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दुष्कर्म के आरोपी भाजयुमो नेता पर भाजपा नेतृत्व मेहरबान?: केस के बाद भी पार्टी में प्रभाव कायम

KHULASA FIRST

संवाददाता

18 मई 2026, 9:28 pm
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दुष्कर्म के आरोपी भाजयुमो नेता पर भाजपा नेतृत्व मेहरबान?

महेश दीक्षित 98935-66422 खुलासा फर्स्ट…इंदौर।

भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व दोहरे मापदंडों के आरोपों में घिरता नजर आ रहा है। एक तरफ पार्टी अनुशासन के नाम पर छोटे मामलों में कार्रवाई करती है, दूसरी ओर दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोपों से घिरे नेताओं पर नरमी बरतने के आरोप लग रहे हैं।

ताजा मामला बालाघाट का है, जहां 16 मई (शनिवार) को भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर के दौरे के दौरान दुष्कर्म के आरोपी पूर्व भाजयुमो जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सुहागपुरे की सक्रिय मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए। दलित महिला शिक्षिका से दुष्कर्म के मामले में आरोपी और फिलहाल जमानत पर चल रहे सुहागपुरे न सिर्फ पूरे कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष के साथ नजर आए, बल्कि मंच पर उनका स्वागत करते और सम्मान पाते भी दिखाई दिए (फोटो में लाल घेरे में भूपेंद्र सुहाग पुरे)। हैरानी की बात यह रही कि भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने सार्वजनिक मंच से भूपेंद्र सुहागपुरे की पीठ थपथपाई और उन्हें ‹जिलाध्यक्ष› कहकर संबोधित किया। जबकि दुष्कर्म का मामला दर्ज होने के बाद उन्हें पद से हटाया जा चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या संगठन ने केवल दिखावे के लिए सुहाग पुरे पर कार्रवाई की थी?

मंच पर श्याम टेलर के साथ, खुलेआम सम्मान… सवालों में संगठन की रीति-नीति

केस के बाद भी पार्टी में प्रभाव कायम
बता दें कि भाजयुमो नेता भूपेंद्र सुहागपुरे पर 17 नवंबर 2024 को महिला पुलिस थाने में एक स्थानीय दलित महिला शिक्षिका ने दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है और आरोपी सुहाग पुरे जमानत पर है। गंभीर आरोप लगने के बाद भाजयुमो जिलाध्यक्ष पद से तो सुहाग पुरे को हटाया गया, लेकिन पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समाप्त नहीं की गई। यही नहीं, पार्टी कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय मौजूदगी यह संकेत देती है कि संगठन के भीतर उनका प्रभाव अब भी बरकरार है।

भूपेंद्र को बड़े नेताओं का संरक्षण 
पार्टी सूत्रों का दावा है भूपेंद्र सुहागपुरे को कुछ बड़े नेताओं का संरक्षण है। सुहागपुरे को पूर्व मंत्री और वर्तमान बालाघाट भाजपा जिलाध्यक्ष रामकिशोर कांवरे का खुला समर्थन रहा है। सांसद पर भी अप्रत्यक्ष संरक्षण देने के आरोप लगते रहे हैं।

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