मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला: इन शहरों के बीच बनेगा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर; इतने जिलों में विकसित होंगे औद्योगिक हब
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए सरकार ने जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में कॉरिडोर के विकास के लिए नई कंपनी बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
यह कंपनी पूरी तरह राज्य सरकार के स्वामित्व में होगी। इसके लिए शुरुआती तौर पर 100 करोड़ रुपए की पूंजी उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।
प्रस्तावित कॉरिडोर के तहत जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, भोपाल, सीहोर, देवास और इंदौर सहित सात जिलों में औद्योगिक केंद्र विकसित करने की योजना है।
सरकार का उद्देश्य उद्योगों को जमीन, बिजली, पानी, सड़क और अन्य जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है, ताकि कंपनियां कम समय में अपना कारोबार शुरू कर सकें।
नई कंपनी संभालेगी कॉरिडोर के विकास की जिम्मेदारी
कॉरिडोर के विकास के लिए प्रस्तावित कंपनी का नाम जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड रखा गया है।
यह कंपनी औद्योगिक क्षेत्रों की योजना बनाने, निवेश आकर्षित करने और बुनियादी सुविधाओं के विकास का काम करेगी।
शुरुआती पूंजी के रूप में 100 करोड़ रुपए देने के साथ कंपनी के शुरुआती कामकाज के लिए 20 करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त ऋण देने का भी प्रस्ताव है। मुख्य सड़कों के निर्माण की जिम्मेदारी संबंधित सरकारी एजेंसियों की होगी।
तीन साल में 3 लाख करोड़ रुपए के निवेश का अनुमान
सरकार को उम्मीद है कि इस कॉरिडोर के विकास से मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश आएगा। अनुमान के मुताबिक, मार्च 2028 तक परियोजना में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया जा सकता है। इससे करीब एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और दो लाख से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है।
सरकार का दीर्घकालिक अनुमान है कि तीन साल में परियोजना के पूरी तरह विकसित होने पर निवेश का आंकड़ा तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक पहुंच सकता है। इससे छह लाख से ज्यादा लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
हालांकि, निवेश और रोजगार के ये आंकड़े अनुमानित हैं। वास्तविक परिणाम निवेशकों की भागीदारी, परियोजनाओं के क्रियान्वयन और औद्योगिक इकाइयों की स्थापना पर निर्भर करेंगे।
पहले चरण में 3 से 5 औद्योगिक हब बनाने की तैयारी
परियोजना के पहले चरण में तीन से पांच बड़े औद्योगिक हब विकसित करने की योजना है। इनके लिए करीब 10 हजार एकड़ जमीन की जरूरत का शुरुआती अनुमान लगाया गया है।
इन औद्योगिक केंद्रों में बिजली, पानी, सड़क, सीवरेज और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
कर्मचारियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आवास, अस्पताल, स्कूल और कौशल विकास केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर रहेगा।
इस मॉडल को ‘प्लग एंड प्ले’ कहा जाता है। इसके तहत कंपनियों को उद्योग शुरू करने के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं पहले से उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे परियोजनाओं को शुरू करने में लगने वाला समय कम हो सकता है।
सात जिलों में अलग-अलग उद्योगों पर रहेगा फोकस
सरकार की योजना प्रत्येक जिले की औद्योगिक क्षमता, संसाधनों और मौजूदा कारोबारी गतिविधियों के आधार पर उद्योगों को बढ़ावा देने की है।
जबलपुर: इंजीनियरिंग, विनिर्माण, रक्षा और एयरोस्पेस से जुड़े सहायक उद्योगों के साथ खाद्य प्रसंस्करण और लॉजिस्टिक्स की संभावनाएं।
नरसिंहपुर और रायसेन: कृषि आधारित उद्योग, फूड प्रोसेसिंग, फूड पार्क और वेयरहाउसिंग।
भोपाल: आईटी, तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स और नॉलेज सर्विसेज से जुड़े उद्योग।
सीहोर और देवास: खाद्य प्रसंस्करण, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और भंडारण सुविधाओं का विकास।
इंदौर : आईटी, आधुनिक विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा देने के साथ देवास और पीथमपुर के औद्योगिक क्षेत्रों से बेहतर संपर्क।
इन क्षेत्रों में उद्योगों के प्रकार, जमीन की उपलब्धता और औद्योगिक हब के अंतिम स्थान का निर्धारण आगे की योजना और अध्ययन के आधार पर किया जाएगा।
किसानों की जमीन और पर्यावरण को लेकर क्या है योजना?
कॉरिडोर के लिए बड़े क्षेत्र में जमीन की जरूरत होगी। प्रस्ताव के मुताबिक, औद्योगिक हब विकसित करने के लिए पहले सरकारी जमीन को प्राथमिकता दी जाएगी।
निजी जमीन की जरूरत पड़ने पर उसे आपसी सहमति से खरीदने या लागू कानूनों के तहत अधिग्रहित करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। ऐसी स्थिति में मुआवजे और पुनर्वास से जुड़े नियमों का पालन करना होगा।
वन भूमि का उपयोग आवश्यक सरकारी मंजूरियों व लागू वन संरक्षण कानूनों के तहत ही होगा। औद्योगिक हब विकसित करने से पहले पर्यावरणीय व सामाजिक प्रभावों का आकलन करने की भी जरूरत होगी।
औद्योगिक विकास से रोजगार बढ़ाने की उम्मीद
जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को प्रदेश में निवेश बढ़ाने, उद्योगों के विस्तार और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की संभावित पहल के रूप में देखा जा रहा है।
यदि परियोजना तय योजना के अनुसार आगे बढ़ती है, तो इससे सात जिलों में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।
हालांकि, इसके वास्तविक लाभ जमीन की उपलब्धता, निवेश की प्राप्ति, बुनियादी सुविधाओं के विकास और परियोजनाओं के समय पर पूरा होने पर निर्भर करेंगे।
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