रेंजर के आवास पर माधवी सिंगला का कब्जा: नियम-कायदे ताक में; रसूख के आगे बौने साबित हो रहे आला अफसर
KHULASA FIRST
संवाददाता

अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक पदमप्रिया बालकृष्णन के आदेश का उड़ रहा मखौल
चंचल भारतीय 98936-44317 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सरकारी रसूख का नशा जब सिस्टम की नसों में जहर बनकर दौड़ने लगे, तो नियम केवल कागजों पर रेंगने वाले कीड़े बनकर रह जाते हैं। वन विभाग इंदौर में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया, जिसने विभाग की शुचिता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नियमों की मर्यादा को तार-तार करते हुए एसडीओ और रेंजर जैसे राजपत्रित अधिकारियों के लिए आरक्षित आलीशान सरकारी आवास (क्रमांक एफडी/12) महिला वनरक्षक माधवी सिंगला को आवंटित कर दिया गया।
इस आवास कांड की पटकथा इतने शातिर तरीके से लिखी गई कि तत्कालीन वन मंडलाधिकारी प्रदीप मिश्रा को पूरी प्रक्रिया से अंधेरे में रखा गया। विभागीय आवास आवंटन समिति की बैठकों के निर्णयों और पात्रता की वरिष्ठता सूची से परे बाले-बाले नवरत्न बाग परिसर स्थित इस वीआईपी आवास पर वनरक्षक का कब्जा करा दिया गया, जबकि उक्त आवास के लिए रेंजर स्तर के अधिकारी कतार में थे।
मिलीभगत के इस खेल की जानकारी अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कार्य आयोजना) पदमप्रिया बालकृष्णन तक पहुंचने पर उन्होंने ताबड़तोड़ दस्तावेजों की पड़ताल की और इस आवंटन को पूर्णतः अनुचित, नियम विरुद्ध और वरिष्ठता की अवहेलना करार देते हुए इसे तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का कड़ा लिखित आदेश जारी किया, लेकिन इस आदेश के बावजूद माधवी सिंगला रेंजर स्तर के इस आवास पर अपना अवैध डेरा जमाए हुए है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस बंदरबांट के पीछे सक्रिय सिंडिकेट ने फाइलों में हेराफेरी कर पात्रता की श्रेणी ही बदल डाली। अब सवाल यह उठता है कि आखिर वो कौन-सा वरदहस्त है, जिसके संरक्षण में यह महिला वनकर्मी बेखौफ सरकारी संपत्ति पर कुंडली मारकर बैठी है?
क्या इंदौर वन विभाग में अब कानून का नहीं, बल्कि कनेक्शन का राज चलेगा? विभाग की साख को बचाने के लिए अब मांग उठ रही है कि न केवल इस अवैध कब्जे को तुरंत खाली कराया जाए, बल्कि नियम विरुद्ध आवास में रहने की पूरी अवधि का बाजार भाव से पीनल रेंट (दंडात्मक किराया) वसूलकर राजकोष को हुई क्षति की भरपाई की जाए और इस षड्यंत्र में शामिल पर्दे के पीछे के खिलाड़ियों का खुलासा किया जाए।
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