‘बेरहम’ वर्मा नर्सिंग होम: भागीरथपुरा का नाम सुनते ही गंभीर बीमार दंपति को धक्के मारकर भगाया
KHULASA FIRST
संवाददाता
सीएमएचओ के आदेश का बहाना बनाया
चंचल भारतीय 98936-44317 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
परदेशीपुरा स्थित वर्मा नर्सिंग होम में चिकित्सा जैसे पवित्र पेशे को कलंकित करने वाली घिनौनी करतूत सामने आई है। भागीरथपुरा में जन्मदिन के भोज से बीमार गंभीर बीमार दंपति संतोष मोकसुकिया और उनकी पत्नी ममता को सोमवार शाम उनके परिजन इलाज की आस में इस अस्पताल लाए थे, लेकिन डॉक्टर की संवेदनहीनता ने उन्हें बीच सड़क पर बेसहारा छोड़ दिया।
पहले डॉ. दीपिका वर्मा ने मरीजों की हालत देखकर उन्हें भर्ती करने के लिए फाइल बनवाने और पैसे जमा करने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन जैसे ही भागीरथपुरा इलाके का नाम सामने आया करीब एक घंटे तक मरणासन्न अवस्था में पड़े दंपति को रिसेप्शन पर कुर्सी पर लावारिसों की तरह बैठाकर तमाशा देखते रहे।
उसके बाद उन्हें बिना इलाज के धक्के मारकर बाहर का रास्ता दिखा दिया।डॉ. दीपिका वर्मा और उनके बेटे अथर्व वर्मा की इस बदसलूकी ने चिकित्सा जगत के माथे पर कलंक लगा दिया है। परिजन के बार-बार मिन्नतें करने और इलाज के लिए मुंह मांगे पैसे देने की बात कहने के बावजूद अथर्व वर्मा अपनी जिद पर अड़ा रहा और मरीजों को एमवाय या अरबिंदो ले जाने को कहा।
परिजन ने जब अपनी बेबसी जाहिर करते हुए लिखित में कारण मांगा कि आखिर इलाज क्यों नहीं किया जा रहा तो डॉक्टर और उनके बेटे ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार करते हुए उन्हें दुत्कार दिया।
अस्पताल के बाहर आक्रोश जताया
गुस्साए परिजन और महिलाओं ने अस्पताल के बाहर आक्रोश जताया और साफ शब्दों में कहा कि यदि डॉक्टर मरीजों के साथ ऐसा खिलवाड़ करते हैं तो ऐसे सफेदपोश लुटेरों की दुकानों पर तुरंत सरकारी ताला लग जाना चाहिए। सवाल यह है कि क्या कोई डॉक्टर किसी मरीज का इलाज उसके रहने के स्थान से होने वाली नफरत के आधार पर तय करेगा? जिस मरणासन्न अवस्था में पति-पत्नी को बिना इलाज के अस्पताल से भगाया गया, वह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि सीधे तौर पर उनकी जान के साथ किया गया जानलेवा षड्यंत्र है।
वर्मा नर्सिंग होम में झोलाछाप स्टाफ के भरोसे इलाज
परदेसीपुरा स्थित वर्मा नर्सिंग होम इन दिनों गंभीर अनियमितताओं का केंद्र बना हुआ है। प्रबंधन पर आरोप है कि यहां बिना डिग्री वाले नॉन-क्वालिफाइड स्टाफ को महज नाम मात्र के वेतन पर रखकर मरीजों का उपचार कराया जा रहा है। यह अकुशल कर्मचारी धड़ल्ले से इंजेक्शन और दवाइयां लिख रहे हैं, जबकि मुख्य संचालक डॉ. अभ्युदय वर्मा खुद मौजूद रहने के बजाय फोन पर निर्देश देकर इलाज की औपचारिकता पूरी करवा रहे हैं। चिकित्सा मानकों की इस खुली अनदेखी के बावजूद प्रशासन की चुप्पी ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
नियमों की उड़ा रहे धज्जियां
अस्पताल की लापरवाही यहीं खत्म नहीं होती, यहां पार्किंग की कोई व्यवस्था न होने के कारण मरीजों के वाहन सड़कों पर खड़े कराए जाते हैं, जिससे परदेसी पुरा की व्यस्त सड़कों पर घंटों जाम लगा रहता है। बार-बार शिकायतों के बाद भी नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने अब तक कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया है। अस्पताल में फायर सेफ्टी और बायो मेडिकल वेस्ट के नियमों की भी जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि इस नर्सिंग होम की तत्काल जांच कर इसे सील किया जाए।
सरकारी ऑर्डर का उल्लंघन कैसे कर सकते हैं?...
