जानिये किस शहर की सेंट्रल जेल में बनी तनाव की स्थिति: पूर्व पार्षद और भू-माफिया क्यों हुए आमने-सामने, हंगामे के बीच किसने हस्तक्षेप कर दोनों को किया अलग
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर सेंट्रल जेल में शनिवार की शाम उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब दो चर्चित बंदी पूर्व पार्षद अनवर कादरी उर्फ अनवर डकैत और भू-माफिया हेमंत यादव अचानक आमने-सामने आ गए। दोनों के बीच पुराने विवाद को लेकर शुरू हुई कहासुनी इतनी बढ़ गई कि मामला गिरेबान पकड़ने और धक्का-मुक्की तक जा पहुंचा। जेल परिसर में हंगामे जैसा माहौल बन गया। हालांकि जेल प्रहरियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने समय रहते हस्तक्षेप कर दोनों को अलग किया और स्थिति को नियंत्रण में ले लिया। जेल प्रशासन फिलहाल इस मामले पर आधिकारिक रूप से अधिक जानकारी देने से बच रहा है।
पुराने विवाद ने लिया उग्र रूप
सूत्रों के अनुसार दोनों बंदियों के बीच किसी पुराने विवाद को लेकर बहस शुरू हुई। देखते ही देखते दोनों आक्रामक हो गए और जेल परिसर में हंगामे जैसी स्थिति बन गई। मामला बिगड़ता देख जेल प्रहरी तुरंत मौके पर पहुंचे और दोनों को अलग किया। इसके बाद वरिष्ठ जेल अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई।
डॉक्टर पर हमले की साजिश में बंद है हेमंत यादव
भू-माफिया हेमंत यादव हाल ही में विजयनगर क्षेत्र में एक डॉक्टर पर हमले की साजिश रचने के मामले में जेल में बंद है। विजयनगर थाने में 16 दिसंबर को डॉ. शिवकुमार यादव ने शिकायत दर्ज कराई थी कि दो बदमाशों ने उनकी कार रोककर हमला किया और लोहे की रॉड से कार का शीशा तोड़ दिया। पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर खुलासा हुआ कि इस हमले की साजिश जेल में बैठे हेमंत यादव ने रची थी।
मिलकर योजना बनाई
पुलिस के अनुसार हेमंत ने जेल में बंद साजिद, मोहसिन और कालू के साथ मिलकर योजना बनाई थी और आरोपियों की जमानत कराने तथा वारदात के लिए पैसे देने की बात भी कही थी। जांच में सामने आया कि हेमंत यादव की डॉ. एस.के. यादव से पुरानी रंजिश थी। वर्ष 2022 में डॉक्टर ने उसके बेटे मोहित यादव का इलाज किया था जिसमें पैर काटना पड़ा था। हेमंत इसे डॉक्टर की लापरवाही मानता था और इसी रंजिश में उसने हमला करवाने की साजिश रची।
26 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज
हेमंत यादव पर 26 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं। वर्ष 1996 में जानलेवा हमले के मामले में वह लंबे समय तक फरार रहा। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जमानत के लिए अपील की गई लेकिन राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट के सरेंडर के निर्देश के बावजूद उसने आत्मसमर्पण नहीं किया, तब पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा। उस पर तुकोगंज थाने और कोर्ट से केस से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब करवाने के आरोप भी लगे, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
'लव जिहाद' फंडिंग मामले में बंद है अनवर कादरी
वहीं पूर्व पार्षद अनवर कादरी 'लव जिहाद' फंडिंग और अन्य आपराधिक मामलों में जेल में बंद है। बाणगंगा पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों साहिल शेख और अल्ताफ शाह ने पूछताछ में दावा किया था कि अनवर कादरी ने हिंदू युवतियों को फंसाने और शादी करवाने के लिए आर्थिक मदद दी थी। इन आरोपों के बाद इंदौर नगर निगम ने नवंबर 2025 में उसकी पार्षद सदस्यता समाप्त कर दी और उसे पांच साल तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया गया।
'अनवर डकैत' नाम कैसे पड़ा
अनवर कादरी पर पहले भी कई गंभीर मामले दर्ज रहे हैं। वर्ष 1996 में उज्जैन के महाकाल थाने में डकैती का मामला दर्ज होने के बाद वह "अनवर डकैत" के नाम से कुख्यात हो गया। वर्ष 2011 में कांग्रेस पार्षद रहते हुए जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने उसे, उसके भाई और एक अन्य आरोपी को एक-एक साल की सजा सुनाई थी। उस मामले में पुलिस ने हथियार भी बरामद किए थे।
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