बीईओ कार्यालय के घोटाले में जेडी और डीईओ पर गिर सकती है गाज: कलेक्टर कर सकते हैं अफसरों से रिकवरी की कार्रवाई
KHULASA FIRST
संवाददाता

जांच रिपोर्ट में स्कूल शिक्षा विभाग के जिम्मेदार पांच बीईओ में से तीन सेवानिवृत्त दो शिक्षा विभाग की कमान संभाल रहे
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
स्कूल शिक्षा विभाग के बीईओ कार्यालय के करीब पौने तीन करोड़ रुपए के घोटाले में तत्कालीन संभागीय संयुक्त संचालक व जिला शिक्षा अधिकारी सहित पांच तत्कालीन बीईओ को जिम्मेदार ठहराया गया है। इससे जेडी और डीईओ की कुर्सी खतरे में आ गई है। कहा जाने लगा है कि अब कलेक्टर इन अफसरों से रिकवरी की कार्रवाई कर सकते हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग के विकास खंड शिक्षा कार्यालय में वर्ष 2018 से वर्ष 2024 के बीच करीब दो करोड़ सतासी लाख रुपए के हेरफेर के मामले का खुलासा हुआ, जिसकी कलेक्टर शिवम वर्मा ने जांच कराई। जांच अधिकारी कोष एवं लेखा विभाग की दिव्या शर्मा को सौंपी गई। जांच अधिकारी की रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासा हुआ है।
हालांकि इस मामले में कलेक्टर द्वारा पहले ही पांच कर्मचारियों को आरोपी मानकर निलंबित करने और उनके बैंक खाते सील करने की कार्रवाई की जा चुकी है। इस कार्रवाई के बाद इस बात की चर्चा शुरू हो गई थी कि कलेक्टर की कार्रवाई में छोटे कर्मचारी कम्प्यूटर ऑपरेटर सिद्धार्थ जोशी व अन्य को आरोपी बनाकर अफसरों को बचाने का खेल हुआ है, लेकिन अब जब जांच अधिकारी की जांच रिपोर्ट पेश की गई तो उसमें मौजूदा संभागीय संयुक्त संचालक अनीता चौहान, जिला शिक्षा अधिकारी शांता स्वामी सहित पांच तत्कालीन बीईओ हीरालाल खुशाल, ओपी वर्मा और खोड़े का नाम शामिल है। जांच रिपोर्ट के खुलासे के बाद स्कूल शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
यह है मामला
जांच अधिकारी दिव्या शर्मा द्वारा तैयार की गई जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देयकों से आईएफएमआई एस रिपोर्ट का मिलान करने पर पाया गया कि देयक सूची में दर्ज नाम बैंक खाता नंबर में बिल जनरेट करते समय छेड़छाड़ की गई। बीईओ कार्यालय में कम्प्यूटर ऑपरेटर का कार्य करने वाला सिद्धार्थ जोशी (भृत्य खजराना हायर सेकंडरी स्कूल) रेणु जोशी, मोहक जोशी, जो शासकीय कर्मचारी नहीं है ऐसे सात खातों में वेंडर के नाम से भुगतान किया गया।
यह भुगतान नियमित होता रहा। जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि बीईओ कार्यालय में पदस्थ कर्मचारियों दिनेश पवार गणक, अतुल त्रिवेदी कार्यालय सहायक, राहुल अहीरे कार्यालय सहायक के कथन लिए गए और पाया गया कि भृत्य सिद्धार्थ जोशी सभी बिल जनरेट करता था, जबकि यह उसका काम नहीं था।
खतरे में कुर्सी
बताया जाता है कि बीईओ कार्यालय के घोटाले का खुलासा होने के बाद संभागीय संयुक्त संचालक अनीता चौहान और जिला शिक्षा अधिकारी शांता स्वामी का हटना तय हो गया है। जबकि आरोपो से घिरे तत्कालीन तीन बीईओ हरिलाल खुशाल, ओपी वर्मा और खाड़े भी अब शासकीय सेवा में नहीं हैं।
इसके चलते कलेक्टर के कोप की गाज इन दोनों शिक्षा विभाग की कमान संभाल रही महिला अफसरों पर गिर सकती है। इसके चलते आने वाले दिनों में जेडी और डीईओ की कुर्सी हटना तय है। सूत्रों की मानें तो मौजूदा डीईओ शांता स्वामी ने प्राचार्य रहते हुए मल्हाराश्रम आवासीय स्कूल और बाल विनय मंदिर उत्कृष्ट विद्यालय में पदस्थ रहने के साथ ही दो बार बीईओ की कुर्सी संभाली। इसके चलते उनके खिलाफ विभागीय जांच होने से कई अन्य मामलों का खुलासा भी हो सकता है।
पांचों बीईओ ने पालन नहीं किया: जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया है कि नियमानुसार आहरण एवं संवितरण अधिकारी (बीईओ) द्वारा एक माह में सभी देयकों को सत्यापित किया जाना था। इन अधिकारियों की यह भी जवाबदारी थी कि एक माह में ट्रेजरी को बताएं कि सभी भुगतान सही बैंक खातों में किए गए हैं, जिनका इन पांचों बीईओ ने पालन नहीं किया, जिससे हेराफेरी संभव हो सकी।
जांच में यह भी कहा है कि प्रत्येक भुगतान में ओटीपी देने की जवाबदारी भी बीईओ की थी। इसके बाद भी अब तक मामले में विभाग ने न ही कोई एफआईआर कराई है, न इन अधिकारियों के खिलाफ किसी तरह की भी कार्रवाई की गई है।
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