मेरा काम प्रजा को सुखी रखना है: नमन... लोकमाता, अक्षय कीर्ति-अखंड अविनाशी
KHULASA FIRST
संवाददाता

301वीं जयंती पर प्रातः स्मरणीय, पुण्य श्लोका, देवी अहिल्या बाई के चरणों में खुलासा फर्स्ट का शत-शत नमन
देवी अहिल्या का मूल मंत्र-सत्ता के बल पर जो किया, ईश्वर को हिसाब देना होगा, इंदौर का सौभाग्य, यह शिव उपासिका देवी अहिल्या की नगरी है
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शुभ्र धवल वस्त्रों में वे ललाट पर त्रिपुंड सजाए सादगी की मूरत बनी रहीं। अपने आराध्य भगवान शिवशंकर शंभू भोलेनाथ को साक्षी मान कर्मरत रहीं। उस दौर में वे नारी शक्ति की इतनी बड़ी ताकत बनकर उभरीं, जिस दौर में पुरुषों से भी यह कल्पना नहीं की जा सकती थी। वे सत्ता और सामर्थ्य के बावजूद निस्पृह भाव से राजकाज करती रहीं। वे भारत की सच्ची प्रजा वत्सल शासिका थीं, जिसके दरवाजे 24 घंटे अपनी प्रजा के लिए खुले थे। उनकी न्याय प्रणाली और शासन व्यवस्था आज भी अध्ययन और शोध का विषय बनी हुई है। नारी स्वतंत्रता, नारी अधिकारों और समानता के वर्तमान दौर में लगते नारों के बीच क्या कोई ये कल्पना कर सकता है कि एक देवी ने ये सब काम, दासता के उस दौर में कर दिए, जब महिलाओं का घूंघट से बाहर झांकना भी गुनाह था। लोकमाता की यह कीर्ति, अखंड...अक्षुण्ण व अविनाशी है।
"ई श्वर ने जो मुझ पर जो उत्तरदायित्व रखा है, उसे निभाना है। मेरा काम प्रजा को सुखी रखना है। मैं अपने प्रत्येक काम के लिए स्वयं जिम्मेदार हूं। सामर्थ्य और सत्ता के बल पर मैं जो कुछ भी यहां कर रही हूं, उसका ईश्वर के यहां मुझे जवाब देना पड़ेगा।
मेरा यहां कुछ नहीं है। जिसका है, उसी के पास भेजती हूं। जो कुछ लेती हूं, वह मेरे ऊपर ऋण है। न जाने उसे कैसे चुका पाऊंगी।’
ये शब्द है इस शहर की आराध्या, प्रातः स्मरणीय, पुण्य श्लोका देवी अहिल्याबाई होलकर के। राजवाड़ा के आंगन में ये शब्द आज भी विद्यमान हैं, जहां देवी विराज रही हैं। उसी पेडस्टल पर, जिस पर पैर रखकर मौजूदा सत्ता भगवती मां अहिल्याबाई होलकर को नमन करने आती है।
आज की राजनीति व सत्ता के लिए ये शब्द भले ही बेमानी हो, लेकिन ये ही देवी अहिल्या जी के जीवन का आजीवन मूलमंत्र बने रहे, इसलिए वर्तमान की सत्ता को पुनः स्मरण करवा रहे हैं। वर्तमान की राजसत्ता देवी अहिल्या के इस कृतित्व का शतांश भी कर ले तो जनकल्याण हो जाए।
देवी अहिल्या की कीर्ति पताका समूचे आर्यावर्त में आज भी पूर्ण गौरव व गरिमा से लहरा रही है। लोकमाता की ये कीर्ति...अखंड, अविनाशी...अनंत...अक्षुण्ण...असीम...अनंत है, जिसे न कोई बिसरा पाएगा, न छुपा पाएगा।
क्योंकि वह तो भारत भूमि के कोने-कोने में व्याप्त है। अटक से कटक तक और कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर तीर्थ, हर घाट पर आज भी ठाठ से विराजमान हैं।
लोकमाता की यह कीर्ति व कृतित्व हर पुण्य सलिला के तट पर आज भी विद्यमान है। हर तीर्थस्थल पर दृश्यमान है। हर देवालय-शिवालय में घंटे-घड़ियाल व शंखनाद के रूप में गुंजायमान है।
पुण्य श्लोका की कीर्ति पताका नारी शक्ति के स्वातंत्र्य में, उसके आर्थिक स्वालंबन में, उसके अधिकार में आज भी फहरा रही। मातृशक्ति को आत्मनिर्भर बनाने की उनकी जिजीविषा का आज भी कोई सानी नहीं है। उनकी न्यायप्रियता का आज भी कोई सानी नहीं।
न कोई उनके कुशल राज्य, शासन संचालन की बराबरी कर पाया है आज तक। लोकमाता की कुलकीर्ति की गाथा काशी विश्वनाथ के आंगन में ज्यों की त्यों उपस्थित है। गंगा के घाट पर आज भी सजी- संवरी बिखरी पड़ी है।
सुदूर पश्चिमी तट पर रत्नाकर जलनिधि के समक्ष ज्योतिर्लिंग सोमनाथ के दरबार समक्ष भी वह ध्वजा सी लहरा रही है। अपने आराध्य के भग्नावशेष को भव्य रूप देने वाली वे ही शासिका हैं।
हरिद्वार के सुरम्य घाट पर वो कीर्ति पताका गंगा जल की आचमनी कर रही है तो माई नर्मदा के तीरे तीरे वो समूचे 1313 किमी के परिक्रमा मार्ग पर गुंजायमान भी हो रही है।
देवी अहिल्या की यशोगाथा उन सैकड़ों कुओं, बावड़ियों और ताल-तलैया में भी हिलोर मारती दिख जाएगी, जो पथिकों के कंठ की प्यास बुझाने के लिए बनवाई गई थी। भारत के तीर्थ स्थलों की वे सराय और धर्मशालाएं, विश्रामगृह भी आज भी यशोगान कर रहे हैं, जिन्हें देवी अहिल्या द्वारा तीर्थयात्रियों के लिए आकार दिया गया था।
वे सदाव्रत के भंडार आज भी भरे हुए हैं, जो भूखे का पेट भरते हैं। प्यासे को पानी देते हैं। हमारे प्रदेश की माहिष्मति नगरी महेश्वर की वो हथकरघा मशीनों की खट-खट तो आज भी बरकरार है, जो देश-दुनिया में लोकप्रिय माहेश्वरी साड़ियों की बुनती-गूंथती-संवारती हैं और देवी अहिल्या जी की पुण्य स्मृति को संजोती भी है।
नतमस्तक है, उस देवी के समक्ष जिसके लिए उसकी प्रजा ही उसका परिवार थी। जिसका संपूर्ण राजपाट और वैभव भगवान शिव को समर्पित था। पक्का इंदौरी अखबार खुलासा फर्स्ट इंदौर की आराध्या की 301वीं जयंती पर श्रीचरणों में नमन करता है।
संबंधित समाचार

