भक्ति, उमंग और आस्था का महाकुंभ: अहिल्या की नगरी में सिर्फ मां भवानी का राज
KHULASA FIRST
संवाददाता

महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर की मां अंबे की आराधना कन्याओं की गरबा प्रस्तुतियों ने मोह लिया दर्शकों का मन...
मां की भक्ति में रंगा प्रीमियम प्राइड रहवासी संघ, गरबा-डांडिया की थाप पर गूंजे मां के जयकारे...
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर प्रीमियम प्राइड रहवासी संघ का परिसर मां दुर्गा की भक्ति, श्रद्धा और उल्लास से सराबोर हो उठा। वातावरण में गूंजते माता रानी के जयकारे, झांज-मंजीरों की मधुर ध्वनि और गरबा-डांडिया की थाप ने ऐसा भक्तिमय समां बांधा कि हर ओर आस्था की छटा बिखर गई।
पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं के चेहरों पर मां के प्रति अटूट श्रद्धा झलक रही थी, तो उनकी लयबद्ध थाप और भक्ति गीतों ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो हर धुन में मां का आह्वान हो और हर कदम उनकी आराधना में समर्पित।
नवरात्रि के इस विशेष आयोजन में महिलाओं ने पारंपरिक अंदाज में गरबा-डांडिया कर मां दुर्गा की आराधना की। झांज-मंजीरों की गूंज के बीच भक्ति गीतों की स्वर लहरियां उठीं, तो पूरा परिसर भक्तिरस में डूब गया। गरबा के गोल घेरे में एक साथ थिरकते कदम, डांडिया की खनक और मां के जयकारों ने उत्सव को और भी भावपूर्ण बना दिया।
हर ताल के साथ श्रद्धा का भाव गहरा होता गया और हर स्वर में माता रानी के प्रति प्रेम और समर्पण झलकता रहा। यह केवल नृत्य और उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि सामूहिक आस्था को अभिव्यक्त करने का एक सुंदर माध्यम बन गया।
आयोजन का विशेष आकर्षण महिलाओं द्वारा सिर पर कलश धारण कर की गई आराधना रही। श्रद्धा और भक्ति के साथ कलश धारण किए महिलाओं ने मां के प्रति अपनी आस्था, विश्वास और समर्पण व्यक्त किया।
इस पारंपरिक धार्मिक स्वरूप ने उत्सव की गरिमा को और बढ़ा दिया। कलश धारण किए महिलाओं की भक्ति और उनके चेहरों पर झलकती श्रद्धा ने वातावरण को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।
कार्यक्रम में कन्याओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजी कन्याओं ने जब लयबद्ध कदमों के साथ मनमोहक गरबा प्रस्तुत किया, तो उपस्थित रहवासी मंत्रमुग्ध हो गए। उनकी मासूम मुस्कान, आकर्षक भाव-भंगिमाओं और ताल से ताल मिलाते कदमों ने आयोजन की रौनक बढ़ा दी। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कन्याओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। उनकी प्रस्तुतियों में नवरात्रि की सांस्कृतिक परंपरा, उमंग और मां के प्रति निश्छल श्रद्धा का सुंदर संगम दिखाई दिया।
प्रीमियम प्राइड में आयोजित यह उत्सव भक्ति के साथ आपसी अपनत्व और सामूहिक उल्लास का भी प्रतीक बना।
महिलाओं और कन्याओं की सहभागिता ने पर्व को जीवंत बनाया, वहीं भक्ति गीतों और माता रानी के जयकारों ने हर मन में श्रद्धा का भाव जगाया। गरबा की थाप, झांज-मंजीरों की गूंज और मां के प्रति समर्पण से सजे इन पलों ने परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
नवरात्रि की इस पावन बेला में हर चेहरा प्रसन्नता से दमकता और हर मन मां की भक्ति में रमा नजर आया। यह आयोजन रहवासियों के लिए केवल उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामूहिक आनंद से जुड़ा एक भावपूर्ण अनुभव बन गया।
नवरात्र के रंग में सराबोर है इंदौर, अलसुबह की कतारों से लेकर रात के डांडिया तक जीवंत हुआ शहर, रंग-बिरंगी रोशनियों में नहाया परिवेश, जब डांडिया की थाप पर थिरकने लगता है पूरा शहर, ढोल की गूंज, गरबों का समंदर, नवरात्र के इन नौ दिनों में सांस लेता है इंदौर का हर कोना, सन्नाटे को चीरती ढोल की थाप: मां दुर्गा की आराधना में सराबोर हुआ मालवा का दिल
इन दिनों यदि आप देवी अहिल्या की इस पावन नगरी की सड़कों से गुजरेंगे, तो आपको महसूस होगा कि पूरा इंदौर शहर किसी एक सांस में, एक ही लय में जी रहा है। सुबह की पहली किरण के साथ ही मंदिरों से उठने वाली घंटियों की गूंज और रात ढलते-ढलते गरबे की थाप पर थिरकते कदम- इस समय शहर की हर गली, हर मोहल्ला और हर चौराहा केवल और केवल मां दुर्गा की भक्ति में डूबा हुआ है।
