बिना प्रमाण गंभीर आरोप लगाना चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास: पूर्व बोर्ड सदस्य हरपाल सिंह भाटिया ‘मोनू’ ने आरोपों पर जताई आपत्ति
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
डेली कॉलेज के पूर्व बोर्ड सदस्य हरपाल सिंह भाटिया ‘मोनू’ ने न्यू डोनर श्रेणी के प्रत्याशी राजेश अग्रवाल द्वारा मीडिया में जारी बयान पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि बिना किसी प्रमाण के ‘बैलेट पेपर चोरी’, ‘असंवैधानिक कार्यवाही’ और चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे स्पष्ट रूप से चुनावी माहौल को प्रभावित करने का प्रयास दिखाई देता है।
भाटिया ने कहा कि यदि अग्रवाल के पास वास्तव में किसी प्रकार के ठोस प्रमाण हैं, तो उन्हें मीडिया के माध्यम से आरोप लगाने के बजाय तत्काल संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज करानी चाहिए। केवल प्रेस नोट जारी कर आरोप लगाना और बिना किसी वैधानिक शिकायत के सार्वजनिक रूप से भ्रम फैलाना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
बैलेट पेपर पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में पोस्ट ऑफिस तक पहुंचाए...उन्होंने स्पष्ट किया कि बैलेट पेपर पूरी प्रक्रिया के तहत नियुक्त चुनाव अधिकारी, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की निगरानी में पोस्ट ऑफिस तक पहुंचाए गए।
इतना ही नहीं, कई प्रत्याशी स्वयं अथवा उनके प्रतिनिधि भी इस प्रक्रिया के दौरान उपस्थित थे और पोस्ट ऑफिस तक जाकर यह सुनिश्चित किया गया कि बैलेट सुरक्षित रूप से भेजे जाएं। ऐसे में बाद में इस प्रकार के आरोप लगाना तथ्यों से परे और भ्रामक प्रतीत होता है।
अनावश्यक विवाद खड़ा करने की कोशिश... भाटिया ने कहा कि अब यह स्पष्ट दिखाई देने लगा है कि चुनावी स्थिति अपने पक्ष में न जाती देख कुछ लोग माहौल को प्रभावित करने, भ्रम फैलाने और अनावश्यक विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हार-जीत स्वाभाविक है, लेकिन संस्था की गरिमा को दांव पर लगाकर चुनावी नेरेटिव को मोड़ने का प्रयास किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता।
155 वर्ष पुरानी प्रतिष्ठित संस्था को विवादों और आरोपों में घसीटना दुर्भाग्यपूर्ण... उन्होंने यह भी कहा कि डेली कॉलेज जैसी 155 वर्ष पुरानी प्रतिष्ठित संस्था को लगातार विवादों और निराधार आरोपों में घसीटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित नियमों और चुनाव अधिकारी की देखरेख में संचालित हो रही है और ऐसे में बिना प्रमाण के लगाए जा रहे आरोप केवल अनावश्यक भ्रम और अस्थिरता पैदा करने का प्रयास हैं।
भाटिया ने सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि चुनाव जैसे संवेदनशील विषय पर केवल तथ्यात्मक और प्रमाण आधारित बातें ही सार्वजनिक रूप से रखी जाएं, ताकि संस्था की गरिमा और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।
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