नेपाल-तिब्बत सीमा पर भारी तबाही: अचानक आई बाढ़ में 178 लोगों की मौत; 1400 से ज्यादा लापता, 300 से अधिक भारतीयों के भी गायब होने की खबर
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, काठमांडू।
नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में बुधवार सुबह आई अचानक बाढ़ और बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी। हादसे में नेपाल और तिब्बत में अब तक 178 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि 1,400 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल खराब मौसम और क्षतिग्रस्त रास्तों के बीच मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटे हैं।
165 लोगों की मौत
नेपाल में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। यहां 165 लोगों की मौत हुई है, जबकि 826 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक, लापता लोगों में 300 से ज्यादा भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
वहीं, चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। सरकारी वेबसाइट CCTV के अनुसार, वहां 550 से ज्यादा लोगों का अभी तक सुराग नहीं मिला है।
सेना ने 116 लोगों को सुरक्षित निकाला
हादसे के बाद नेपाली सेना और अन्य राहत एजेंसियों ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है। रास्ते टूटने और मौसम खराब होने के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। इसके बावजूद नेपाली सेना ने रसुवा के टिमुरे इलाके से बुधवार सुबह 116 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इनमें 95 नेपाली नागरिक और 21 भारतीय नागरिक शामिल हैं।
भूकंप नहीं, लैंडस्लाइड से आया 5.2 तीव्रता जैसा झटका
बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे नेपाल-चीन सीमा के पास जोरदार झटके महसूस किए गए। शुरुआत में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया था। बाद की जांच में सामने आया कि यह झटका भूकंप के कारण नहीं, बल्कि पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में गिरने से पैदा हुआ था।
बताया गया कि बर्फ और चट्टानों से भरा पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा ल्हेंदे खोला नदी में गिर गया। यह नदी आगे भोटेकोशी नदी में मिलती है। भारी मलबे के नदी में गिरने से अचानक बाढ़ जैसे हालात बने और आसपास के इलाकों में तबाही मच गई।
भूकंप जैसा कंपन महसूस हुआ
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस घटना में ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने के साथ भारी भूस्खलन हुआ हो सकता है। लैंडस्लाइड इतना शक्तिशाली था कि जमीन में 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा कंपन महसूस हुआ।
बाद में USGS ने भी स्पष्ट किया कि शुरुआती झटके का कारण भूकंप नहीं था। पहाड़ से बड़े पैमाने पर हुए लैंडस्लाइड ने ही जमीन में भूकंप जैसा कंपन पैदा किया था। फिलहाल बचाव अभियान जारी है और लापता लोगों की संख्या को देखते हुए मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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