सुबह के मंदिरों की कतारें और अनकही श्रद्धा
दिन निकलते ही शहर के प्राचीन और प्रसिद्ध देवी मंदिरों चाहे वह मां हरसिद्धि या बिजासन माता का दरबार हों, अन्नपूर्णा मंदिर हो या कॉलोनियों के छोटे-छोटे मंदिर हर जगह भक्तों का तांता लग जाता है। कोई हाथ में चुनरी और नारियल थामे है, तो कोई पूजा की थाली सजाए अपनी बारी का इंतजार कर रहा है।
इस भीड़ में बुजुर्ग माताएं धीमे-धीमे कदमों से आगे बढ़ती हैं, तो वहीं छोटे बच्चे मां का हाथ थामे उत्सुकता से बड़े-बड़े पीतल के घंटे बजाने को मचल उठते हैं। कहीं कतारें लंबी हैं, तो कहीं दर्शन-पूजा के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है, लेकिन किसी के भी चेहरे पर थकान या शिकन का नामोनिशान तक नहीं होता। हर आंख में बस एक ही हसरत होती है कि मां के एक बार दीदार हो जाएं। जब हजारों कंठों से एक साथ ‹जय माता दी› के जयकारे गूंजते हैं, तो पूरा वातावरण स्वतः ही अगाध श्रद्धा और ऊर्जा से भर जाता है।
बाजारों की रौनक और घर-घर में उत्सव
जैसे-जैसे दिन चढ़ता है, शहर के व्यापारिक केंद्र और बाजार अपनी पूरी रौनक पर आ जाते हैं। घर-घर में व्रत, पूजन के साथ अब कन्या-पूजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
शहर के प्रमुख बाजारों में लाल चुनरियों, ताजे फूलों, पूजन सामग्री और फलाहार की दुकानों पर खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। इस चहल-पहल को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि मानों पूरा शहर एक ही परिवार का हिस्सा बन गया हो, जहा हर दरवाजे पर उत्सव की दीवाली जैसी खुशी मनाई जा रही है।
शाम ढलते ही बदल जाता है शहर का मिजाज
जैसे ही सूरज डूबता है और आसमान पर अंधेरा छाता है, शहर का रूप पूरी तरह बदल जाता है। रंग-बिरंगी दूधिया रोशनियों से सजे विशाल पंडाल जगमगा उठते हैं। लाउडस्पीकरों पर गूंजते माता के पारंपरिक भजनों और लोक धुनों के बीच शुरू होता है वह दौर, जिसके लिए पूरा साल इंतजार किया जाता है- गरबा।
पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाएं, युवतियां, युवा और बच्चे जब गोल घेरे में उतरते हैं, तो तालियों की गूंज और डांडियों की खनक एक जादुई लय में बंध जाती है। यहां उम्र का हर बंधन, हर भेद मिट जाता है। बच्चे हों या बुजुर्ग, हर कोई बस मां की भक्ति और उमंग के उस एक घेरे में समा जाता है। ढोल की एक-एक थाप के साथ थिरकते ये कदम देर रात तक थमने का नाम नहीं लेते।
यहां उत्सव सिर्फ मनाए नहीं, जिए जाते हैं
दरअसल उत्सवप्रेमी इस शहर की तासीर ही कुछ ऐसी है। यहां कोई भी पर्व सिर्फ औपचारिक रूप से मनाया नहीं जाता, बल्कि उसे पूरी शिद्दत के साथ जिया जाता है। नवरात्र के ये नौ दिन आस्था, संस्कृति और आपसी भाईचारे का ऐसा बेजोड़ संगम रचते हैं, जिसकी महक और यादें बरसों तक मन के कोनों में बसी रहती हैं।
सड़कें रोशन हैं, दिल आबाद हैं और हर शहरवासी की जुबान पर बस एक ही प्रार्थना है-मां दुर्गा की कृपा इस शहर पर सदा बनी रहे, और हर घर में सुख, शांति और समृद्धि का अखंड वास हो।
पंचम की फैल में महाआरती और महाप्रसादी का आयोजन
पंचम की फैल स्थित नाना टटवाड़े चौक पर जय श्री महाकाल मित्र मंडल द्वारा कल नवरात्रि के पावन अवसर पर महाआरती एवं महाप्रसादी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बालिकाओं ने सांस्कृतिक गरबा प्रस्तुत किया। श्रद्धालुओं ने माता रानी की आरती कर आशीर्वाद लिया।
कार्यक्रम में विधानसभा क्षेत्र-5 के विधायक महेंद्र हार्डिया, बैरवा समाजसेवी जीडी जारवाल, रामकरण गोठवाल, बाबूलाल सिंगले, नगर महामंत्री कैलाश पिंपले, रवि तोमर, मंडल अध्यक्ष अजीत कुशवाह, देवेश जाजोरिया, सत्येंद्र चौहान, अनमोल यादव, जितेंद्र कोल, राजू भाटी, सुनील बेथेरा, राहुल ठाकुर, सुरेश मामा, वीरेंद्र पंवार और विजय महाराज जिनवाल सहित कई वरिष्ठ भाजपा नेता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर अतिथियों का माता रानी का तिलक लगाकर तथा पगड़ी और गमछा पहनाकर स्वागत-सम्मान किया गया। आयोजन में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। संचालक सोनू पालीवाल, आयोजक नाना टटवाड़े, संयोजक विक्की लोदवाल, गोलू टटवाड़े, सुधीर गणवीर, कोमल पालीवाल (टिम्मु), शुभम यादव, लक्की गोठवाल, ताराचंद रोजड़े, पवन जारवाल, कालू मरमट, सन्नी गोठवाल, यश लोदवाल, ऋतिक कुन्हारे, सोनू जिनवाल, मयंक मरमट, परवेश डंडेरवाल सहित समस्त कार्यकर्ताओं ने आयोजन में सहयोग दिया।
