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चोइथराम मंडी जितना इलाज करो मर्ज बढ़ता ही जाता है: चोइथराम मंडी में रिक्शा वालों ने मचा दिया कोहराम

KHULASA FIRST

संवाददाता

09 मई 2026, 12:53 pm
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चोइथराम मंडी जितना इलाज करो मर्ज बढ़ता ही जाता है

डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
वाहनों का जाम लगने की बड़ी वजह मंडी में जाम लगने की बड़ी वजह ट्रक, पिकअप के साथ ऑटो, ई-रिक्शा, बाइक, कारें सब मंडी के अंदर आ जाती हैं। इससे मंडी ओवरलोड हो जाती है।

माल उतारने के बाद भी बहुत से ट्रक और पिकअप मंडी में ही खड़े रहते हैं। जब तक ये नहीं हटेंगे, नए भरे ट्रक अंदर नहीं आ पाते और गेट के बाहर लंबी लाइन लग जाती है।

क्षमता से ज्यादा लोड देशभर से एकदम 300-400 ट्रक पहुंच जाते हैं। प्याज-आलू सीजन में भी गाड़ियां बढ़ जाती हैं। मंडी की क्षमता से ज्यादा लोड होते ही जाम लग जाता है।

मंडी के बाहर ठेलों का कब्जा गेट के बाहर सड़क पर ही फल-सब्जी के सैकड़ों ठेले लग जाते हैं। टू लेन की सड़क सिंगल लेन बचती है। इन्हें हटाओ तो फिर लग जाते हैं।

केसरबाग ब्रिज से राजीव गांधी प्रतिमा तक दो किमी का जाम लग जाता है।

जगह की कमी और गलत पार्किंगमंडी में प्लेटफार्म फुल होने के बाद नई गाड़ियों के लिए जगह नहीं बचती। लोडिंग वाले वाहन और किसानों के वाहन आमने-सामने फंस जाते हैं। सड़क पर ही अवैध पार्किंग भी होती है।

पुलिस/स्टाफ कममंडी के हिसाब से ट्रैफिक संभालने वाले पुलिसकर्मी कम हैं। नतीजा 12 घंटे तक जाम लगा रहता है, किसान रातभर ट्रक में सोते हैं।

टाइमिंग भी वजह सुबह 4 से 10 बजे तक नीलामी और खरीदारी पीक पर रहती है। इसी टाइम सबसे ज्यादा ट्रक, ठेले, खरीदार सब एकसाथ आते हैं, इसलिए इस समय सबसे बुरा जाम लगता है।

मंडी थोक व्यापार के लिए है लेकिन खेरची व्यापार थोक व्यापार पर हावी हो चुका है। खेरची व्यापारियों को मंडी के बाहर स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाए तो मंडी के कई समस्याएं नियंत्रित हो सकती हैं।

मं डी के अंदर यातायात व्यवस्था उनके कारण अस्त-व्यस्त हो जाती है। पूरे समय जाम के हालात रहते हैं। वैसे भी मंडी थोक व्यवसाय के लिए है, लेकिन खेरची का व्यवसाय भी राजनीतिक और गुंडागर्दी के कारण बेखौफ होता है।

इस पर सवारी रिक्शा टैक्स चोरी का कारण भी थे। समस्या लगातार बढ़ रही थी। व्यापारियों ने मंडी प्रशासन से इसकी शिकायत की। आखिर में सवारी रिक्शा को मंडी में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया।

सवारी रिक्शा वालों के साथ कुछ नेता और कुछ समाज विशेष की नेतागीरी करने वाले नेता तथा उनके साथ मंडी के कर्मचारियों का एक समूह जो किसी भी तरह नेक का प्रभाव चाहता है, वह सक्रिय हो गए और मंडी गेट पर जाम लगाया।

इस कारण लगभग दो घंटे मंडी के बाहर और भीतर तेज धूप में जाम लग रहा। प्रशासन और पुलिस के आने पर नाका प्रभारी पर बचाओ में कोई कारण नहीं दे पाने पर मनगढ़ंत आरोप लगाए। जातिसूचक शब्दों और मारपीट जैसे आधारहीन शिकायत की।

सूत्र बताते हैं कि सवारी रिक्शा के कारण मंदी को प्रतिदिन लगभग 25000 रुपए टैक्स की हानि हो रही थी। यह प्रामाणिक तथ्य उसे समय सामने आया, जब सवारी रिक्शा को प्रतिबंधित किया और सामान खुले लोडिंग वाहन और ठेला गाड़ी से बाहर जाने लगा।

इससे टैक्स की बढ़ोतरी हो गई यानी सवारी रिक्शा मंडी की यातायात और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए ही नहीं बल्कि राजस्व के लिए भी बड़ा सिर दर्द बन गए थे, इसलिए इन पर प्रतिबंध जरूरी हो गया था। दबाव प्रभाव बनाने के लिए सवारी रिक्शा वालों के समूह ने जब कुछ नहीं मिला तो नाका के प्रभारी अंतर सिंह सिसोदिया को निशाने पर लिया।