भील प्रदेश के लिए चार राज्यों का महासंग्राम:मानगढ़ धाम में जुटेंगे हजारों आदिवासी

नीट यूजी 2026 का रिजल्ट जारी:11.21 लाख अभ्यर्थी क्वालिफाई; पंजाब और हरियाणा के छात्रों ने किया टॉप

पशुपतिनाथ मंदिर की दान पेटियों में 31.40 लाख का चढ़ावा:सात देशों की विदेशी मुद्रा भी मिली; 2026 में दान 1 करोड़ के पार

13वीं मंजिल से गिरी विशाल क्रेन:पार्किंग में मची तबाही; कई गाड़ियां चकनाचूर, एक व्यक्ति गंभीर

शराब पार्टी के बाद निर्माणाधीन फार्म हाउस पर मिला मजदूर का शव:प्रेम त्रिकोण में हत्या की आशंका

होर्मुज के बाद लाल सागर भी बंद हुआ तो वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है:हूती विद्रोहियों को ईरान ने दिया बड़ा संदेश

भगवान श्रीकृष्ण पर टिप्पणी मामले में मौलाना पर एफआईआर:गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन

नाकाबंदी में पुलिस के हत्थे चढ़ा अफीम तस्कर:2.051 किलो अफीम और कार जब्त; सप्लाई नेटवर्क की जांच तेज

शादी से एक रात पहले दुल्हन के गहने लेकर फरार हुई रिश्तेदार युवती:प्रेमी के साथ भागने का आरोप; आरोपियों की तलाश शुरू

अमरनाथ यात्रियों से भरी बस में लगी भीषण आग:47 श्रद्धालु थे सवार; मची चीख-पुकार

प्रेम विवाह के 3 साल बाद रिश्तों का कत्ल:पति ने चाकू से काटा पत्नी का होंठ; मासूम बच्ची को तड़पता छोड़ हुआ फरार

MBBS छात्र ने की आत्महत्या:क्लासरूम में खाई सल्फास की गोलियां; इलाज के दौरान मौत

हाईवे पर भीषण हादसा:डंपर से टकराकर पलटा कंटेनर;बाइक सवार की मौत

यहां बना नया कानून:अवैध धर्म परिवर्तन पर आजीवन कारावास तक की सजा; इतने रुपए तक देना होगा जुर्माना, विवाह होगा शून्य घोषित

निगम का बड़ा फैसला:25 साल की जरूरतों के हिसाब से चमकेगा शहर; नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों में लापरवाही स्वीकार नहीं

इंजीनियर पति की हत्या का सनसनीखेज खुलासा:पुलिस का दावा- अफसर पत्नी ने प्रेमी संग रची थी साजिश; शूटर को दी थी चार लाख की सुपारी

सफलता के पथ पर आगे बढ़ता रहे खुलासा फर्स्ट

रथयात्रा के दौरान मची अफरा-तफरी:एक श्रद्धालु की मौत; 200 से अधिक अस्पताल पहुंचे

मोबाइल के चक्कर में गई जान:सूखे कुएं में उतरे युवक की दम घुटने से मौत

'नशे से दूरी है जरूरी 2.0' अभियान शुरू:जागरूकता रथों को किया रवाना; 15 दिन तक शहरभर में देंगे संदेश
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!