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कर्नल पर टिप्पणी मामले में मंत्री की मुश्किलें बढ़ी: सुप्रीम कोर्ट सख्त; कहा- बस बहुत हुआ, आदेश का पालन करें

KHULASA FIRST

संवाददाता

08 मई 2026, 6:01 pm
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कर्नल पर टिप्पणी मामले में मंत्री की मुश्किलें बढ़ी

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। भारतीय सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए विवादित बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है और राज्य सरकार को फटकार लगाई है।

यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अभियोजन स्वीकृति में देरी पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह “सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” है। पीठ ने साफ शब्दों में निर्देश दिया “बस बहुत हो गया, अब हमारे आदेश का पालन करें।”

अब तक फैसला लंबित
मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच में हुई। कोर्ट ने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) द्वारा भेजा गया प्रस्ताव दो सप्ताह पहले ही निपटा लिया जाना चाहिए था, लेकिन अब तक इस पर फैसला लंबित है।

कोर्ट ने लगाई फटकार
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंत्री का पक्ष रखते हुए कहा कि बयान को गलत समझा गया और वे अधिकारी की प्रशंसा करना चाहते थे। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि एक जनप्रतिनिधि को यह भलीभांति पता होना चाहिए कि किसी महिला अधिकारी की सराहना कैसे की जाती है।

पहले माफी आनी चाहिए थी
कोर्ट ने SIT की रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह भी कहा कि मंत्री को इस तरह के बयान देने की “आदत” रही है, जो चिंताजनक है। साथ ही कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की है कि इस तरह के मामले में पहले माफी आनी चाहिए थी।

मंत्री विजय शाह का बयान
पिछले साल भारत के द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर के बाद कर्नल सोफिया कुरैशी ने इस ऑपरेशन की मीडिया ब्रीफिंग की थी। इस के बाद मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के महू में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने कहा था- 'जिन्होंने हमारी बेटियों को विधवा किया, हमने उन्हें सबक सिखाने के लिए उनकी ही एक बहन को भेजा।'

मंत्री विजय शाह के इस बयान को कर्नल कुरैशी के धर्म से जोड़कर देखा गया और हर तरफ इसकी निंदा हुई थी। यहां ये भी बता दें कि मंत्री विजय शाह इससे पहले भी विवादित और आपत्तिजनक बयान दे चुके हैं।

देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले को चार सप्ताह बाद फिर से सूचीबद्ध किया है और राज्य सरकार को स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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