मोना मैडम ने कारोबारियों के घरों में घुसकर ठगे ढाई करोड़: 100 दिन में पैसा डबल करने का झांसा देकर व्यापारियों की पत्नियों को बनाया टारगेट
KHULASA FIRST
संवाददाता

फॉरेक्स-क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर चला हाईप्रोफाइल ठगी रैकेट, महिला एजेंट गिरफ्तार
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में फॉरेक्स और क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर हाईप्रोफाइल ठगी का बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी महिला एजेंट ने किटी पार्टियों को हथियार बनाकर कारोबारियों की पत्नियों और छोटे व्यापारियों को अपने जाल में फंसाया और 100 दिन में पैसा डबल करने का सपना दिखाकर करीब ढाई करोड़ रुपए ऐंठ लिए।
शुरुआत में ब्याज देकर भरोसा जीता गया, फिर करोड़ों समेटकर पूरा नेटवर्क गायब हो गया। खास बात यह कि मामले का खुलासा प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर सबसे पहले खुलासा फर्स्ट ने ही किया था।
25 से ज्यादा पीड़ितों ने की शिकायत
जानकारी के अनुसार, 25 से ज्यादा पीड़ितों की शिकायत के बाद कल क्राइम ब्रांच ने महिला एजेंट हरप्रीत कौर उर्फ मोना को गिरफ्तार कर लिया है।
जानकारी के अनुसार बिजलपुर निवासी जिया वाधवानी की शिकायत पर क्राइम ब्रांच ने विष्णुपुरी निवासी हरप्रीत कौर खनूजा उर्फ मोना, चंडीगढ़ के जसप्रीत उर्फ जस्सी, बेंगलुरु निवासी अनिरुद्ध दलवी, भोपाल के मुकेश तायड़े और जोसेफ समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है।
महज 100 दिन में रकम डबल करने का झांसा
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने छोटे व्यापारियों और कारोबारियों की पत्नियों को टारगेट बनाया। मोना आलीशान किटी पार्टियों में पहुंचती थी और महिलाओं को फॉरेक्स व क्रिप्टो ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर मोटे मुनाफे का लालच देती थी।
दावा किया जाता था कि निवेश पर प्रतिदिन 2 प्रतिशत ब्याज मिलेगा और महज 100 दिन में रकम डबल हो जाएगी। शुरुआत में कुछ लोगों को ब्याज देकर भरोसा जमाया गया, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग लालच में आकर रकम निवेश करें।
आरोपी कैश में पैसा लेने पर जोर देते थे। दस लाख रुपए से अधिक रकम होने पर ही बैंक ट्रांजेक्शन की बात कही जाती थी, ताकि पूरे खेल का रिकॉर्ड कम से कम रहे। खातीवाला टैंक के व्यापारी हनी राजपाल ने बताया कि उनसे और उनकी पत्नी से करीब 24 लाख रुपए निवेश करवा लिए गए।
उन्होंने बताया कि शहर में इतने लोगों को जोड़ा गया था कि कंपनी ने मोना को लग्जरी कार तक गिफ्ट की थी। जब लंबे समय तक पैसा वापस नहीं मिला तब ठगी का एहसास हुआ।
नौ माह से चल रही थी जांच
पीड़ितों ने 19 सितंबर 2025 को क्राइम ब्रांच में शिकायत दी थी। करीब 9 महीने तक चली जांच के दौरान पुलिस ने बैंकिंग रिकॉर्ड, निवेश से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल सबूत जुटाए। इसके बाद 16 मई को केस दर्ज किया गया।
कल टीआई तारेश सोनी की टीम ने हरप्रीत कौर के घर पर दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। जांच में यह भी सामने आया कि पूरे नेटवर्क को वैध दिखाने के लिए यूएस बेस्ड एक फर्जी कंपनी बनाई गई थी।
पीडि़तों का दावा है कि इंदौर में इस कंपनी को लॉन्च करने और लोगों को जोड़ने का काम मोना ही करती थी। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य स्थानीय चेहरों और करोड़ों रुपए के लेनदेन की जांच में जुटी है।
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