14 साल पहले नेहरू नगर में हुए चर्चित हत्याकांड में बड़ा ब्रेकथ्रू
KHULASA FIRST
संवाददाता

रविश राजेंद्र सिंह 79870-55743 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
14 साल पहले नेहरू नगर में सनसनीखेज हत्याकांड का एक फरार आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ गया। कपिल चौहान मां के साथ बैंक ऑफ बड़ौदा की आरएसएस नगर शाखा पहुंचा था। बैंक में कदम रखने से पहले ही एमआईजी पुलिस ने उसे धरदबोचा।
टीआई सीबी सिंह के मुताबिक 2011 में नेहरू नगर गली नं. 2 में विवाद के दौरान महेश मालवीय की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी, जबकि पिता श्यामलाल पर जानलेवा हमला हुआ था। कोर्ट ने अक्टूबर 2024 में राहुल परिहार और रंजीत कौशल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
मुख्य आरोपी विपिन और उसका भाई कपिल फरार थे। जिसमें से कपिल को कल गिरफ्तार किया है। पूछताछ में सामने आया हत्या के बाद कपिल भाई विपिन के साथ फरार हो गया था। कुछ समय बाद दोनों अलग हो गए। कपिल धार जिले में मजदूरी कर फरारी काटता रहा।
बाद में वॉटर सप्लाई से जुड़ गया और सामान्य जिंदगी जीने लगा लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में उसका नाम बना रहा। पुलिस को लंबे समय से उसके मूवमेंट की सूचना मिल रही थीं। हाल ही में उसकी मां के बैंक आने-जाने की जानकारी जुटाई गई।
इसी दौरान पता चला कपिल भी मां के साथ बैंक पहुंच सकता है। पुलिस ने जाल बिछाया और जैसे ही कपिल पहुंचा, टीम ने पकड़ लिया। पुलिस अब उसके भाई विपिन की तलाश में जुटी है।
पुलिस को आशंका है विपिन भी पहचान छुपाकर दूसरे जिले या राज्य में हो सकता है। पूछताछ में पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है हत्या के बाद दोनों भाइयों ने कहां-कहां पनाह ली, किन लोगों ने मदद की और क्या अब भी दोनों के बीच संपर्क है? कपिल से मिली जानकारी के आधार पर जल्द ही विपिन तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी।
यह था मामला
वारदात 1 अक्टूबर 2011 की रात करीब 11:30 बजे नेहरू नगर में हुई थी। फरियादी शांतिबाई परिवार के साथ घर पर थी। उस दौरान विपिन चौहान साथियों राहुल, रंजीत, कपिल और अन्य के साथ पहुंचा। नंदकिशोर के बारे में पूछताछ की।
शांतिबाई ने रात ज्यादा होने की बात कहते हुए सुबह आने को कहा। इसी बात पर विवाद भड़क गया। विपिन ने गाली-गलौज शुरू कर दी। शोर सुनकर शांतिबाई के पति श्यामलाल बाहर आए। विवाद बढ़ा और विपिन ने चाकू से श्यामलाल के पेट में हमला कर दिया।
पिता को बचाने के लिए बेटा आया तो आरोपियों ने उसे घेर लिया। कपिल, राहुल और रंजीत ने महेश को पकड़ लिया, जबकि विपिन ने उसके पेट और कंधे पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए।
गंभीर रूप से घायल महेश को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। श्यामलाल के पेट में ऐसा घाव था कि आंतें बाहर आ गई थीं। पुलिस ने हत्या और हत्या के प्रयास सहित अन्य धारा में केस दर्ज किया था।
14 साल पुराना केस… गवाह नहीं टूटे
इस चर्चित हत्याकांड में सबसे बड़ी बात यह रही वर्षों बाद भी प्रत्यक्षदर्शी गवाह अपने बयान पर कायम रहे। घायल श्यामलाल, शांतिबाई, बेटियां काजल और निशा, रिश्तेदार लोकेश समेत कई गवाहों ने अदालत में एक जैसी कहानी बताई।
कोर्ट ने फैसले में माना आरोपी एक साथ घटनास्थल पर पहुंचे थे, विवाद में शामिल थे और उन्होंने मिलकर अपराध के लिए सामान्य आशय बनाया था। करीब 13 साल चले सत्र परीक्षण के बाद 18 अक्टूबर 2024 को 15वें अपर सत्र न्यायाधीश ने फैसला सुनाया था।
राहुल पिता कैलाश परिहार और रंजीत पिता जमनालाल कौशल को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 और 307/34 में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
सह आरोपी विक्की उर्फ मुकुल की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई थी। मुख्य आरोपी विपिन और उसका भाई कपिल फरार बताए गए थे। अब कपिल की गिरफ्तारी के बाद केस ने नया मोड़ लिया है।
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