लॉरेंस फिरौती गैंग का खुलासा: बिल्डरों को डराने के लिए करते थे ‘लोकल नेटवर्क’ का इस्तेमाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर-उज्जैन-खरगोन बेल्ट में बिल्डरों और कारोबारियों को धमकाकर करोड़ों की फिरौती मांगने वाले नेटवर्क की जांच अब केवल गैंगस्टरों तक सीमित नहीं रही। क्राइम ब्रांच की ताजा पड़ताल में संकेत मिले हैं कि गैंग ने स्थानीय स्तर पर ऐसे युवाओं और बदमाशों का नेटवर्क खड़ा कर लिया था, जो जरूरत पड़ने पर रैकी, फायरिंग और धमकी जैसी वारदातों को अंजाम देते थे।
पुलिस को शक है कि यह सिर्फ एक-दो घटनाओं का मामला नहीं, बल्कि संगठित ‘क्रिमिनल सपोर्ट सिस्टम’ का हिस्सा है। जांच में सबसे बड़ा नाम राहुल उर्फ बाबा का सामने आया है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। क्राइम ब्रांच ने उस पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है।
सूत्रों के मुताबिक राहुल केवल शूटर उपलब्ध कराने का काम नहीं करता था, बल्कि स्थानीय स्तर पर युवाओं को जोड़कर एक अलग गैंग भी संचालित कर रहा था। पुलिस को शंका है कि कई वारदातों में उसी नेटवर्क का इस्तेमाल हुआ।
पूरे मामले की शुरुआत तब हुई, जब क्राइम ब्रांच ने नागदा निवासी शातिर अपराधी राजपाल चंद्रावत को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि बिल्डर विवेक दम्मानी से पांच करोड़ रुपए की फिरौती मांगने के पीछे केवल डर पैदा करना मकसद नहीं था, बल्कि हमला करवाकर पूरे कारोबारी वर्ग में दहशत फैलाने की तैयारी थी।
जांच में यह भी सामने आया कि बिल्डर के घर की लोकेशन, तस्वीरें और गतिविधियों की जानकारी जुटाने के लिए ड्राइवर तक का इस्तेमाल किया गया।
महिदपुर से पकड़ा एक और आरोपी- महिदपुर से पकड़े गए सचिन शर्मा उर्फ सचिन आर्य की गिरफ्तारी को भी जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उसके मोबाइल से कोडवर्ड में सेव नंबर मिले हैं। पुलिस अब मोबाइल डेटा, चैट रिकॉर्ड, इंटरनेट कॉलिंग और जेल कनेक्शन की कड़ियां जोड़ रही है।
शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि जेल में बंद आरोपियों के संपर्क बाहर सक्रिय बदमाशों से बने हुए थे। अब यह मामला सामान्य फिरौती केस से कहीं बड़ा दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में गैंगस्टर ब्रांडिंग का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है।
छोटे अपराधी बड़े गैंग के नाम का इस्तेमाल कर स्थानीय स्तर पर रंगदारी और दहशत का कारोबार चला रहे हैं। ऐसे मामलों में अक्सर असली चुनौती शूटर पकड़ना नहीं, बल्कि उस ‘नेटवर्क’ को तोड़ना होता है, जो पैसे, हथियार, सूचना और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराता है।
अब पुलिस उठा सकती है ये कदम- आने वाले दिनों में पुलिस इस केस में तीन बड़े कदम उठा सकती है। पहला, फरार आरोपियों पर इनाम बढ़ाकर प्रदेश स्तर पर अलर्ट जारी किया जा सकता है।
दूसरा, जेल से संचालित संपर्कों की जांच के लिए कॉल रिकॉर्ड और मुलाकात रजिस्टर खंगाले जा सकते हैं। तीसरा, गैंग से जुड़े संदिग्ध युवाओं और उनके आर्थिक लेनदेन की निगरानी बढ़ाई जा सकती है।
फिलहाल क्राइम ब्रांच की कोशिश केवल आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क को खुलासा करने की है, जिसने कारोबारियों में डर का माहौल बनाने की कोशिश की।
बड़े नाम का खौफ दिखाकर वसूल की जा रही रंगदारी
पुलिस सूत्रों के अनुसार गैंग बड़े नामों का भय दिखाने के लिए लॉरेंस बिश्नोई और हैरी बॉक्सर का नाम इस्तेमाल कर रहा था। इससे पीड़ितों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जाता था, ताकि वे बिना शिकायत किए रकम देने को मजबूर हो जाएं।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन नामों का इस्तेमाल केवल धमकी के लिए किया गया या वास्तव में बड़े गैंग से कोई सीधा संपर्क भी था। जांच का दूसरा अहम पहलू ‘लोकल मॉड्यूल’ है।
पुलिस मान रही है कि बाहरी गैंग के नाम पर स्थानीय अपराधियों को जोड़कर वारदातें कराई जा रही थीं। कसरावद में कारोबारी दिलीप राठौर के घर फायरिंग की घटना ने इस आशंका को और मजबूत किया है।
इस केस में पहले ही कई आरोपी पकड़े जा चुके हैं, लेकिन पुलिस को शक है कि इनके पीछे फंडिंग और हथियार उपलब्ध कराने वाला अलग नेटवर्क सक्रिय है।
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