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मध्य प्रदेश ने पार कर लिया 100 लाख मीट्रिक टन का आंकड़ा: खरीदी के बाद बचा गेहूं भी खरीदेंगे; सीएम डॉ. मोहन यादव

KHULASA FIRST

संवाददाता

26 मई 2026, 6:46 pm
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मध्य प्रदेश ने पार कर लिया 100 लाख मीट्रिक टन का आंकड़ा

स्टॉल बुकिंग से वंचित किसानों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
रबी विपणन वर्ष 2026-27 में गेहूं उपार्जन को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दो महीनों से लगातार किसानों को आश्वस्त करते रहे हैं कि सरकार किसानों की उपज का एक-एक दाना खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कई मंचों से कहा कि जिन किसानों ने स्लॉट बुक करा लिया है, उनसे सरकार पूरा गेहूं खरीदेगी और आवश्यकता पड़ने पर निर्धारित लक्ष्य से अधिक उपार्जन भी किया जाएगा।

प्रदेश सरकार ने इस वर्ष गेहूं खरीदी का लक्ष्य बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया था। मुख्यमंत्री ने इसे किसानहित में लिया गया बड़ा निर्णय बताते हुए कहा था कि इससे किसानों को अपनी पूरी उपज समर्थन मूल्य पर बेचने का अवसर मिलेगा।

केंद्र सरकार द्वारा राज्य का उपार्जन कोटा 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किए जाने के बाद सरकार ने खरीदी अभियान को और तेज किया।

खरीदी केंद्रों पर किसानों की भीड़ और लंबित स्लॉट को देखते हुए सरकार ने गेहूं उपार्जन की अंतिम तिथि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई कर दी।

मुख्यमंत्री ने कहा जिन किसानों ने निर्धारित अवधि तक स्लॉट बुक कर लिया है, उनका गेहूं 28 मई तक खरीदा जाएगा।

मुख्यमंत्री के प्रयासों पर अफसर लगा रहे पलीता
मुख्यमंत्री किसानों का सारा गेहूं खरीदने की लाख कोशिश करें, लेकिन अफसर हैं कि ऐसा होने नहीं देना चाहते। दरअसल, स्लॉट का खेल किसानों के लिए मुश्किल बना हुआ है।

मुख्यमंत्री जरूर कह रहे हैं कि खरीदी के अंतिम दिन के बाद भी बचा गेहूं खरीदेंगे, लेकिन सच्चाई यह है कि सरकारी कर्मकांड के कारण जिन किसानों के स्लॉट बुक नहीं हो पाए या बुकिंग बंद करके बुक नहीं होने दिए गए, इनमें अधिकांश किसान स्लॉट बुकिंग के चक्रव्यूह के शिकार हो गए हैं।

बार-बार कोशिश के बाद भी स्लॉट की बुकिंग नहीं करवा सके। 5 लाख से अधिक ये किसान पंजीकृत हैं, लेकिन स्लॉट बुकिंग के नाम पर इनका गेहूं नहीं खरीदा जा रहा। अफसरों की मनमानी के चलते ऐसे किसानों को जानबूझकर बुकिंग से वंचित रखा गया है।

भोपाल के किसान लखन लाल ने बताया अफसरों के पास जाते हैं तो वे कहते हैं मंडी में गेहूं भेज दो। खरीदी बंद हो चुकी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश ने इस सीजन में गेहूं खरीदी का नया रिकॉर्ड बनाते हुए 100 लाख मीट्रिक टन का आंकड़ा पार कर लिया है।

मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि देश में सबसे अधिक गेहूं उपार्जन करने वाले राज्यों में मध्य प्रदेश अग्रणी रहा और किसानों के खातों में हजारों करोड़ रुपए का भुगतान भी किया जा चुका है।

राजनीतिक नुकसान संभावित
विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा और पंचायत स्तर पर किसान वर्ग को साधने के लिए गेहूं उपार्जन अभियान को सरकार ने प्रतिष्ठा का विषय बनाया।

एक-एक दाना खरीदेंगे और लक्ष्य से अधिक भी खरीदी करेंगे जैसे बयानों के माध्यम से मुख्यमंत्री ने किसानों में भरोसा पैदा करने की कोशिश की, लेकिन अब यही वचन खरा उतरता नजर नहीं आ रहा।

स्टॉल बुकिंग के नाम पर जिन पंजीकृत किसानों की बुकिंग नहीं होने दी गई, उनसे गेहूं नहीं खरीदने से सरकार को राजनीतिक नुकसान होगा। इन दिनों यह बहस का विषय है कि सरकार जानबूझकर बचे हुए किसानों का गेहूं नहीं खरीद रही।

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