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राज्यपाल को इस्तीफा देने नहीं जाएंगी ममता बनर्जी: मीडिया से कहा-हारे नहीं, हराया गया; मेरे पेट और पीठ पर लात मारी, धक्का देकर बाहर निकाला

KHULASA FIRST

संवाददाता

05 मई 2026, 4:59 pm
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राज्यपाल को इस्तीफा देने नहीं जाएंगी ममता बनर्जी

खुलासा फर्स्ट, कोलकाता।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के एक दिन बाद मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया कि वह इस्तीफा देने के लिए राजभवन नहीं जाएंगी। उन्होंने प्रेस वार्ता में कहा कि यह हार नहीं है उन्हें हराया गया है।

ममता ने भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि काउंटिंग केंद्रों तक पर कब्जा कर लिया गया। उनके शब्द तीखे थे - मेरे पेट और पीठ पर लात मारी, धक्का देकर बाहर निकाला। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विशेष सारांश पुनरीक्षण के बहाने तृणमूल कांग्रेस की 100 सीटें लूटी गईं।

बंगाल में भाजपा का ऐतिहासिक बहुमत
चुनाव नतीजों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को पूरी तरह पलट दिया। 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर राज्य में पहली बार अपनी सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त कर लिया। तृणमूल कांग्रेस मात्र 80 सीटों पर सिमट गई। 15 साल बाद ममता बनर्जी के हाथ से सत्ता चली गई। भवानीपुर सीट पर भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने स्वयं ममता बनर्जी को पराजित किया। यह हार ममता के लिए व्यक्तिगत रूप से सबसे बड़ा झटका रही।

पाँच राज्यों के नतीजे: विपक्ष को चौतरफा झटका
सोमवार को आए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों ने भाजपा विरोधी राजनीति के प्रमुख केंद्रों को हिला दिया। असम में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाई। मुख्यमंत्री हिमंता विश्वशर्मा ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ जीत का जश्न मनाया।

तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री ने 107 सीटें जीतकर चौंकाया। विजय स्वयं दोनों सीटों पर विजयी रहे। एमके स्टालिन की द्रविड़ मुनेत्र को बड़ा झटका लगा। केरल में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। पार्टी नेता वी.डी. सतीशन के नेतृत्व में कांग्रेस ने वाम मोर्चे को सत्ता से बाहर किया। यह जीत विपक्ष के लिए एकमात्र राहत की खबर रही। पुडुचेरी में भी भाजपा गठबंधन का परचम लहराया।

78 प्रतिशत आबादी पर भाजपा का राज
इन नतीजों के बाद देश की 78 प्रतिशत आबादी और 72 प्रतिशत भूभाग पर भाजपा और उसके सहयोगी दलों का शासन हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह नतीजे विपक्षी इंडिया गठबंधन के लिए बेहद चिंताजनक हैं। बंगाल की 42 और तमिलनाडु की 39 यानी कुल 81 लोकसभा सीटों पर प्रभाव रखने वाले ये दोनों राज्य अब भाजपा के पक्ष में झुक गए हैं। ममता बनर्जी और एमके स्टालिन जो भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर चुनौती देने वाले सबसे मुखर चेहरे थे दोनों कमजोर पड़ गए हैं।

केरल में कांग्रेस की जीत विपक्ष को राहत जरूर देती है, लेकिन इससे गठबंधन के भीतर नेतृत्व को लेकर नई खींचतान भी शुरू हो सकती है। जानकारों का कहना है कि अब विपक्ष की लड़ाई सत्ता पाने की नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रासंगिकता बचाने की हो गई है।

आगे क्या होंगे संवैधानिक विकल्प?
ममता बनर्जी द्वारा चुनाव नतीजों के बाद इस्तीफा देने से इनकार और चुनाव आयोग पर धांधली के आरोप लगाने से पश्चिम बंगाल में संभावित संवैधानिक गतिरोध की स्थिति बन सकती है। ऐसे हालात में आगे क्या विकल्प हो सकते हैं, इसे समझना जरूरी है।

राज्यपाल इस स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक प्राधिकारी होते हैं। वे मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांग सकते हैं या फिर विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए विशेष सत्र बुलाने का निर्देश दे सकते हैं। यदि सरकार के पास बहुमत है, तो वह बनी रह सकती है; अन्यथा संकट गहरा सकता है।

भारतीय संसदीय परंपरा के तहत असली परीक्षा विधानसभा के फ्लोर पर होती है। यदि मुख्यमंत्री के बहुमत पर सवाल उठता है, तो उन्हें सदन में विश्वास मत हासिल करना होगा। बहुमत साबित न कर पाने की स्थिति में सरकार स्वतः गिर जाती है। नई विधानसभा के गठन के बाद विपक्ष भारतीय जनता पार्टी या अन्य दल अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं। यदि यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो मुख्यमंत्री को पद छोड़ना ही पड़ेगा।

यदि स्थिति पूरी तरह संवैधानिक संकट में बदल जाती है जैसे कि मुख्यमंत्री न इस्तीफा दें, न बहुमत साबित करें तो राज्यपाल रिपोर्ट भेजकर भारत के राष्ट्रपति को राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश कर सकते हैं। हालांकि यह कदम अंतिम विकल्प माना जाता है। ऐसे विवाद अक्सर अदालत तक पहुंचते हैं। सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर निर्देश दे सकते हैं जैसे कि फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश ताकि स्थिति का समाधान हो सके।

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