भरने, लेबल बदलने या री-पैकिंग का काम किया जाता रहा होगा। एसटीएफ अब पूरे नेटवर्क की आर्थिक लेन-देन, सप्लाई रूट और संभावित अन्य ठिकानों की जानकारी जुटाने में लगी हुई है। मामले में आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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