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जेल की दीवारों के पार प्यार: सहायक जेलर ने पूर्व कैदी से रचाई शादी; हिंदू रीति-रिवाज से हुआ विवाह, परिवार के विरोध के बावजूद लिया बड़ा फैसला

KHULASA FIRST

संवाददाता

07 मई 2026, 5:47 pm
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जेल की दीवारों के पार प्यार

खुलासा फर्स्ट, सतना/छतरपुर।
सतना केंद्रीय जेल से जुड़ी एक अनोखी प्रेम कहानी इन दिनों चर्चा में है, जहां जेल प्रशासन में पदस्थ सहायक जेलर फिरोजा खातून ने एक पूर्व कैदी धर्मेंद्र सिंह से विवाह कर समाज की परंपराओं को चुनौती दे दी। यह शादी न सिर्फ अंतरधार्मिक है, बल्कि इसकी खास बात यह भी रही कि पूरा विवाह हिंदू रीति-रिवाज और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ।

जेल में शुरू हुई कहानी, रिश्ते में बदली
जानकारी के अनुसार, सेंट्रल जेल सतना में सहायक जेल अधीक्षक के रूप में कार्यरत फिरोजा खातून की मुलाकात धर्मेंद्र सिंह से ड्यूटी के दौरान हुई थी। उस समय धर्मेंद्र हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था और जेल के वारंट से जुड़े काम में सहयोग करता था। पेशेवर बातचीत के बीच शुरू हुई जान-पहचान धीरे-धीरे दोस्ती में बदली और फिर दोनों के बीच गहरा भावनात्मक रिश्ता बन गया।

सजा पूरी, लेकिन रिश्ता कायम रहा
धर्मेंद्र सिंह, जो मूल रूप से छतरपुर जिले के चंदला क्षेत्र का निवासी है, वर्ष 2007 में एक हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। सजा पूरी होने के बाद करीब चार वर्ष पहले वह जेल से रिहा हो गया। रिहाई के बाद भी दोनों के बीच संपर्क बना रहा और उनका संबंध और मजबूत होता गया। अंततः दोनों ने जीवनसाथी बनने का निर्णय लिया।

धर्म बना बाधा, लेकिन फैसला अडिग
इस रिश्ते के सामने सबसे बड़ी चुनौती धर्म और परिवार का विरोध था। जहां धर्मेंद्र सिंह हिंदू समुदाय से हैं, वहीं फिरोजा खातून मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती हैं। परिवार ने इस विवाह को स्वीकार नहीं किया, लेकिन दोनों ने सामाजिक दबावों की परवाह किए बिना साथ रहने का फैसला लिया।

लवकुशनगर में हुआ विवाह, हिंदू परंपराओं का पालन
5 मई 2026 को लवकुशनगर में आयोजित समारोह में दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लिए। विवाह पूरी तरह वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। दुल्हन के रूप में फिरोजा खातून पारंपरिक वेशभूषा में नजर आईं, जिसकी तस्वीरें सामने आने के बाद यह विवाह चर्चा का विषय बन गया।

बजरंग दल ने निभाई ‘कन्यादान’ की रस्म
चूंकि दुल्हन का परिवार इस विवाह में शामिल नहीं हुआ, इसलिए कन्यादान की रस्म बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े पदाधिकारियों ने निभाई। बताया गया कि इस दौरान स्थानीय स्तर पर संगठन से जुड़े कई लोग विवाह समारोह में मौजूद रहे।

चर्चा में आई प्रेम कहानी
जेल प्रशासन और स्थानीय समाज में यह विवाह व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर जहां इसे मोहब्बत की मिसाल कहा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अंतरधार्मिक विवाह और सामाजिक परंपराओं को लेकर बहस भी तेज हो गई है। यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि क्या व्यक्तिगत रिश्तों में धर्म और सामाजिक मान्यताओं की भूमिका निर्णायक होनी चाहिए, या फिर व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पसंद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।



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