सैटेलाइट टाउनशिप बिजलपुर; माता रानी के आंगन में बेटियों का उत्साह चरम पर
सेटेलाइट टाऊनशिप बिजलपुर के दुर्गा माता मंदिर में नवरात्रि के तीसरे दिन छोटी बेटियों से लेकर बड़ी बेटियों तक का उत्साह चरम पर है। हर ग्रुप अपनी बारी का इंतजार करता है और जैसे ही माइक पर कोरियोग्राफर प्रिया चौधरी कहती है कि अब एक नंबर या दो या तीन नंबर को गरबा करना है तो तुरन्त बिना किसी झिझक के छोटी बच्चियां गरबा पंडाल में आ जाती है और पंखिडा से लेकर ढोली रा.. व अन्य गरबा गीतों पर थिरकने लगती है।
विशेषकर एक नंबर की छोटी बच्चियां जिनकी आयु लगभग 4 से 5 वर्ष तक है वो तो तुरन्त तैयार ही रहती है और सबसे पहले पंडाल में पहुंच जाती है। तीसरे दिन में रंगारंग आकर्षक गरबों की धुन में देर रात तक गरबे हुए। अंत में ओपन गरबों में माता बहनों ने भी गरबों का आनंद लिया। सबसे पहले माताजी की महाआरती के बाद प्रसादी वितरण हुआ। कमेटी के सदस्य अपना कर्तव्य बखूबी निभा रहे हैं।
कासा ग्रीन टाउनशिप में गरबा महोत्सव की धूम, रंग-बिरंगे परिधानों में झूमे रहवासी
कासा ग्रीन टाउनशिप, तलावली चांदा में नवरात्रि के पावन अवसर पर गरबा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। आयोजन में टाउनशिप के रहवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों, आकर्षक रोशनी और सुसज्जित गरबा पंडाल ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
असावरी एवं शिव शक्ति गरबा ग्रुप की प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया । कार्यक्रम का शुभारंभ माँ दुर्गा की आराधना के साथ हुआ। इस अवसर पर नन्हीं-नन्हीं बच्चियों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। वहीं, कासा ग्रीन वुमेन्स केयर ग्रुप ने पूरे कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी बखूबी निभाई और आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
शारदीय नवरात्रि: पंचम दिवस; मां स्कंदमाता का संदेश सच्चा नेतृत्व दूसरों को सक्षम बनाने में है
सफलता की असली पहचान यह नहीं है कि कोई व्यक्ति कितनी ऊंचाई तक पहुंचा, बल्कि यह भी है कि वह कितने लोगों को अपने साथ चलने योग्य बना सका। स्वयं उपलब्धि अर्जित करना योग्यता है, लेकिन दूसरों को उनकी क्षमता पहचानने और उसे विकसित करने में सहायता देना नेतृत्व है।
शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना हमें मानव जीवन के इसी दर्शन से परिचित कराती है। उनका यह स्वरूप बताता है कि ममता केवल संरक्षण नहीं, बल्कि किसी को आत्मनिर्भर बनाने की प्रक्रिया भी है। सच्चा मार्गदर्शक वह नहीं, जो दूसरों को हमेशा अपने सहारे रखे, बल्कि वह है, जो उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने योग्य बनाए।
मातृत्व, सामर्थ्य और संस्कार का संगम... मां दुर्गा का पांचवां स्वरूप स्कंदमाता कहलाता है। भगवान कार्तिकेय, जिन्हें स्कंद भी कहा जाता है, की माता होने के कारण देवी को यह नाम प्राप्त हुआ। धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्कंद देवताओं की सेना के सेनापति हैं।
देवी की चार भुजाएं हैं। उनकी गोद में बालरूप स्कंद विराजमान हैं, दो हाथों में कमल पुष्प सुशोभित हैं और एक हाथ अभय मुद्रा में है। सिंह उनका वाहन है। यह स्वरूप वात्सल्य, पवित्रता और साहस का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है। उनकी स्तुति में कहा गया है।
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
मां स्कंदमाता का यह स्वरूप एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठाता है क्या हमारी उपलब्धियां केवल हमारे काम आती हैं, या उनसे दूसरों के विकास का मार्ग भी खुलता है?
