बेटे को जेल से छुड़ाने चली मां कानून के शिकंजे में उलझी: नकबजनी के आरोपी को फर्जी जमानतदार पेश करवाकर छुड़वाना महंगा पड़ा; दर्ज हुआ मुकदमा
KHULASA FIRST
संवाददाता

प्रोटेस्ट पिटीशन पर कोर्ट ने जारी किया था फरमान
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नकबजनी के आरोपी को फर्जी जमानतदार पेश करवाकर जेल से छुड़वाना मां को महंगा पड़ा। अदालत के आदेश पर पुलिस ने मां पर क्रिमिनल केस दर्ज कर लिया है। अब मां को खुद की जमानत कराना पड़ेगी, जबकि बेटा पहले से जेल के अंदर है।
जानकारी के अनुसार, गत वर्ष छोटी ग्वालटोली थाने में दर्ज नकबजनी व चोरी के केस में संदीप उर्फ काला पिता राजू अंबौरे करीब ढ़ाई साल से जेल में बंद रहा था। इस दौरान उसकी मां कमलाबाई पति राजू अंबौरे निवासी फ्लैट नंबर 301, आई ब्लॉक, गोम्मटगिरी, गांधीनगर ने बेटे संदीप को जेल से छुड़ाने के लिए साजिश रची और फर्जी जमानतदार चंदन
शर्मा (45 वर्ष) निवासी बामन मोहल्ला, सिरपुर इंदौर को सांवेर तहसील के किसान चंदनसिंह पिता हीरासिंह का रूप धारण कर 30 जून 2025 को कोर्ट में मजिस्ट्रेट के समक्ष खड़ा करवा दिया, जहां चंदन शर्मा ने खुद को चंदनसिंह बताते हुए जाली पहचान पत्र पेश करके आरोपी संदीप की जमानत दी और उसे जेल से रिहा करवा दिया था।
इसकी जानकारी किसान को लगी तो वह दंग रहा गया। उसने एडवोकेट राजेंद्र कचोलिया के जरिये रेलवे के स्पेशल मजिस्ट्रेट कोर्ट में फर्जी जमानतदार व उसके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए नौ जुलाई 2025 को आवेदन दिया था, जिस पर अदालत ने पुलिस से जांच रिपोर्ट तलब की थी।
इसी वर्ष 18 मार्च को पुलिस ने रिपोर्ट पेश कर बताया कि चंदन शर्मा 12 दिन पहले यानी छह मार्च को ही मर चुका है, उसके द्वारा ही चंदनसिंह के नाम के जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर जमानत दी गई थी, चूंकि वो मर चुका है इसलिए चंदन शर्मा पर क्रिमिनल कार्रवाई नही की जा सकती है।
पुलिस जांच रिपोर्ट के खिलाफ किसान की ओर से एडवोकेट राजेंद्र कचोलिया ने कोर्ट में यह कहकर विस्तृत प्रोटेस्ट पिटीशन दायर की थी कि पुलिस जांच में प्रकरण में फर्जी जमानत होना स्पष्ट रूप से प्रमाणित है। चंदन शर्मा खुद कोर्ट में नहीं आया था बल्कि उसे आरोपी की मां कमलाबाई व अन्य लोगों द्वारा लाया गया था।
आधा दर्जन क्रिमिनल केस दर्ज... गौरतलब है कि आरोपी संदीप ने इसी साल रावजी बाजार थाने में भी नकबजनी की वारदात की थी जिसमें वह अभी सेंट्रल जेल में बंद है। उस पर करीब आधा दर्जन क्रिमिनल केस दर्ज है।
नए कानून में सजा की मियाद भी ज्यादा... न्यायालय के अभिलेखों पर कमलाबाई के खिलाफ पर्याप्त सबूत है। जमानतनामा में गवाह के रूप में कमलाबाई के अंगूठे के निशान हैं। शपथ पत्र पर भी पहचानकर्ता के रूप में कमलाबाई के अंगूठे के निशान हैं।
