आमार बांग्ला-सोनार बांग्ला: भगवामय हुआ बंगाल; मोदी के नेतृत्व व शाह की रणनीति ने किया कमाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

शताब्दी वर्ष में आरएसएस को भाजपा ने दिया अनमोल उपहार
बंगाल में भाजपा ने कर दिया बड़ा ‘खेला’, कमल पर बरसी मतदाताओं की जबरदस्त ‘ममता', ‘झालमुड़ी’ दिखा गई असर
‘भद्रलोक’ में पहली बार भाजपा की सरकार, कमलदल ने 206 सीट के साथ किया कमाल, विपक्ष का बड़ा गढ़ ढहा
बंगाल में नया सूर्योदय, ममता भी अपने गृह क्षेत्र में ही 15 हजार से ज्यादा मतों से हारीं चुनाव, दो अंकों में सिमटी तृणमूल कांग्रेस
असम में भाजपा ने 101 सीट के साथ लगाई हैट्रिक, कांग्रेस के सीएम चेहरा गोगोई को भी मिली करारी हार
तमिलनाडु में विजय की चली आंधी, नायक से जननायक बने तमिल सुपरस्टार, मुख्यमंत्री स्टालिन चुनाव हारे
केरलम में वामपंथ का आखिरी किला भी ढहा, कांग्रेस वाले यूडीएफ गठबंधन की 10 साल बाद सत्ता में वापसी
केंद्र शासित पुड्डुचेरी में दूसरी बार फिर सत्ता में आया भाजपा-एनडीए, भाजपा मुख्यालय दिल्ली में मना पार्टी की जीत का जश्न
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अद्भुत, अविश्वसनीय, अकल्पनीय, अवर्णनीय। जी हां, जो पश्चिम बंगाल में हुआ वह इन शब्दों में ही बयां किया जा सकता है। राज्य में हुए चुनाव में भाजपा ने इस वामपंथी गढ़ में जो कमाल किया, वह कल्पनातीत है। जिस सूबे में कमलदल के दूर-दूर तक अते-पते नहीं थे, वहां भाजपा सरकार बनाने जा रही है और वह भी बहुमत के आंकड़े से कई गुना ज्यादा सीट के साथ।
10 बरस पहले भाजपा के पास 3 विधायक थे, अब 206 हैं। ये एक ही कमाल नहीं किया कमल ने। कमल ने विपक्ष की सबसे आक्रामक, जुझारू व अपराजेय नेता ममता बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा मतों से मात दे दी, वह भी उनके ही घर में। अब कोलकाता से दिल्ली तक जश्न मन रहा है।
कल्पना से परे 206 सीट के साथ विजय के बाद भाजपा ने इस जीत को बंगाल में नया सूर्योदय बताया और वादा किया है कि ‘आमार बांग्ला-सोनार बांग्ला’ के सर्वांगीण विकास के लिए दिन-रात एक कर देंगे। भाजपा ने न सिर्फ बंगाल का विपक्ष का सबसे मजबूत किला जीता, बल्कि सीमावर्ती राज्य असम में भी जीत की हैट्रिक लगा दी।
पुड्डुचेरी में भी पार्टी पुनः सत्ता में लौट आई। इसके साथ ही भाजपा ने ‘अंग-बंग-कलिंग’ तीनों प्रांत यानी बिहार, ओडिशा व बंगाल में केसरिया परचम फहरा दिया। इसके साथ ही भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह की अगुआई में गंगा के उद्गम स्थल गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक भगवा राज कायम कर दिया। अब भाजपा देश की 78 प्रतिशत आबादी व 72 प्रतिशत भूभाग पर राज करने वाली पार्टी बन गई है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व व गृहमंत्री अमित शाह की रणनीति ने भाजपा का सीना 56 इंच से भी कई गुना ज्यादा कर दिया। सोमवार से कमलदल के खेमे में ऐसा जश्न मन रहा है जो आज तक नहीं मना। आखिर उत्सव मने भी क्यों नहीं? जिस सूबे में पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं का बलिदान हुआ, जिस धरती पर भगवा फहराने का स्वप्न पार्टी के संस्थापक श्यामाप्रसाद मुखर्जी से लेकर अटल-आडवाणी तक ने देखा, जिस वामपंथ आंदोलन व सत्ता के गढ़ में केसरिया धर्म ध्वजा फहराने की साधना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कर रहा था उस पश्चिम बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत हुई। पार्टी कार्यकर्ताओं के खुशी के साथ आंसू बहाते चेहरे इस बात की गवाही दे रहे थे कि उन्होंने बंगाल में क्या हासिल किया है।
यहां भाजपा की न सिर्फ ऐतिहासिक जीत हुई, बल्कि वो सब मिथक भी धूलधूसरित हो गए जो तुष्टिकरण व भय-हिंसा की राजनीति के जरिए चुनावी विजय को लेकर भद्रलोक कहे जाने वाले बंगाल में स्थापित हो गए थे। बम-बंदूक, बूथ केप्चरिंग, हत्या का दौर भी इन चुनाव में समाप्त हो गया। उसी का ये परिणाम रहा कि भाजपा ने राज्य में न सिर्फ दो तिहाई बहुमत हासिल किया, बल्कि टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को भी उनके ही घर भवानीपुर में जबरदस्त रूप से मात दे दी। ममता को हराने वाले शुभेंदु ने इसे हिंदुओं की जीत बताया। भाजपा की इस आंधी में टीएमसी के कई नामचीन मंत्री चुनाव हार गए और पार्टी मुस्लिम बहुल इलाकों में भी भाजपा से मात खा गई।
पश्चिम बंगाल, केरलम, असम, तमिलनाडु व पुड्डुचेरी के विधानसभा चुनाव के नतीजे भारतीय राजनीति के इतिहास में दर्ज हो गए। सबसे बड़ा उलटफेर बंगाल में हुआ। यहां भाजपा में 15 साल स्व सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी को करारी शिकस्त दी। भाजपा 206 सीटें जीतकर सोनार बांग्ला में पहली बार सरकार बनाने जा रही है। टीएमसी 81 सीटों के साथ दो अंकों में सिमट गई। भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने ममता को 15105 वोटों से हरा दिया। शुभेंदु अधिकारी अपनी नंदीग्राम वाली सीट से भी जीत गए।
नायक से जननायक बने विजय ‘सेनापति’
सबसे चौंकाने वाले परिणाम तमिलनाडु के रहे, जहां अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके ने 234 में से 107 सीटों पर पहली ही बार चुनाव लड़ जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। विजय ने एक साल पूर्व ही नई पार्टी बनाई थी और ये करिश्मा कर दिया। अब तमिलनाडु में 64 साल बाद गैर द्रविड़ पार्टी की सरकार व सीएम होने जा रहा है। विजय को उनके प्रशंसकों के बीच थलापति कहा जाता है, यानी सेनापति।
विजय ने भी अपने उपनाम को सार्थक करते हुए अकेले ही अपनी सेना को विजय दिला दी। असम में भाजपा ने भारी बहुमत के साथ जीत की हैट्रिक लगाई। पुड्डुचेरी में भी एनडीए ने भी दूसरी बार सत्ता कायम रखी। विपक्ष की सबसे पार्टी कांग्रेस को एकमात्र राहत केरलम से मिली। यहां 10 साल बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ की सत्ता में वापसी हुई।
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