‘मम्मी ने हाथ पकड़ा था… फिर छूट गया’: जिंदगी भर का गम दे गया कभी न भूलने वाला हादसा; लापरवाही के आरोप के बीच अब तक इतनी मौतें
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, जबलपुर।
बरगी डैम में गुरुवार शाम हुए क्रूज हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 4 लोग अब भी लापता हैं। रेस्क्यू अभियान जारी है, वहीं बचे हुए लोग उस भयावह मंजर को याद कर सिहर उठते हैं। हादसे के प्रत्यक्षदर्शी रोशन आनंद ने बताया कि वे अपने परिवार के साथ क्रूज पर सवार थे। “क्रूज पलटते ही किसी तरह पत्नी के साथ बाहर निकले। साढ़े तीन घंटे तक बच्चे को ढूंढते रहे। उम्मीद छोड़ चुके थे, लेकिन वह मिल गया। आज उसका जन्मदिन है, यह दिन कभी नहीं भूलेंगे।” उन्होंने कहा कि वे खुद को मौत के मुंह से लौटकर आया मानते हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, क्रूज में करीब 45 से 50 यात्री सवार थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे अधिक थे। शुरुआत में मौसम सामान्य था, लेकिन लौटते समय अचानक तेज आंधी-तूफान आ गया। देखते ही देखते लहरें तेज हो गईं और क्रूज असंतुलित होकर हिचकोले खाने लगा।
यात्रियों ने आरोप लगाया कि संकट की घड़ी में क्रूज के कर्मचारियों ने कोई ठोस मदद नहीं की। लाइफ जैकेट होने के बावजूद उन्हें समय पर वितरित नहीं किया गया। कई लोगों ने खुद ही जैकेट निकालकर पहनी और दूसरों को पहनाई। इसी दौरान क्रूज में पानी भरने लगा और अफरा-तफरी मच गई।
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि पानी में गिरने के बाद लोग मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन लाइफ बोट काफी देर से पहुंची। यदि राहत दल समय पर पहुंचता, तो कई और लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
हादसे में दिल्ली से आई 13 वर्षीय सिया ने अपनी मां, छोटे भाई और नानी को खो दिया। सिया ने बताया कि आखिरी समय में उसकी मां ने छोटे भाई को लाइफ जैकेट से बांध रखा था। रातभर उसे उम्मीद थी कि दोनों बच जाएंगे, लेकिन सुबह उनके शव एक-दूसरे से लिपटे मिले।
इसी तरह पाटन निवासी तनिष्का ने बताया कि हादसे के वक्त उसके पिता ने सभी को एक-दूसरे का हाथ पकड़ने को कहा था। “मम्मी ने हमें पकड़ा हुआ था, तभी क्रूज पलट गया और उनका हाथ छूट गया।” रेस्क्यू टीम ने परिवार के अन्य सदस्यों को बचा लिया, लेकिन उसकी मां को नहीं बचाया जा सका। प्रशासन के अनुसार, हादसे के समय हवा की रफ्तार करीब 74 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जिससे डैम में ऊंची लहरें उठ रही थीं और स्थिति तेजी से बिगड़ गई।
खमरिया ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से जुड़े कामराज का परिवार भी हादसे की चपेट में आ गया। उनकी पत्नी और भाभी की मौत हो गई, जबकि वे स्वयं और उनका बेटा अब भी लापता हैं। परिजनों के अनुसार, उनके माता-पिता किनारे से यह हादसा होते देखते रहे, लेकिन असहाय थे।
प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक तौर पर लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों में कमी के आरोप सामने आए हैं। फिलहाल राहत एवं बचाव कार्य जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है। हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है।
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