लॉरेंस गैंग की एंट्री से हड़कंप: एक महीने में 6 व्यापारियों से करोड़ों की रंगदारी मांग; इंटेलिजेंस पर उठते सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश, जिसे लंबे समय तक अपेक्षाकृत शांत राज्य माना जाता रहा, अब संगठित अपराध के बड़े नेटवर्क की नजर में आ गया है। बीते एक महीने में कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में व्यापारियों को धमकाकर 5 से 15 करोड़ रुपए तक की रंगदारी मांगी गई है। कई मामलों में दहशत फैलाने के लिए फायरिंग भी की गई।
सभी में एक जैसा पैटर्न सामने आया
अब तक ऐसे 6 मामले दर्ज हो चुके हैं और सभी में एक जैसा पैटर्न सामने आया है। पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने विशेष जांच टीम (SIT) बनाकर जांच शुरू की है। करीब 25 संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन नेटवर्क की जड़ें कहीं ज्यादा गहरी बताई जा रही हैं।
कैसे काम कर रहा है नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि गैंग का संचालन हैरी बॉक्सर कर रहा है, जो लॉरेंस बिश्नोई का करीबी माना जाता है। पहले अंतरराष्ट्रीय नंबरों से कॉल किए जाते हैं। फिर व्हाट्सऐप पर ऑडियो/वीडियो मैसेज भेजकर धमकाया जाता है।
डर का माहौल बनाया जाता है
पीड़ित की निजी जानकारी बताकर डर का माहौल बनाया जाता है। रकम न देने पर फायरिंग या हमले की चेतावनी दी जाती है। इस नेटवर्क का अहम कड़ी प्रदीप शुक्ला है, जिसे मुरैना से गिरफ्तार किया गया। उसने ही स्थानीय स्तर पर व्यापारियों की जानकारी जुटाने और गैंग से संपर्क कराने का काम किया।
प्रदेश में 6 बड़े केस, एक जैसा पैटर्न
इंदौर में तीन अलग-अलग व्यापारियों को निशाना बनाया गया। निपानिया के रंजन मित्तल को अंतरराष्ट्रीय कॉल और वॉइस नोट से धमकियां। तुकोगंज के संजय जैन से पहले 10, फिर 15 करोड़ की मांग और जामगेट क्षेत्र के एक रिसॉर्ट संचालक से 5 करोड़ की रंगदारी।
अशोकनगर में अंकित अग्रवाल से 10 करोड़ मांगे गए। यहां पुलिस ने पेट्रोल बम के साथ एक शूटर को पकड़ा। भोपाल के कोलार रोड निवासी गौरव जैन से भी 10 करोड़ की मांग; घर की रेकी कर वीडियो भेजा गया। खरगोन के कसरावद क्षेत्र में सत्येंद्र राठौर के घर के बाहर फायरिंग कर दहशत फैलाई गई और उसका वीडियो भेजकर 10 करोड़ रुपए मांगे गए। इस मामले में करीब 20 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
फंडिंग और लोकल नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि गैंग हवाला और बैंक खातों के जरिए पैसों का ट्रांसफर करता है। प्रदीप शुक्ला अलग-अलग खातों के जरिए रकम ट्रांसफर करवाता था। पकड़े गए आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्हें सीधे हैरी बॉक्सर से निर्देश मिलते थे। वीडियो कॉल के जरिए पेट्रोल बम बनाना तक सिखाया गया।
इंटेलिजेंस पर उठे सवाल
लगातार एक जैसे पैटर्न में हो रही घटनाओं ने पुलिस के इंटेलिजेंस सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक्सपर्ट मानते हैं कि समय रहते नेटवर्क की पहचान नहीं हो पाई, जिससे गैंग को पैर जमाने का मौका मिला। रिटायर्ड स्पेशल डीजी विपिन माहेश्वरी के मुताबिक डिजिटल और स्थानीय सूचना तंत्र मजबूत करना जरूरी है वहीं, वित्तीय लेनदेन की निगरानी बढ़ानी होगी। विभिन्न एजेंसियों के बीच डेटा साझा करना होगा। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय जरूरी है
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