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भगवान महाकाल का राजा स्वरूप में किया गया शृंगार: निर्वाणी अखाड़े ने अर्पित की भस्म

KHULASA FIRST

संवाददाता

02 मार्च 2026, 4:29 pm
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भगवान महाकाल का राजा स्वरूप में किया गया शृंगार

खुलासा फर्स्ट, उज्जैन।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पट सोमवार तड़के (4 बजे) भस्म आरती के दौरान खोले गए। पण्डे-पुजारी ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक और दूध, दही, घी, शकर, फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन किया। जटाधारी भगवान महाकाल का राजा स्वरूप में श्रृंगार किया गया।

इससे पहले प्रथम घंटाल बजाकर मंदिर में प्रवेश करते ही भगवान का ध्यान कर मंत्र उच्चार के साथ हरिओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद भगवान के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुण्ड अर्पित कर श्रृंगार किया गया। श्रृंगार पूरा होने के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई।

भस्म अर्पित करने के बाद शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला के साथ सुगंधित पुष्प से बनी माला अर्पित की। भगवान महाकाल ने मोगरे और गुलाब के सुगंधित पुष्प धारण किए। फल और मिष्ठान का भोग लगाया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।

भस्म आरती के पश्चात महाराष्ट्र से आए श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल को अर्पित किया 2.5 किलो चांदी का छत्र

महाकालेश्वर में भक्ति और आस्था का भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला जब महाराष्ट्र से पधारे श्रद्धालु योगेश खाड़े जी एवं श्रीमती शर्मिला खाड़े जी ने बाबा महाकाल को 2.5 किलो वजनी शुद्ध चांदी का छत्र अर्पित किया। यह अर्पण प्रातःकालीन भस्म आरती के उपरांत विधि-विधान से संपन्न हुआ।

जानकारी के अनुसार, यह छत्र अर्पण ओम गुरुजी और राघव गुरु जी की प्रेरणा से श्रद्धाभावपूर्वक समर्पित किया गया। भस्म आरती में सहभागिता के पश्चात खाड़े दंपति ने मंदिर प्रशासन की निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप पूजन कर बाबा महाकाल के श्रीचरणों में चांदी का छत्र अर्पित किया।

मंदिर प्रशासन के अनुसार विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु नियमित रूप से बाबा महाकाल के दर्शन हेतु उज्जैन पहुंचते हैं और अपनी श्रद्धा अनुसार अर्पण करते हैं। महाराष्ट्र से आए श्रद्धालुओं द्वारा समर्पित यह 2.5 किलो चांदी का छत्र गहन आस्था और समर्पण का प्रतीक है।

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