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वर्दी में भूमाफियाओं के वफादार!: जोन-2 में वर्षों से जमे दो रीडरों के खेल का खुलासा

KHULASA FIRST

संवाददाता

17 मई 2026, 7:18 pm
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वर्दी में भूमाफियाओं के वफादार!

पुलिसकर्मी रामजनम सालों से एडीसीपी जोन-2 का रीडर तो अवतार सिंह की परदेशीपुरा सर्कल में हैं मजबूत जड़ें

लाइन में पड़ा था अवतार, पुलिस कमिश्नर की आंखों में धुल झोंककर करा लिया एमआईजी थाने ट्रांसफर

डीजीपी के तबादला आदेश को बताया ठेंगा

अफसरों को गुमराह कर जांच दबाने और आरोपियों को बचाने में महारत

खुलासा फर्स्ट…इंदौर।
उल्लेखनीय है खुलासा फर्स्ट विभिन्न विभागों में फैले भ्रष्टाचार और इसे अंजाम देने वालों पर हमेशा ही प्रहार करता रहा है। हाल में खुलासा फर्स्ट को पता चला कि एडीसीपी जोन-2 का रीडर एएसआई रामजनम है। इंदौर में पुलिस कमिश्नरी लागू होने से पहले पूर्वी क्षेत्र के एएसपी के रीडर के रूप में और साल 2021 में कमिश्नरी लागू होने के बाद जोन-2 के एडीसीपी के रीडर के रूप में, यानी करीब 12 साल से वह इसी जगह पदस्थ है। सूत्रों ने बताया वर्षों से इसी जगह पर अंगद की तरह जमे रहने के कारण रामजनम के संबंध भूमाफियाओं और रसूखदार अपराधियों से बन गए हैं। इनके खिलाफ कोई शिकायत आला अफसरों को होती है और जांच आगे बढ़ती है तो यह जांच को प्रभावित कर संबंधित आरोपी से साठगांठ कर उसके नतीजे बदलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सही को गलत और गलत को सही बताकर अफसरों को गलत फीडबैक देना इसकी फितरत में शुमार है। पीड़ित को अफसरों तक पहुंचने से रोकने में भी इसे महारत हासिल है।

टीम के रूप में करते हैं काम
एमआईजी और परदेशीपुरा थाने से संबंधित किसी अपराधी या भूमाफिया की जांच डीसीपी जोन-2 को शिकायत के बाद एडीसीपी जोन-2 को पहुंचती थी तो रामजनम परदेशीपुरा एसीपी के यहां पदस्थ अपने रिश्तेदार हेड कांस्टेबल अवतार सिंह को सक्रिय कर देता था। इसके बाद अवतार सिंह की भूमिका शुरू हो जाती थी। यानी दोनों संगठित गिरोह की तरह काम करते हुए पीड़ित पक्ष को भ्रमित करने और डराने के साथ रसूखदार आरोपी को फायदा पहुंचाकर मोटा शुभ-लाभ कर लिया करते थे।

डीजीपी के सख्त आदेश को भी लगा चूना... डीजीपी कैलाश मकवाना ने पुलिस विभाग में जमे भ्रष्ट नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए जून 2025 में आदेश जारी किया था कि 3 से 10 साल तक एक ही जिले और थाने में तैनात पुलिसकर्मियों को हटाया जाए। यह भी स्पष्ट किया था कि किसी भी पुलिसकर्मी का एक ही थाने में कार्यकाल सामान्यत: 4 और अधिकतम 5 साल से ज्यादा नहीं रहेगा।

डीजीपी ने पारदर्शिता और प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर तबादले कर करीब 10 हजार पुलिसकर्मियों को हटाया था, लेकिन खास बात यह कि एएसआई रामजनम और उसका रिश्तेदार अवतार सिंह साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपनाते हुए इस आदेश की जद से बच निकले थे। यूं कहें कि उसने अपना नाम ही लिस्ट में नहीं आने दिया और आज भी एडीसीपी जोन-2 के रीडर के रूप में जमा हुआ है।

सरकार की वर्दी पहनकर कानून की रक्षा करने वाले दो पुलिसकर्मी वर्षों से जोन-2 में ऐसा जाल बिछाए बैठे हैं, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक एएसआई और दूसरा हेड कांस्टेबल... दोनों रिश्तेदार सालों से एसीपी-एडीसीपी दफ्तरों की रीडरी पर जोंक की तरह कब्जा जमाए हुए... और दोनों पर आरोप है कि वे भूमाफियाओं, रसूखदार अपराधियों और अवैध कारोबारियों के लिए सिस्टम के भीतर रहकर खेल कर रहे हैं।

