सब जनता ही करे सरकार: साहब बहादुरों के लिए कब जारी होगा फरमान
KHULASA FIRST
संवाददाता
प्रधानमंत्री की 24 घंटे में दूसरी अपील, देशवासियों के गले नहीं उतरी
शरद पवार ने कहा अगर संकट बड़ा है तो प्रधानमंत्री अपनी अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक बुलाएं, देश में घबराहट
आमजन ने भी उम्मीद जताई कि जनता से पहले जनप्रतिनिधि पेश करें मिसाल
पीएम की अपील पर आम राय- सांसद, विधायक, मंत्री, मेयर सबसे पहले छोड़ें लक्जरी, फिर देशवासियों से करें अपील
सरकारी व राजनीतिक जलसों पर लगे विराम, नेताओं के काफिलों पर भी लगे रोक
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व वित्तमंत्री चिदंबरम ने पीएम के ‘गोल्डन रूल’ को सही करार दिया, राहुल विरोध में
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
दुनिया के मध्य पूर्व हिस्से में चल रही ईरान अमेरिकी लड़ाई के देश मे पड़ रहे साइड इफेक्ट्स पर 24 घंटे में दूसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुखर हुए। सोमवार को मोदी ने अपने गुजरात में भी वही सब दोहराया, जो रविवार को तेलंगाना में बोला था।
सालभर सोना नहीं खरीदने, तेल की बचत करने, विदेश यात्राओं से बचने व ऑनलाइन कामकाज शुरू करने पर पीएम ने पुनः जोर दिया। भारत छोड़ दुनिया के अन्य मुल्कों को ‘वेडिंग डेस्टिनेशन’ बनाने के बढ़ते चलन पर भी रोक की बात करते हुए देश के मुखिया ने मिडिल ईस्ट में चल रही जंग को कोरोना जैसे संकट से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि जिस तरह कोरोना सदी का सबसे बड़ा संकट था, वैसे ही ये युद्ध इस दशक के बड़े संकटों में से एक है। हालांकि केंद्र सरकार ने मोदी की अपील के बीच देश को आश्वस्त किया है कि घबराएं नहीं, भारत में पेट्रोल-डीजल-गैस की कमी नहीं है। सरकार के दावों के बावजूद विपक्ष इस मसले पर बिफर गया है।
नेता प्रतिपक्ष राहुल ने इसे मोदी सरकार की बड़ी नाकामी बताते हुए सरकार के जवाबदेही से बचने का प्रयास करार दिया। शरद पवार ने तो इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग बुलंद कर दी।
इस बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता व देश के पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने प्रधानमंत्री के ‘गोल्डन रूल’ को देश की आर्थिक सेहत के लिए सही करार दिया। इस बीच पीएम की अपील सीधे-सीधे देशवासियों के गले नहीं उतरी।
आमजन का कहना है कि हर बार जनता से ही त्याग की अपेक्षा क्यों? आमजन ने उम्मीद जताई है कि इस बार जनप्रतिनिधियों को पहले मिसाल पेश करना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी से डीजल-पेट्रोल की खपत कम करने, सोना एक साल तक न खरीदने, विदेशी वस्तुएं न खरीदने, वेजिटेबल ऑइल की खपत दस फीसदी तक कम करने और कार पूलिंग या इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग करने की अपील की है।
इसी कड़ी में आमजन की सोमवार को दिनभर जबरदस्त प्रतिक्रिया सामने आई। सोशल मीडिया इसका माध्यम बना। सब तरफ से बस एक ही आम राय सामने आई कि ‘सरकार’ साहब-बहादुरों यानी नेताओं व अफसरों के लिए ऐसा फरमान कब जारी करेगी?
जन-जन ने प्रधानमंत्री मोदी से उम्मीद जताई है कि वे ‘सफेद हाथी’ बन चुकी व्यवस्था के लिए भी कुछ कड़े कदम उठाए ताकि जनता भी आगे आकर त्याग कर सके।
दूसरी तरफ देश के सोना-चांदी-जवाहरात बाजार में भी पीएम की अपील पर रोषपूर्ण प्रतिक्रिया सामने आई। बाजार का कहना है गोल्ड में विदेशी मुद्रा की तुलना में पेट्रोल-डीजल पर दस गुना ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च हो रही है।
वहीं सरकार की मंशा है कि एक वर्ष के लिए सोने की खरीदी रोककर अतिरिक्त खर्च को रोका जा सके। इस बीच सरकार ने देश को भरोसा भी दिलाया है कि 60 दिनों का तेल-गैस का भंडार है, लेकिन इनके संयमित उपयोग से सरकार पर प्रतिदिन पड़ रहे अतिरिक्त डेढ़ हजार करोड़ के खर्च से बचा जा सकेगा।
विपक्ष इस मसले पर सरकार की घेराबंदी पर आमदा हो चला है। राहुल गांधी को सबसे बड़ा साथ मंगलवार सुबह देश के बड़े नेता शरद पवार का मिला। पवार का कहना है कि अगर संकट बड़ा है तो सरकार आर्थिक मामलों के जानकारों की राय से आगे बढ़े और सर्वदलीय बैठक के जरिए पूरी स्थिति साफ करे।
पीएम से देशवासी मांगें मोर..अब नेतृत्व से अपेक्षा
विधायक, सांसद, मंत्री काफिला लेकर चल रहे हैं, उनके काफिले पर रोक लगाई जाए। अत्यंत आवश्यक होने पर ही दो-चार गाड़ी लेकर चलने का आदेश दिया जाए।
जनप्रतिनिधि कम माइलेज के लक्जरी वाहन जैसे लैंड क्रूजर, डिफेंडर, रेंजरोवर, फॉर्च्यूनर, मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू आदि को तत्काल त्यागें। पीएम इन्हें इलेक्ट्रिक कार या अच्छी माइलेज वाली कारों जैसे अर्टिगा, वैगन आर पर शिफ्ट होने का आदेश दें।
सभी प्रकार के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के देशी, विदेशी प्रवास, जो बेहद अहम न हो, पर रोक लगाई जाए।
सभी सरकारी कर्मचारियों को कार पूलिंग और मेट्रो यात्रा या इलेक्ट्रिक स्कूटर से आने का सख्त आदेश दिया जाए बेवजह के उद्घाटन, आयोजन, रैली, रोड शो, फ्री स्कीम पर स्थिति सुधरने तक रोक लगाई जाए।
सभी आईएएस, आईपीएस के निजी काम के लिए सरकारी गाड़ी के उपयोग पर रोक लगाई जाए। लोकल पुलिस केवल इलेक्ट्रिक कार, स्कूटर का प्रयोग करे।
सरकारी जलसों और आयोजनों पर पाबंदी लगाई जाए। सभी सरकारी विभागों में ईवी वाहनों का उपयोग अनिवार्य किया जाए।
सभी उच्च एवं मध्यम स्तर के अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए ईवी गाड़ियां कंपलसरी की जाएं।
सरकारी खाली भूमि 5 साल के लिए किसानों को खेती के लिए दी जाए। केमिकल खाद पर निर्भरता खत्म कर गोबर खाद को प्रोत्साहित किया जाए। पवन चक्की, टर्बाइन योजना को घरेलू उपयोग के लिए छोटे रूप में विकसित किया जाए।
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