इसलिए टारगेट पर अंतर सिंह... फल सब्जी मंडी और कृषि उपज मंडी की व्यवस्थाओं प्रबंधन और प्रशासन के मामलों में अंतर सिंह एक मंझे हुए और अनुभवी कर्मचारी हैं। मंडी व्यवस्था में सुधार के पक्षधर रहे हैं। इस मंडी में तत्कालीन सचिव मनीष सिंह के समय जो सुधार कार्य और विकास के काम हुए उसमें सबसे बड़ी भूमिका अंतर सिंह की थी। मनीष सिंह के समय मंडी के राजस्व में भी जमकर बढ़ोतरी हुई। इसका कारण अंतर सिंह जैसे कर्मचारियों को मनीष सिंह जैसे अधिकारियों और प्रशासन का पूरा संरक्षण रहा। मंडी की गुंडागर्दी, दादागीरी, खून-खराबा, नेताओं का मनमानी पूर्वक टैक्स चोरी में दखल सबकुछ नियंत्रण में आ गया था।

अंतर सिंह इस समय भ्रष्ट मंडी कर्मचारियों और व्यापारियों के निशाने पर इसलिए भी है कि उन्होंने नाका पर टैक्स वसूली की सारी व्यवस्था को ऑनलाइन करने का अभियान शुरू किया है। ऑनलाइन व्यवस्था होने से टैक्स चोरी नियंत्रित हो जाएगी और मंडी प्रशासन पर हर दिन लगने वाले भ्रष्टाचार के आरोपों से भी मुक्ति मिलेगी।

हर कोई मंडी कर्मचारियों को धमकाता... टैक्स वसूली का आलम यह है कि हर कोई मंडी के कर्मचारियों को धमकाता है। दुर्व्यवहार करता है गाली-गलौज करता है और यहां तक की करने की धमकी भी देता है इस कारण नाके पर तैनात प्रभारी को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। यह तब होता है, जब सख्ती से टैक्स वसूली की जाती है और यह काम अंतर सिंह ही कर पाते हैं, इसलिए उनका विरोध हमेशा होता है। इस पद पर पदस्थापना चाहने वाला एक समूह हमेशा राजनीतिक दबाव प्रभाव का इस्तेमाल कर अंतर सिंह को नाके से हटाने और खुद नाके पर आने या पदस्थ होने के लिए वह सब कुछ करता है, जो एक भ्रष्ट सिस्टम में होता है जैसा कि मंडी प्रशासन और कर्मचारियों की बातों से यह तथ्य सामने आता है।

जब-जब अंतर सिंह नाके पर रहते हैं, मंडी के राजस्व में हमेशा बढ़ोतरी होती है। इन्हीं सब कारणों से नाका प्रभारी हमेशा निशाने पर बने रहते हैं। अंतर सिंह को इन सबसे कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता और तबादले की भी वह चिंता नहीं करते जैसा कि उनके साथ काम करने वाले कर्मचारी और व्यापारी संगठनों के पदाधिकारी बताते हैं।

उनके विरोधियों को जब कोई मौका नहीं मिला तो सवारी रिक्शा वालों के कंधे पर बंदूक रखकर चला दी। वैसे, मंडी में यातायात व्यवस्था और थोक व्यापार के साथ खेरची व्यापार का प्रबंध भगवान भरोसे ही रहता है। यहां किसी भी तरह की कार्रवाई करना यानी मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डालने जैसा है। जिला प्रशासन भी इसीलिए मंडी के प्रबंधन और व्यवस्थाओं को सुधारने में ज्यादा रुचि नहीं लेता। इसका कारण सांसद हो या विधायक हो या मंत्री हो या बाहुबली हो या धनबली सभी पूरे समय मंडी में हस्तक्षेप बनाए रखते हैं।

मंडी में फलों का व्यवसाय व्यापारी मनमाने तरीके से करते हैं आलू-प्याज हो या फल, सब्जी, भाजी वाहनों को दुकानों के सामने मनमाने तरीके से खड़ा करवाया जाता है। इस कारण मंडी के भीतर पूरे समय जाम के हालात बने रहते हैं। मंडी में इन दोनों वाहनों की संख्या हर दिन करीब 5000 से ज्यादा की है और इसको नियंत्रित करने वाले कर्मचारी नहीं के बराबर हैं। यहां पुलिस का कोई सहयोग नहीं मिल पाता। मंडी में व्यापार दिनों दिन बढ़ता जा रहा है और मंडी का क्षेत्रफल सीमित है। इस कारण समस्याएं बढ़ती जा रही हैं और समस्याओं के समाधान का कोई वैधानिक प्रबंधन भी मंडी प्रशासन नहीं कर पाता।

चोइथराम मंडी में बीते गुरुवार को सवारी रिक्शा वालों ने कोहराम मचा दिया। मंडी के मुख्य प्रवेश द्वारा नाका चौकी पर चक्काजाम कर दिया। कारण सवारी रिक्शा का मंडी में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया।

इसकी वजह यह थी कि सवारी रिक्शा वाले सवारी की बजाय खेरची सब्जी, भाजी, फल आदि सामग्री लेकर सवारी की बजाय लोडिंग वाहन की तरह मंडी में आते-जाते थे। इनकी संख्या लगभग 500 से ज्यादा रहती है।

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