आज के आधुनिक जीवन के लिए तीन सीख...पहली सीख : ज्ञान को अपनी ताकत नहीं, दूसरों की पूँजी बनाइए। कार्यक्षेत्र में अनुभवी व्यक्ति यदि अपना ज्ञान साझा करने के बजाय उसे अपनी उपयोगिता बनाए रखने का साधन बना ले, तो वह संस्था की प्रगति रोकता है। इसके विपरीत, जो अपने कनिष्ठों को सिखाता है, उन्हें गलतियों से सीखने देता है और स्वतंत्र निर्णय लेने का अवसर देता है, वही भविष्य के नेतृत्व की नींव रखता है।
यही सिद्धांत शिक्षा और परिवार में भी लागू होता है। किसी को उत्तर बता देना आसान है, उसे स्वयं उत्तर खोजने योग्य बनाना अधिक मूल्यवान है।
दूसरी सीख : रिश्तों में समय और संवेदना का निवेश कीजिए। डिजिटल माध्यमों ने संवाद को आसान बनाया है, लेकिन आत्मीयता अपने आप नहीं बढ़ती। संदेशों और आभासी प्रतिक्रियाओं के बीच हम कभी-कभी अपनों की वास्तविक जरूरतों को अनदेखा कर बैठते हैं।
मां की गोद का प्रतीक बताता है कि व्यक्तित्व के विकास के लिए सुविधाओं के साथ विश्वास और भावनात्मक सुरक्षा भी आवश्यक हैं। बच्चों को समय देना, माता-पिता की बात सुनना और कठिन समय में किसी अपने के साथ खड़े रहना ही रिश्तों को जीवंत बनाए रखता है।
तीसरी सीख : शक्ति का उपयोग भय पैदा करने में नहीं, आत्मविश्वास जगाने में करें। पद, प्रतिष्ठा और ज्ञान व्यक्ति को प्रभावशाली बना सकते हैं, लेकिन उसका चरित्र इस बात से प्रकट होता है कि वह अपनी शक्ति का इस्तेमाल कैसे करता है। ऐसा नेतृत्व, जिसके सामने लोग अपनी बात कहने से डरें, अधूरा है।
सच्चा नेतृत्व लोगों को सम्मान देता है, उनकी क्षमताओं पर विश्वास करता है और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देता है। सिंह पर विराजमान मां की गोद में बालक का सहज स्थान एक सुंदर संदेश देता है-सामर्थ्य की सर्वोच्च अभिव्यक्ति वह है, जिसके सान्निध्य में दूसरा स्वयं को सुरक्षित और स्वतंत्र महसूस करे।
अपनी सफलता से आगे की सोचिए... हममें से प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी दूसरे व्यक्ति के विकास को प्रभावित करता है। माता-पिता बच्चों के, शिक्षक विद्यार्थियों के, अधिकारी अपनी टीम के और अनुभवी नागरिक नई पीढ़ी के भविष्य को दिशा देते हैं।
इसलिए अपने प्रभाव का उपयोग केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां बढ़ाने में ही नहीं, बल्कि दूसरों के लिए अवसर बनाने में भी होना चाहिए। इस नवरात्रि के पंचम दिवस संकल्प लें कि हम अपने अनुभव से किसी को सीखने में मदद करेंगे, किसी युवा को आगे बढ़ने का अवसर देंगे और अपने अधिकार का उपयोग दूसरों की क्षमताओं को विकसित करने में करेंगे।
ज्ञान बांटने से उसका मूल्य घटता नहीं और किसी को आगे बढ़ाने से हमारी उपलब्धियां छोटी नहीं होतीं। क्योंकि सफलता आपको पहचान दिलाती है, लेकिन दूसरों को सक्षम बनाना आपके जीवन को अर्थ देता है। मां स्कंदमाता का संदेश यही है कि जीवन ऐसे जिएं कि आपकी प्रगति केवल आपकी कहानी न बने, बल्कि दूसरों की सफलता की शुरुआत भी हो।
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