मंडी चौराहा पर वर्दी वाला बना गुंडा: मेरे पास 200 बीघा जमीन है; तुझे पुलिस की पॉवर बताता हूं
KHULASA FIRST
संवाददाता

राजेंद्र नगर थाने के जवान राहुल पर गंभीर आरोप; गला दबाया, अंगूठा तोड़ा, एफआईआर तक नहीं
रांग साइड आ रहे पुलिसकर्मी को टोकना पड़ गया भारी
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में पुलिस की कथित गुंडागर्दी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के मंडी चौराहा स्थित पानी की टंकी के पास रांग साइड आ रहे एक पुलिसकर्मी का विरोध करने वाले युवक को थाने ले जाकर बेरहमी से पीटने के आरोप लगे हैं। पीड़ित युवक के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान हैं, लेकिन अब तक उसकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
जानकारी के अनुसार राजू भालेराव (29) अपने चार पहिया वाहन से मंडी चौराहा स्थित पानी की टंकी के पास से गुजर रहा था। इसी दौरान सामने से राजेंद्र नगर थाने में पदस्थ पुलिसकर्मी राहुल कथित रूप से रांग साइड वाहन चलाते हुए आया।
जब राजू ने शांत तरीके से कहा कि सर, आप रांग साइड चल रहे हैं, मैं अपनी लाइन में हूं। इस पर पुलिसकर्मी आगबबूला हो गया। आरोप है कि वर्दी के रौब में पुलिसकर्मी राहुल ने सड़क पर ही युवक को धमकाना शुरू कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक उसने कहा कि मेरे पास 200 बीघा जमीन है, नौकरी छोड़कर ग्वालियर चला जाऊंगा… तुझे पुलिस की पॉवर बताता हूं। इसके बाद बिना किसी अपराध या कानूनी कारण के युवक को जबरन राजेंद्र नगर थाने ले जाया गया।
पीड़ित का आरोप है कि थाने में उसे बुरी तरह पीटा गया, जिससे उसके कंधों और पीठ पर गंभीर चोटें आईं। इतना ही नहीं, करीब पांच मिनट तक उसका गला दबाया गया, जिससे उसकी सांस रुकने लगी थी।
मारपीट के दौरान उसका अंगूठा भी तोड़ दिया। परिजन का कहना है कि युवक के शरीर पर चोटों के निशान साफ दिख रहे हैं और उसकी हालत बेहद खराब है। जब परिजन शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे तो वहां कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हुआ।
थाना प्रभारी के उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर टाल दिया गया। कल रात 9 बजे थाना प्रभारी यशवंत बडोले आए और परिजन से कहा कि उसका मेडिकल कराते हैं।
इसके बाद जब परिजन ने मेडिकल रिपोर्ट मांगी तो टीआई का कहना था कि मेडिकल में कुछ नहीं आया। पीड़ित परिजन का आरोप है कि पुलिस अपने कर्मचारी को बचाने में जुटी है और फरियादी की एफआईआर तक दर्ज नहीं की जा रही।
मामले में जब थाना प्रभारी यशवंत बड़ोले से उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। इस तरह की हरकत को लेकर पीड़ित के परिजनों में आक्रोश दिखाई दे रहा है।
जब पुलिस खुद नियम तोड़े तो कानून व्यवस्था कैसी?
पीड़ित युवक के परिजन का कहना है कि यदि ट्रैफिक नियम की बात करने पर आम नागरिक को थाने में बंद कर पीटा जाएगा, तो फिर कानून व्यवस्था का क्या मतलब रह जाएगा? उन्होंने पुलिस कमिश्नर और वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
मामला दबाने के लिए बनाया जा रहा दबाव
पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस प्रशासन वर्दी की आड़ में खुलेआम दबाव बना रहा है। अब मेडिकल रिपोर्ट और चोटों के फोटो के साथ उच्च अधिकारियों से शिकायत करेंगे।
साथ ही मामला मानवाधिकार आयोग तक ले जाने की बात भी पीड़ित परिजन ने कही। यह घटना केवल एक युवक की पिटाई का मामला नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
लोग पूछ रहे हैं कि आम नागरिक न्याय के लिए जाए तो जाए कहां?
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