सीएमएचओ से साफ ऑर्डर है कि भागीरथपुरा के दूषित पानी वाले मरीजों को सीधे अरबिंदो या एमवाय रैफर करना है। जब नि:शुल्क इलाज करना था, हमने किया, लेकिन हमारा मैनेजमेंट के तौर पर हम कितनी बार ऐसी सिचुएशन झेलें? मरीज खुद पैसे जमा करता है और फिर शिकायत कर देता है कि हमसे पैसे मांगे जा रहे हैं, फिर हमें ही पैसे वापस करने पड़ते हैं।
हमें सीएमएचओ से ओर ऑफिशियल व्हाट्स एप ग्रुप पर मैसेज मिल चुका है कि भागीरथपुरा के दूषित पानी से बीमार मरीजों का निश्शुल्क इलाज यहां नहीं करना है, बल्कि इन्हें एमवाय या अरबिंदो ही रैफर करने के निर्देश हैं। हम सरकारी ऑर्डर का उल्लंघन कैसे कर सकते हैं?
मरीज को एक-डेढ़ घंटा बैठाने की बात गलत है, मात्र आधे घंटे में यह सब हुआ है। रही बात 5000 रुपए की तो अगर जमा किए हैं तो वापस लौटा देंगे, मरीज अपने मन से कुछ भी बोल रहा है। हमने ऑर्डर के मुताबिक ही दोनों मरीजों को बिना इलाज के रैफर किया है।अथर्व वर्मा, मैनेजमेंट प्रभारी, वर्मा नर्सिंग होम, परदेसीपुरा इंदौर
अस्पताल पर कड़ी कार्रवाई होना चाहिए...
वर्मा नर्सिंग होम परदेसीपुरा में डॉ. दीपिका वर्मा और उनके बेटे ने मरीजों के साथ जो किया वह सरासर अन्याय है। उन्होंने पहले दोनों मरीजों को भर्ती करने का बोला, लेकिन जैसे ही भागीरथपुरा का नाम सुना उन्होंने और उनके बेटे ने बिना इलाज किए ही कह दिया कि हम तुम्हारा इलाज नहीं करेंगे।
जब हम इलाज के पैसे देने को तैयार हैं, उसके बाद भी सिर्फ पते के नाम पर मना करना गलत है। अगर यहां ऐसा ही होना है तो अस्पताल का बोर्ड हटा दो और ताला लगा दो, ताकि कोई दूसरा यहां आकर परेशान न हो। मरीजों के साथ हुए इस व्यवहार के लिए अस्पताल पर तुरंत कड़ी कार्रवाई होना चाहिए। नादान बाई गोंदिया, भागीरथपुरा, इंदौर
पैसे लेने के बाद भी इलाज नहीं किया...
अस्पताल में भर्ती करने के कागज भी बनवा लिए, पैसे भी जमा करवा लिए, लेकिन मरीजों का इलाज नहीं किया। हमारे मरीजों से खड़े होते भी नहीं बन रहा था। डॉक्टर मेडम और उनका बेटा कह रहा है एमवाय या अरबिंदो अस्पताल लेकर जाओ इलाज करवाने, हमसे पैसे लेने के बाद भी इलाज नहीं किया। इस अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए, इसे बंद करा देना चाहिए। लक्ष्मीबाई भागीरथपुरा, इंदौर
इलाज के नाम पर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़...
वर्मा नर्सिंग होम में पैसे जमा करवा लिए, लेकिन इलाज नहीं किया, हमारे दोनों मरीजों की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी। वर्मा नर्सिंग होम में हर बार इलाज के नाम पर सिर्फ मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जाता है। एक-डेढ़ घंटे तक मरीजों को बेंच पर बैठाकर रखा, सिर्फ कागजों और फाइलों के नाम पर उलझाए रखा और अंत में साफ मना कर दिया कि इलाज नहीं करेंगे।
अगर हमारे मरीज को कुछ हो गया या उसकी जान गई तो इसकी पूरी जिम्मेदारी अस्पताल की होगी। उनके छोटे-छोटे मासूम बच्चे हैं, उनका क्या होगा? इस अस्पताल पर तुरंत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और ऐसे अस्पताल पर तो ताला ही लग जाना चाहिए। पिंकी गुदिया, भागीरथपुरा
अस्पताल परिसर में कोई विवाद नहीं हुआ है...
भागीरथपुरा दूषित जल कांड के संबंध में हमें मरीजों के उपचार के लिए प्रशासन की ओर से सख्त निर्देश मिले हैं। स्पष्ट आदेश हैं कि इस प्रकरण का कोई भी मरीज आने पर उसे तत्काल एमवाय या अरबिंदो अस्पताल रैफर किया जाए। हमारे यहां जो दो मरीज आए वे गंभीर अवस्था में नहीं थे और उनका ब्लड प्रेशर आदि सभी स्वास्थ्य मानक पूरी तरह सामान्य थे, जिसके बाद उन्हें एमवाय, अरबिंदो अस्पताल भेज दिया है। अस्पताल परिसर में मरीज के परिजन द्वारा किसी भी प्रकार का कोई विरोध या विवाद नहीं किया गया है। डॉ. दीपिका वर्मा, स्त्री रोग विशेषज्ञ, वर्मा नर्सिंग होम परदेसीपुरा, इंदौर
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