हालांकि, कमलाबाई ने पुलिस को दिए बयान में अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना चाहा था, किंतु वह कानून के शिकंजे से बच नहीं सकी। बेटे की जमानत कराने के लिए जुर्म करनेवाली कमलाबाई को अब एफआईआर दर्ज होने के बाद खुद की जमानत कराने की नौबत आ गई है और जुर्म साबित होने पर कठोर सजा भी संभव है क्योंकि नए कानून (बीएनएस) की धारा 319 (प्रतिरूपण द्वारा छल) में 5 साल तक की कठोर सजा व जुर्माने का प्रावधान है, जबकि पुराने कानून (आईपीसी) में पहले तीन साल तक की ही सजा का प्रावधान था। कमलाबाई के खिलाफ पूरा मामला उन्हीं दस्तावेजी सबूतों पर टिका है, जो कोर्ट के रिकार्ड का अंग है।
प्रतिरूपण द्वारा छल का केस होगा दर्ज
संबंधित पक्षों को सुनने के बाद स्पेशल न्यायिक मजिस्ट्रेट नदीम जावेद खान ने पाया कि मामले में कोर्ट में जमानतदार चंदन शर्मा की चंदनसिंह के रूप में कमलाबाई ने पहचान की थी और शपथ पत्र भी पेश किया गया था।
चूंकि घटनास्थल जिला कोर्ट परिसर था, जो कि एमजी रोड थाने के अंर्तगत आता है, ऐसे में उन्होंने एमजी रोड पुलिस को आदेश दिए थे कि वह कमलाबाई के खिलाफ बीएनएस की धारा 319 (प्रतिरूपण द्वारा छल) का केस दर्ज करें।
इसके चलते अब पुलिस एमजी रोड ने कमलाबाई के खिलाफ फर्जी जमानतदार पेश करने के जुर्म में अपराध क्र. 248/2026 दर्ज कर लिया है। मुकदमा दर्ज करने की जानकारी एमजी रोड थाने के टीआई विजयसिंह सिसौदिया ने कोर्ट को दे दी है।
बेमौत मारा गया चंदन शर्मा.. हत्या या हादसा...जांच का विषय
फर्जी जमानतदार चंदन शर्मा बेमौत मारा गया है। पुलिस छोटी ग्वालटोली ने कोर्ट को बताया था कि जांच के दौरान पता चला कि आरोपी चंदन शर्मा की मौत हो चुकी है।
पुलिस द्वारा मामले में छत्रीपुरा थाने में दर्ज मर्ग क्रमांक 09/2026 के दस्तावेज भी पेश किये गए है, इन दस्तावेजों से पता चलता है कि फर्जी जमानतदार चंदन शर्मा का शव छत्रीपुरा थाना क्षेत्र में शासकीय नवीन मालव कन्या विद्यालय परिसर के बाहर पाया गया था।
अब देखा जाए तो चंदन शर्मा प्राकृतिक रूप से नहीं मरा है उसकी अप्राकृतिक मृत्यु (एक्सिडेंटल डेथ) हुई है। उसकी मौत कैसे और किन कारणों से हुई? वो हत्या थी या हादसा? उसकी मौत के पीछे कौन जिम्मेदार है? ये अभी अनसुलझे सवाल है, जो जांच का विषय है।
खास बात यह है कि चंदन शर्मा फिलहाल सिरपुर रहता था, जहां चंदननगर थाना लगता है, जबकि मर्ग छत्रीपुरा थाने में कायम हुआ है और पुलिस जांच करते हुए उसके घर चंद्रभागा, जूनी इंदौर स्थित घर पहुंची थी, जहां रिश्तेदारों ने चंदन शर्मा का फोटो देखकर उसे पहचाना। चंद्रभागा क्षेत्र जूनी इंदौर थाने में लगता है।
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