निगम कर्मचारी ने कलेक्टर से लगाई इच्छा-मृत्यु की गुहार: भाजपा पार्षद पर गाली-गलौज और दबाव का लगाया आरोप
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम के एक कर्मचारी ने कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी के समक्ष जनसुनवाई में आवेदन देकर इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है। आवेदन दिनांक 24 फरवरी 2026 को प्रस्तुत किया गया है।
मानसिक पीड़ा से गुजर रहा परिवार
प्रार्थी ने आरोप लगाया है कि गाली-गलौज का ऑडियो वायरल किए जाने, नौकरी से हटाए जाने और सामाजिक बदनामी के कारण वह और उसका परिवार गंभीर मानसिक पीड़ा से गुजर रहा है।
दरोगा पद पर कार्यरत रहे हैं पीड़ित
आवेदन के अनुसार, यतीन्द्र यादव पिता प्रेमचंद्र यादव, निवासी 1128 भागीरथपुरा नई बस्ती, इंदौर, पिछले 15 वर्षों से नगर निगम में दरोगा पद पर कार्यरत रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि इस अवधि में उनके खिलाफ न तो कोई विभागीय प्रतिकूल टिप्पणी हुई और न ही कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज हुआ।
स्वयं को कानून-प्रिय और ईमानदार कर्मचारी बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा नियमों के तहत अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया।
नोटिस चस्पा करने को लेकर विवाद
प्रार्थी के अनुसार, 23 दिसंबर 2024 को जोन क्रमांक 12 के वरिष्ठ भवन अधिकारी के आदेश पर वे 34-डी, खातीवाला टैंक स्थित एक निर्माणाधीन मकान पर स्वीकृत मानचित्र से अधिक निर्माण के संबंध में सूचना पत्र (क्रमांक 1607/2024, दिनांक 20 दिसंबर 2024) तामील कराने गए थे।
वहां मौजूद कर्मचारियों द्वारा नोटिस लेने से इनकार करने पर उन्होंने नियमानुसार नोटिस चस्पा करने का प्रयास किया। आरोप है कि इस दौरान संबंधित पक्ष द्वारा स्थानीय भाजपा पार्षद कमलेश कालरा से फोन पर बात करवाई गई।
प्रार्थी का कहना है कि भाजपा पार्षद ने उन्हें नोटिस वापस ले जाने का दबाव बनाया और कहा कि उनकी वरिष्ठ अधिकारी से बात हो चुकी है।
हालांकि, प्रार्थी के अनुसार जब उन्होंने वरिष्ठ भवन अधिकारी से पुष्टि की तो बताया गया कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई और उन्हें नियमानुसार नोटिस चस्पा करने के निर्देश दिए गए।
फोन कॉल पर गाली-गलौज और धमकी का आरोप
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद भाजपा पार्षद द्वारा बार-बार फोन किया गया और मिलने का दबाव बनाया गया। बाद में एक कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी भी जुड़े थे, पार्षद ने उन्हें मां-बहन की गालियां दीं और नौकरी से हटवाने की धमकी दी।
प्रार्थी का कहना है कि संबंधित बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया, जिससे उनकी बदनामी हुई। उनका आरोप है कि इसके दबाव में उन्हें नौकरी से हटा दिया गया।
अपमान का सामना करना पड़ा
यतीन्द्र यादव ने आवेदन में लिखा है कि उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं। घटना के बाद से परिवार सामाजिक तानों और मानसिक आघात से गुजर रहा है। उनके पिता दर्जी का काम करते हैं और उन्हें भी समाज में अपमान का सामना करना पड़ा।
प्रार्थी का कहना है कि पिछले एक वर्ष से वे और उनका परिवार सदमे में हैं। आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हुई है और वे परिवार का भरण-पोषण करने में असमर्थ हो रहे हैं।
न्याय न मिलने का आरोप, इच्छा मृत्यु की मांग
आवेदन में उन्होंने लिखा है कि एक वर्ष से न्याय की उम्मीद में मानसिक वेदना सह रहे हैं, लेकिन न तो नौकरी वापस मिली और न ही राहत। स्वयं को स्वाभिमानी नागरिक बताते हुए उन्होंने कहा कि आत्महत्या जैसा कदम उठाकर परिवार को और बदनाम नहीं करना चाहते, इसलिए विधि अनुसार इच्छा मृत्यु की अनुमति चाहते हैं।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि आवेदन वे अपनी स्वेच्छा से दे रहे हैं और इस पर किसी का दबाव नहीं है। पीड़ित गले में तख्ती तान कलेक्टर से मिलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने लगे से तख्ती निकाल कर बाहर कर दिया।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा
फिलहाल इस आवेदन पर प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामला जनसुनवाई में प्रस्तुत होने के बाद आगे की कार्रवाई कलेक्टर स्तर पर तय की जाएगी।
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