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हनीट्रैप पार्ट-2 मामले में बड़ा खुलासा: इस ऐप से रईसों को जाल में फंसाती थी रेशू; करीबी के शामिल होने की आशंका

KHULASA FIRST

संवाददाता

28 मई 2026, 1:33 pm
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हनीट्रैप पार्ट-2 मामले में बड़ा खुलासा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश के चर्चित हनीट्रैप पार्ट-2 मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। इस केस में गिरफ्तार सभी सात आरोपी फिलहाल जेल में हैं, जिनमें मुख्य आरोपी रेशू चौधरी, हनी ट्रैप पार्ट-1 की आरोपी श्वेता विजय जैन, लेडी शराब तस्कर अलका दीक्षित, उसका बेटा जयदीप, लाखन चौधरी, जितेंद्र पुरोहित और हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा शामिल हैं।

सात मोबाइल फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे
क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के सात मोबाइल जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे हैं। जांच में सामने आया है कि रेशू चौधरी सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स पर “डॉल्फिन” नाम से फर्जी पहचान बनाकर अमीर और रसूखदार लोगों को अपने जाल में फंसाती थी।

यहां से ब्लैकमेलिंग रैकेट की शुरुआत की आशंका
पुलिस को आशंका है कि इसी डिजिटल नेटवर्क के जरिए ब्लैकमेलिंग रैकेट की शुरुआत हुई। बाद में रेशू की मुलाकात श्वेता विजय जैन और अलका दीक्षित से हुई, जिसके बाद तीनों ने मिलकर नेताओं, अधिकारियों और कारोबारियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।

वीडियो-फोटो से करते थे ब्लैकमेल
सूत्रों के मुताबिक, यह गिरोह लोगों के निजी वीडियो और तस्वीरें रिकॉर्ड कर उन्हें ब्लैकमेल करता था। जांच एजेंसियों को शक है कि इस नेटवर्क की पहुंच दिल्ली से लेकर मध्य प्रदेश तक कई प्रभावशाली लोगों तक थी। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं इन वीडियो और तस्वीरों को क्लाउड या किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित तो नहीं रखा गया।

ससुराल पक्ष ने लगाए गंभीर आरोप
रेशू के ससुराल पक्ष ने भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रेशू के पति महेंद्र को मस्कट में रहते हुए पता चला था कि वह “डॉल्फिन” नाम से गुप्त सोशल मीडिया प्रोफाइल चलाती थी और अनजान पुरुषों से आपत्तिजनक चैटिंग करती थी।

रिश्तेदार भाई की भूमिका पर भी सवाल
इसके बाद वह भारत लौट आई और डेटिंग ऐप्स पर सक्रिय हो गई। परिवार ने रेशू के एक रिश्तेदार भाई की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि वही व्यक्ति शादी के बाद भी रेशू को भोपाल, इंदौर, जबलपुर और नागपुर जैसे शहरों में प्रतियोगी परीक्षाओं के बहाने लेकर जाता था।

ढाबों व होटलों में बैठकर रची साजिशें
ससुराल पक्ष को शक है कि दोनों के बीच गहरी सांठगांठ थी और इसी नेटवर्क से हनीट्रैप का खेल संचालित होता था। क्राइम ब्रांच की जांच में यह भी सामने आया है कि पीथमपुर और इंदौर के ढाबों व होटलों में बैठकर ब्लैकमेलिंग की साजिशें रची जाती थीं।

कारोबारी से की थी रुपए की मांग
इसी दौरान कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान को कथित तौर पर ब्लैकमेल कर एक करोड़ रुपए की मांग की गई थी। रेशू के वैवाहिक जीवन को लेकर भी चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। ससुराल पक्ष के अनुसार शादी के बाद वह सिर्फ पांच दिन ससुराल में रही और बाद में हर महीने एक लाख रुपये खर्च देने की शर्त रखी।

बड़े खुलासे की उम्मीद
इसके बाद वह पति के साथ मस्कट गई, लेकिन जल्द ही लौटकर ससुराल वालों पर केस दर्ज करा दिया। अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क की डिजिटल, आर्थिक और सामाजिक कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि मोबाइल और डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक रिपोर्ट से इस हाई-प्रोफाइल हनीट्रैप रैकेट के कई और बड़े राज सामने आ सकते हैं।

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