इनका काम एक संगठित गिरोह की भांति काम करते हुए अफसरों को गलत फीडबैक देकर जांच प्रभावित करना है। हालांकि कुछ महीने पहले एक सस्पेंड और लाइन अटैच हुआ था, जो कि पिछले दरवाजे से सेटिंग जमाकर पुलिस कमिश्नर की आंखों में धुल झोंकते हुए वापस परदेशीपुरा सबडिविजन में आ गया है, ताकि धीरे से वापस एसीपी का रीडर बन सके।

पुलिस कमिश्नर ने किया था सस्पेंड
पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने अपराधियों पर नकेल कसने के लिए मातहतों को निर्देश दे रखे हैं कि किसी अपराधी की शिकायत आए तो केस दर्ज कर उसे जेल भेजो। बावजूद इसके कुछ महीनों पहले ऐसे ही एक अपराधी के मामले में एसीपी कार्यालय पर कार्रवाई पहुंचने पर अवतार सिंह ने एसीपी को गुमराह करते हुए उसकी जमानत होने दी। नतीजा ये हुआ कि कुछ समय बाद उसने नया अपराध कर दिया। इसकी खबर लगने पर पुलिस कमिश्नर ने तत्काल प्रभाव से रीडर अवतार सिंह को सस्पेंड कर लाइन अटैच कर दिया।

हालांकि करीब तीन माह से लाइन में पड़े अवतार ने जुगाड़ लगाई और 11 मई को एडीसीपी मुख्यालय सीमा अलावा के आदेश पर ट्रांसफर हुए 52 लोगों की लिस्ट में 18वें नंबर पर अपना नाम जुड़वा लिया। चूंकि एमआईजी थाना परदेशीपुरा सबडिविजन में है, इसलिए जारी आदेश में उसे लाइन से एमआईजी थाने भेजा गया है। सूत्रों का कहना है कि अवतार के कमाऊ पूत होन के चलते वह परदेशीपुरा सबडिविजन में पहुंचा, ताकि उसे परदेशीपुरा एसीपी कार्यालय कभी भी अटैच किया जा सके। यानी पुलिस कमिश्नर को अंधेरे में रखते हुए पूरे खेल को अंजाम दिया जा रहा है। कहा तो ये भी जा रहा है कि खेल में कोई बड़ा अफसर शामिल है, जो कमाऊ पूत को छोड़ना नहीं चाहता।

सबडिविजनल परदेशीपुरा का कमाऊ पूत
2009 से पहले सीएसपी और अब एसीपी परदेशीपुरा के रीडर के रूप में पदस्थ हेड कांस्टेबल (बैच नं. 2406) अवतार सिंह को लेकर खुलासा फर्स्ट पहले भी कई खबरें प्रकाशित कर चुका है। करीब पांच साल पहले खुलासा फर्स्ट ने बताया था कि एसीपी परदेशीपुरा के यहां रीडर के रूप में वर्षों से पदस्थ अवतार सिंह ने अपने शासकीय काम को करने के लिए एक एवजी रख रखा था।

मय सबूत खबर प्रकाशित होते ही अवतार सिंह ने उसे हटा दिया था। इसके बाद 19 और 20 अगस्त 2025 को प्रकाशित खबरों ‘अंगद का अवतार है ये हेड कांस्टेबल’ और ‘करतूतों का खुलासा होते ही एसीपी ने हेड कांस्टेबल को छुट्टी पर भेजा’ शीर्षक से दो खबरें खुलासा फर्स्ट ने प्र्रकाशित की थीं। बताया था कि एसीपी परदेशीपुरा का रीडर अवतार सिंह जून 2025 में हुए थोकबंद तबादलों से बच निकला था। ये भी बताया था कि ये जोन-2 में जमकर वसूलीबाजी कर रहा है। जमानेभर के अवैध शराब के ठियों और अहातों के संचालकों से रुपए ले रहा है। आरोपियों से साठगांठ करने में इसे महारत हासिल है। अफसरों का कमाऊ पूत होने के चलते इसका तबादला नहीं होता।

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